देहरादून, 29 मार्च। उत्तराखण्ड जैसे पहाड़ी राज्य में हर वर्ष शराब के ठेकों के आदेवनों में महिलाओं की संख्या बढ़ना एक चौकाने वाली बात है। जहां वर्ष 2012-13 के लिए कुल 3000 आवेदन महिलाओं के नाम से थे। इस बार अकेले विदेशी मदिरा ठेके में 4731 महिलाओं के आवेदन प्राप्त हुए हैं। जिले में अंग्रेजी शराब ठेके के लिए महिलाओं ने 4731 पुरुष 15143 जबकि देशी के लिए 1955 महिला व 7182 पुरुषों के आवेदन मिले हैं। जिले की दो बियर शॉप के लिए 66 महिला व 184 पुरुषों के आवेदन मिले हैं। राज्य सरकार की नई शराब नीति पर नजर डाले तो लगता है सरकार के पास आय के श्रोत खत्म हो गए हैं। नई लचीली आबकारी नीति से जहंा खुद ठेके मालिक ही खुद शराब तस्करी करने को मजबूर होंगे। वहीं प्रदेश में कई ठेेके समय से पहले ही अटक जाएंगे। अधिभार को घटाकर उसे शराब खरीद अतिरिक्त में बढ़ा दिया गया है।
जानकार बताते हैं इस साल राजधरनी दून में अकेले आवेदनों मात्र से 46 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है। पहाड़ से लेकर मैदानी जिलों में महिलाएं हमेशा शराब का विरोध करती रही हैं। जबकि सरकार ने मद्यनिषेध के बारे में जानना भी जरूरी नहीं समझा। आपको बताते चले कि मद्यनिषेध विभाग का बजट होता है जोकि शराब से लोगों को दूर रहने के लिए जागरूक करता है। पहाड़ की मातृशक्ति की जनभावनाओं से भी नई शराब नीति में खिलवाड़ किया गया है। जानकारों की मानें तो इस बार सरकार ने कर कम करके शराब की तस्करी रोकने का दावा किया है जबकि आबकारी विभाग के सूत्र बताते हैं कि चंडीगढ़ और हरियाणा से राज्य में शराब तस्करी होती है। इन दोनों राज्यों में शराब पर चार फीसदी ही टैक्स है जबकि नई नीति के हिसाब से राज्य में अब 32 फीसदी की बजाय अब 20 फीसदी टैक्स कर दिया गया है।
(राजेन्द्र जोशी)

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