विगत दस वर्षो में 1455 को मृत्युदंड - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2013

विगत दस वर्षो में 1455 को मृत्युदंड


पिछले दस वर्षो में 1,445 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। इस लिहाज से देश के विभिन्न न्यायलयों ने हर तीसरे दिन एक को मृत्युदंड की सजा सुनाई। इस बात की जानकारी एक मानवाधिकार संगठन ने गुरुवार को आधिकारिक दस्तावेज के हवाले से दी है। एशियन सेंटर पर ह्यूमन राइट के निदेशक सुहास चकमा ने कहा, "राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के रिकॉर्ड के अनुसार 2001-2011 के दौरान कुल 1,455 और प्रतिवर्ष औसतन 132.27 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई।"

गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ने एनसीआरबी के आकड़ों का हवाला देते हुए कहा, "भारत में मृत्युदंड की स्थिति" 2013 के नाम से रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट के अनुसार 370 दोषियों को मृत्युदंड की सजा के साथ उत्तर प्रदेश सूची में शीर्ष स्थान पर रहा। उत्तर प्रदेश के बाद स्थान बिहार और महाराष्ट्र का रहा जहां क्रमश: 132 और 125 दाषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 71 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई।

उत्तरपूर्वी राज्यों अरूणाचल प्रदेश, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और केंद्र शासित प्रदेशों में अंडमान और निकोबार द्वीप, दादरा एवं नगर हवेली और लक्षद्वीप में एक को भी मृत्युदंड की सजा नहीं सुनाई गई। रिपोर्ट के अनुसार 4,321 मृत्युदंड का सामना कर रहे दोषियों की सजा को आजीवन कारावास में बदला भी गया। अकेले दिल्ली में 2,462 दोषियों की मृत्युदंड की सजा को आजीवन कारावास में बदला गया। इस लिहाज से उत्तर प्रदेश 458 आंकड़े के साथ दूसरे स्थान पर रहा। जम्मू एवं कश्मीर में महज 18 लोग ही फांसी के फंदे से बच पाए।

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