रक्षा सौदों में घोटालों की फेहरिस्त में एक नया घोटाला जुड़ गया है। इस बार आरोप भारत के पूर्व वायुसेनाध्यक्ष एसपी त्यागी पर लगाए गए हैं। इटली की एक जांच एजेंसी ने इस बात का खुलासा किया है। एजेंसियों ने आरोप लगाया है कि आगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टरों के सौदे में कंपनी फिनमैकेनिका ने त्यागी को रिश्वत दी थी। इस मामले में मंगलवार को कंपनी के सीईओ को रोम में गिरफ्तार कर लिया गया है। कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर के नियमों में फेरबदल किया गया था।
आरोप है कि करीब 3,600 करोड़ रुपये के सौदे को हथियाने के लिए भारत में साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये से ज्यादा की रिश्वत बांटी गई। संसद सत्र से पहले उजागर हुए इस मामले ने सरकार की परेशानी खासी बढ़ा दी है। इसके बाद विपक्षी भाजपा के आक्रामक तेवरों से घबराई सरकार ने तुरंत मामले की सीबीआई जांच के आदेश दे दिए हैं। साथ ही फिलहाल इन हेलीकॉप्टरों की अगली खेप भी न लेने का मन बना लिया है। एक अंग्रेजी अखबार ने शुरुआती जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए ये खबर छापी है। अखबार का कहना है कि 64 पेज की अपनी रिपोर्ट में जांचकर्ताओं ने त्यागी के नाम का खुलासा किया है। हालांकि त्यागी की ओर से इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है।
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता कार के मुताबिक इस सौदे की जांच में प्राप्त जानकारियों को लेकर बार-बार आग्रह के बावजूद इटली और ब्रिटेन सरकार की ओर से नई दिल्ली को कोई जानकारी नहीं दी गई है। लिहाजा मंत्रालय ने इसकी जांच सीबीआइ को देने का फैसला किया है। भारत ने 2010 में फिनमैकेनिका की सहयोगी अगस्ता-वेस्टलैंड (यूके) के साथ 12 हेलीकॉप्टरों की खरीद का सौदा किया था।
कंपनी के सीईओ की गिरफ्तारी के बाद अब अगस्ता-वेस्टलैंड के प्रमुख ब्रूनो स्पैग्नोलिनी को नजरबंद करने के भी आदेश दिए गए हैं। इस कड़ी में अक्टूबर 2012 में स्विट्जरलैंड पुलिस ने गुइडो राल्फ हाशके नामक 62 वर्षीय कंसल्टेंट को भी गिरफ्तार किया था। हालांकि बाद में उसे छोड़ दिया गया था। करीब डेढ़ साल से इटली सरकार फिनमैकेनिका के खातों को भारत के साथ हुए इस सौदे में दलाली की पड़ताल के लिए खंगाल रही है।
मामले पर भारत अप्रैल और अक्टूबर में इटली से जानकारी देने का आग्रह कर चुका है। साथ ही सौदे को लेकर ब्रिटेन से भी मदद मांगी गई थी। प्रवक्ता के अनुसार इटली सरकार का कहना है कि जांच अभी न्यायिक निगरानी में है। इस कारण इटली सरकार फिनमैकेनिका कंपनी से जुड़ी जांच पर जानकारियां साझा नहीं कर सकती।
सूत्रों के मुताबिक इस सौदे पर सीबीआई जांच शुरू होने के बाद जब तक तस्वीर स्पष्ट नहीं होती, भारत के लिए मार्च, जून और सितंबर 2013 में कुल नौ एडब्ल्यू-101 वीवीआइपी हेलीकॉप्टरों की पावती टालने के सिवा चारा नहीं है। जनवरी 2013 में रक्षा मंत्रालय तीन हेलीकॉप्टर इतालवी कंपनी से हासिल कर चुका है जो पालम वायुसेना स्टेशन पर खड़े हैं।
हालांकि अभी तक किसी अतिविशिष्ट व्यक्ति ने इनका इस्तेमाल नहीं किया है। इस सौदे में गड़बड़ी साबित हुई तो इसके छींटे प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार एसपीजी और वित्त मंत्रालय पर भी आएंगे। अभी तक इस सौदे के लिए भारत में रिश्वत पाने को लेकर किसी का नाम सामने नहीं आया है। वैसे रक्षा मंत्रालय इंटेग्रिटी पैक्ट का हवाला देते हुए कह चुका है कि अगर गड़बड़ी पाई गई तो सौदा रद्द हो सकता है।
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