लड़कियों के लिए सैनिक स्कूल खोलने की मांग. - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 12 फ़रवरी 2013

लड़कियों के लिए सैनिक स्कूल खोलने की मांग.


महिला एवं बालिका सशक्तिकरण के लिए जारी प्रयासों के बीच देश में लड़कियों के लिए सैनिक स्कूल खोलने की मांग तेज हो गई है.संसद की एक स्थायी समिति ने अपनी सिफारिशों में लड़कियों के लिए सैनिक स्कूल शुरू करने के प्रस्ताव का समर्थन किया है. कांग्रेस सांसद सतपाल महाराज के अध्यक्षता वाली संसद की स्थायी समिति ने लड़कियों के लिए सैनिक स्कूल स्थापित करने के लिए जरूरी नीति बनाने का सुझाव दिया है.

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘मंत्रालय को नये संकाय में महिला अधिकारियों की भर्ती के लिए जरूरी आधारभूत संरचना सृजित करना चाहिए और एनडीए में महिला अधिकारियों के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए. इस प्रक्रिया में लड़कियों के लिए सैनिक स्कूल की स्थापना सहायक की भूमिका निभायेगा.’ सतपाल महाराज ने इस विषय में पूछे जाने पर कहा कि वह लड़कियों के लिए सैनिक स्कूल स्थापित करने के बारे में राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) की अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिठ्ठी लिखने जा रहे हैं. महिला सशक्तिकरण की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल होगी.

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष शांता सिन्हा ने कहा कि यह एक अच्छा प्रस्ताव है और निश्चित तौर पर लड़कियों के लिए अलग सैनिक स्कूल स्थापित करने से विकास की दौड़ में पीछे रह गई एक बड़ी आबादी को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा. मध्यप्रदेश सरकार ने रक्षा मंत्रालय को लड़कियों के लिए अलग सैनिक स्कूल खोलने का प्रस्ताव भेजा था लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया.

संसदीय समिति ने हालांकि मध्यप्रदेश सरकार के लड़कियों के लिए सैनिक स्कूल खोलने के प्रस्ताव की सराहना करते हुए इसे बलिकाओं को प्रोत्साहित करने के लिए उत्साहवर्धक पहल बताया है. राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष यासमिन अबरार ने कहा कि निश्चित तौर पर यह स्वागत योग्य प्रस्ताव है और इस पर अमल किया जाना चाहिए. लड़कियों के लिए सैनिक स्कूल स्थापित करना महिला एवं बालिका सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा.

संसदीय समिति में रक्षा मंत्रालय ने कहा कि लड़कियों के लिए अलग सैनिक स्कूल स्थापित करने के प्रस्ताव को इसलिए नहीं स्वीकार किया गया क्योंकि एनडीए में महिलाओं के लिए कोई खास गुंजाइश नहीं होती है. रक्षा मंत्रालय ने समिति को बताया कि सेना के तीनों अंगों में महिलाओं की सीमित तैनाती होती है. समिति ने कहा कि मंत्रालय को इस विषय पर नीति बनानी चाहिए और समिति को इसके बारे में सूचित करना चाहिए. गौरतलब है कि देश के 21 राज्यों में लड़कों के लिए 24 सैनिक स्कूल है लेकिन लड़कियों के लिए एक भी नहीं है. उत्तर प्रदेश समेत सात राज्यों में सैनिक स्कूल नहीं है. पिछले वर्ष तक सेना की अल्पावधि सेवा में करीब साढे पांच हजार महिला अधिकारी तैनात थीं.

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