फांसी के 2 दिन बाद परिवार को मिली चिट्ठी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 11 फ़रवरी 2013

फांसी के 2 दिन बाद परिवार को मिली चिट्ठी


तिहाड़ जेल निरीक्षक द्वारा स्पीड पोस्ट के जरिए भेजा गया संदेश अफजल गुरु की फांसी के दो दिन बाद सोमवार को कश्मीर घाटी के सोपोर कस्बे में रह रहे उसके परिवार को प्राप्त हुआ। यहां के डाक अधिकारियों को यह पत्र शनिवार शाम प्राप्त हुआ। सोपोर के नजदीक स्थित दैबगाह गांव में अफजल गुरु के चचेरे भाई यसीन गुरु ने पत्रकारों से कहा, "डाक अधिकारियों द्वारा स्पीड पोस्ट का एक पत्र हमें आज प्राप्त हुआ। तिहाड़ जेल के अधिकारियों ने यह पत्र अफजल के परिवार को भेजा है।"


जम्मू एवं कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर के एक वरिष्ठ डाक अधिकारी ने बताया कि यह पत्र शनिवार शाम प्राप्त हुआ था, लेकिन रविवार को छुट्टी होने की वजह से इसे सोमवार को गुरु के परिवार को सौंपा गया। मुख्य डाक महाप्रबंधक (जम्मू एवं कश्मीर) जॉन सैम्युअल ने पत्रकारों से कहा, "हवाई मार्ग से भेजा गया यह स्पीड पोस्ट हमें शनिवार शाम प्राप्त हुआ। यह अफजल की पत्नी तबस्सुम के लिए था। रविवार को सरकारी छुट्टी थी, इसलिए स्पीड पोस्ट सोमवार को सौंपा गया।"



संसद हमले के मुख्य दोषी, अफजल की पत्नी तबस्सुम और बेटे गालिब से मुलाकात अगस्त 2012 में हुई थी। उसके परिवार का कहना है कि उन्हें फांसी की खबर टेलीविजन चैनल से प्राप्त हुई और उन्हें जेल अधिकारियों की तरफ से कोई फोन नहीं किया गया था। केंद्रीय गृह सचिव आर.के. सिंह ने शनिवार को कहा था, "परिवार को जानकारी पहले दे दी गई थी। मैंने जेल अधिकारियों से पूछा और उन्होंने मुझे सूचना दी थी कि उन्होंने स्पीड पोस्ट के जरिए दो पत्र भेजे हैं। कश्मीर के पुलिस महानिदेशक से इसकी दोबारा जांच करने के लिए कहा गया था। परिवार को सूचित न करना ठीक नहीं है।"



जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जेल प्रशासन द्वारा अफजल के परिवार को स्पीड पोस्ट के जरिए सूचना दिए जाने की आलोचना की है। उन्होंने एक टेलीविजन चैनल से कहा, "मनुष्य होने के नाते इस मुद्दे पर खुद को सांत्वना दे पाना मेरे लिए बहुत कठिन हो रहा है कि हमने एक व्यक्ति को अंतिम बार उसके परिवार से मिलाए बगैर फांसी पर लटका दिया। आज के विकसित युग में यदि हम किसी के परिवार को स्पीड पोस्ट के जरिए यह सूचित करते हैं कि उसके किसी प्रिय को फांसी दी जा रही है, तो यह बिल्कुल गलत है। काश उस परिवार को जानकारी देने का अधिकार हमारे पास होता।"

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