गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने अफजल गुरु की फांसी को पूरी तरह से न्यायिक प्रक्रिया बताते हुए दावा किया है कि उसके परिवार को फांसी की सूचना सात फरवरी को ही दे दी गई थी। जब शिंदे से पूछा गया कि कसाब और अफजल गुरु के बाद अब किसको फांसी होगी, शिंदे ने हंसते हुए कहा कि अगला कौन ये बताऊंगा तो कोई और कोर्ट में जाएगा।
शिंदे ने दावा किया कि जेल प्रशासन ने अफजल की फांसी की सूचना उसके परिजनों को स्पीड पोस्ट से भेजी थी जिसकी रसीद उनके पास है। जब उनसे पूछा गया कि ये स्पीड पोस्ट समय पर परिजनों तक क्यों नहीं पहुंची तो उनका कहना था कि सारे काम गृहमंत्री ही नहीं करता। मैंने सिर्फ इस सूचना पर साइन किए थे। स्पीड पोस्ट जेल प्रशासन भेजता है। इस मामले में भी जेल मैनुअल के हिसाब से पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया।
उन्होंने माना कि इस मामले में गोपनीयता बरती गई क्योंकि यदि जब कुछ खुलेआम और पारदर्शी हो जाएगा तो काम नहीं हो पाएगा। हिंदू आतंकवाद संबंधी बयान को लेकर बीजेपी द्वारा गृहमंत्री के विरोध के ऐलान पर शिंदे ने कहा कि अगर बीजेपी काला झंडा दिखाना चाहती है तो दिखाए।
जब शिंदे से पूछा गया कि क्या उन्होंने अपने विरोध को कम करने के लिए ही अफजल की फांसी का फैसला किया तो उन्होंने कहा कि मेरे बयान का अफजल की फांसी का कोई लिंक नहीं है। आतंकवाद का कोई रंग नहीं होता। सरबजीत के मसले पर शिंदे ने कहा कि मैं पहले ही ये मसला पाक गृहमंत्री के समक्ष उठा चुका हूं। उन्होंने कहा है कि ये मसला विचाराधीन है। जब शिंदे से पूछा गया कि राजीव गांधी की हत्या की साजिश और बेअंत सिंह की हत्या के दोषी आतंकियों को फांसी क्यों नहीं होती तो उन्होंने कहा कि ये मामला अभी तक कोर्ट में विचाराधीन है। अफजल की कब्र पर उसके परिवारवालों द्वारा अंतिम संस्कार की इजाजत मांगने के मुद्दे पर शिंदे ने कहा कि इसपर विचार किया जा सकता है।
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