समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने शुक्रवार को यहां कहा कि फिलहाल केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार से समर्थन वापस लेने का उनका कोई इरादा नहीं है। मुलायम ने इसके पहले दिल्ली में भी सीएनएन-आईबीएन के साथ एक विशेष बातचीत में कहा कि वह संप्रग सरकार से समर्थन वापस नहीं लेंगे, क्योंकि साम्प्रदायिक ताकतों को सत्ता से दूर रखने के लिए यह उनकी राजनीतिक मजबूरी है। मुलायम ने कहा, "यह (कांग्रेस को समर्थन देना) एक राजनीतिक मजबूरी है। हम साम्प्रदायिक ताकतों (भाजपा) के खिलाफ लड़ रहे हैं। जब हम साम्प्रदायिक ताकतों से अकेले लड़ रहे थे, तब केवल चंद्रशेखर जी हमारे सम्पर्क में थे। अयोध्या (विवादित ढांचे को 1992 में ढहाए जाने) के बाद हमें देश की एकता बरकरार रखनी थी। अन्यथा मुसलमान यह सोचते कि हमारे साथ कोई नहीं है।"
ज्ञात हो कि मुलायम का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब एक दिन पहले गुरुवार को दक्षिण अफ्रीका के डरबन से लौटते वक्त प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मीडियाकर्मियों से बातचीत में साफतौर पर कहा था कि केंद्र सरकार पूरी तरह से स्थिर है और वह अपना कार्यकाल पूरा करेगी। मुलायम ने यहां लखनऊ में मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान कहा, "सबंधों में कड़वाहट नहीं आई है। मुझे नहीं पता कि प्रधानमंत्री ने इस तरह का बयान क्यों दिया है। केंद्र सरकार से समर्थन वापसी को लेकर पार्टी के भीतर कोई चर्चा नहीं हुई है। अभी केंद्र सरकार से फिलहाल समर्थन लेने का कोई इरादा नहीं है।" मुलायम ने कहा, "हम समर्थन वापस लेकर सरकार क्यों गिराएं जब महज आठ-नौ महीने ही बचे हैं।"
मुलायम ने एक तरफ तो केंद्र से समर्थन वापस न लेने की बात कही, वहीं दूसरी ओर उन्होंने केंद्र सरकार को घोटालों की सरकार भी करार दिया। उन्होंने कहा कि अगर समय पर वह केंद्र सरकार को नहीं बचाते तो यह सरकार कब की गिर गई होती। उन्होंने कहा, "सभी घोटाले केंद्र सरकार की देन हैं। चुनाव के बाद अगली सरकार बिना हमारे सहयोग की नहीं बनेगी। मैंने किसी को धोखा नहीं दिया, बल्कि हमेशा मुझे ही धोखा दिया गया है।" मुलायम ने हालांकि इस दौरान बेनी प्रकरण की याद दिलाते हुए कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी की तारीफ भी की।
सीएनएन-आईबीएन के साथ एक विशेष बातचीत में मुलायम ने यह अनुमान भी लगाया कि अप्रैल-मई 2014 में प्रस्तावित आम चुनाव नवम्बर 2013 तक ही हो सकता है। मुलायम ने कहा, "मई में चुनाव नहीं होगा। चुनाव पहले होगा। यह विश्लेषण है.. चुनाव इसी वर्ष होगा, हो सकता है नवम्बर में हो। सभी दलों की चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।" मुलायम ने इस बात से इंकार किया कि वह भाजपा के करीब जा रहे हैं। उन्होंने कहा, "भाजपा के करीब जाने का क्या मतलब? यदि हमने किसी के साथ लड़ा है तो वह आडवाणी जी हैं। जब हम भाजपा के खिलाफ लड़ रहे थे, तो कांग्रेस मूकदर्शक खड़ी थी।"
सपा नेता ने कहा, "लोगों ने आडवाणी जी पर मेरे बयान की प्रशंसा की है। लेकिन आश्चर्य कि कांग्रेस और भाजपा के नेता मेरी आलोचना कर रहे हैं।" मुलायम ने कहा कि प्रधानमंत्री बनने की उनकी कोई महत्वाकांक्षा नहीं है। उन्होंने अलबत्ता तीसरे मोर्चे की आशा जाहिर की, जिसे कांग्रेस और भाजपा, दोनों खारिज कर चुके हैं। मुलायम ने कहा, "प्रधानमंत्री बनने की मेरी कोई महत्वाकांक्षा नहीं है।"
मुलायम ने आगे कहा, "जब भी तीसरा मोर्चा अस्तित्व में आया है, इसके गठन के बारे में किसी को भी अंदाजा नहीं रहा। यह अपने आप बना है। मैं समझता हूं कि इस बार भी ऐसा ही होगा। कई पार्टियां हमारे साथ आएंगी।" मुलायम ने कहा, "चुनाव बाद यदि स्थिति की मांग होती है, तो पार्टियां एकजुट हो सकती हैं और तीसरा मोर्चा बन सकता है। तीसरा मोर्चा हमेशा चुनाव बाद अस्तित्व में आया है।"
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें