ज्यातर राज्य खाद्य सुरक्षा विधेयक के पक्ष में नहीं. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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गुरुवार, 14 फ़रवरी 2013

ज्यातर राज्य खाद्य सुरक्षा विधेयक के पक्ष में नहीं.


दुनिया के सबसे बड़े जनकल्याण कार्यक्रम के तौर पर माने जा रहे खाद्य सुरक्षा विधेयक को उस वक्त झटका लगा, जब आपूर्ति किये जाने वाले सस्ते अनाज की मात्रा और इसके दायरे में आने वाले लाभार्थियों की संख्या को लेकर ज्यादातर राज्यों ने असहमति जताई।

राज्यों के खाद्य मंत्रियों की यहां एक बैठक आयोजित की गई, जिसका मकसद इस संबंध में संसदीय समिति की सिफारिशों पर आम सहमति कायम करना था। संसदीय समिति ने प्रस्तावित खाद्य विधेयक में व्यापक बदलावों का सुझाव दिया है। खाद्य सुरक्षा विधेयक का उद्देश्य आबादी के लगभग दो तिहाई लोगों को सस्ता अनाज उपलब्ध कराने का कानूनी अधिकार प्रदान करना है।  विधेयक के प्रावधानों को अस्पष्ट बताते हुये तमिलनाडु ने अपने आप को इसके क्रियान्वयन से अलग रखे जाने की मांग रख दी, जबकि बिहार, ओडीसा, केरल, पंजाब और गुजरात जैसे राज्यों ने प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा कानून को जल्दबाजी में लागू करने के बजाय इससे पहले सार्वजनिक वितरण प्रणाली का आधुनिकीकरण करने का सुझाव दिया है।

विधेयक पर आम सहमति नहीं बनने पर इसके क्रियान्वयन में देरी के बारे में पूछे जाने पर केन्द्रीय खाद्य मंत्री के वी थॉमस ने अलग से कहा कि तमिलनाडु को छोड़कर सभी राज्यों ने विधेयक का स्वागत किया है। कुछ ने कुछ प्रावधानों को लेकर आपत्ति जताई है, हम सभी राज्य को संतुष्ट नहीं कर सकते। हमारा इरादा संसद के आगामी सत्र में संशोधित विधेयक पेश करने का है।

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