कलेक्टर ने ली बिरसा जनपद के सरपंच एवं सचिवों की बैठक
- काम नहीं करने वालों को बख्शा नहीं जायेगा
कलेक्टर श्री बी. चन्द्रशेखर ने आज मलाजखंड में बिरसा जनपद की ग्राम पंचायतों के सरपंच एवं सचिवों की बैठक लेकर ग्रामीण विकास कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अविनाश लवानिया, बैहर के एस.डी.एम. श्री आशिष सिंह एवं अन्य विभागों के अधिकारी भी मौजूद थे। कलेक्टर श्री चन्द्रशेखर ने बैठक में सरपं एचं सचिवों से कहा कि वे शासन की हितग्राही मूलक योजनाओं का लाभ गांव के सभी पात्र व्यक्तियों तक पहुंचायें॥ पात्रता रखने वाला कोई भी व्यक्ति योजना के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने सरपंच एवं सचिवों से स्पष्ट कहा कि वे काम करें, जो सरपंच एवं सचिव काम नहीं करेगा उसे बख्शा नहीं जायेगा। शासन की योजनाओं का सही क्रियान्वयन नहीं करना और काम नहीं करना अनिमियतता माना जायेगा और ऐसे व्यक्तियों के विरूध्द कड़ी कार्यवाही होगी। मनरेगा योजना की चर्चा करते हुए उन्होंने सरपंच एवं सचिवों से कहा कि गांव के सभी जाब कार्ड धारकों को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों का रोजगार देना है। जो ग्राम पंचायत ऐसा नहीं कर पायेगी उसके सरपंच एवं सचिव को जाबकार्ड धारकों को पर्याप्त काम नहीं देने का दोषी मानकर उनके विरूध्द आपराधिक कार्यवाही की जायेगी। मनरेगा के अंतर्गत वर्ष में 80 प्रतिशत से कम रोजगार देने वाली पंचायतों के विरूध्द सख्त कार्यवाही होगी।
कारण बताओ क्यों नहीं किया काम
बैठक में समीक्षा के दौरान पाया गया कि ग्राम पंचायत छपला, बाहकल, चिचगांव, भूतना, दमोह, रमगढ़ी, सलघट, मंडई में जाबकार्ड धारकों को वित्तीय वर्ष 2012-13 में मात्र 6 से 7 लाख रु. तक का ही काम दिलाया गया है। जबकि इन ग्राम पंचायतों मे 80 लाख रु. से लेकर डेढ़ करोड़ रु. तक के कार्य कराना था। तब जाकर वहां के जाब कार्ड धारकों को वर्ष में कम से कम 80 दिनों का रोजगार मिल पाता।
मंडई सरपंच पर धारा 40 की कार्यवाही के निर्देश
कलेक्टर श्री चन्द्रशेखर ने मनरेगा कार्यों में गत वर्ष की उपलब्धियों को देखते हुए ग्राम पंचायत भूतना एवं मंडई के सचिव को तत्काल पद से पृथक करने के निर्देश दिये। इसके साथ ही उन्होंने ग्राम पंचायत मंडई के सरपंच के विरूध्द पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के अंतर्गत कार्यवाही कर पद से हटाने के निर्देश दिये। उन्होंने वर्ष 2012-13 में मनरेगा के अंतर्गत 6 से 7 लाख रु. तक के कार्य कराने वाली ग्राम पंचायतों के सचिवों एवं सरपंचों को कारण बताओ नोटिस जारी करने कहा कि क्यों न उन्हें शासकीय योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने के कारण पद से हटा दिया जाये।
मेंड बंधान के लिए खसरा-नक्शा लाना सचिव की जिम्मेदारी
मनरेगा कार्यों की समीक्षा के दौरान कलेक्टर श्री चन्द्रशेखर ने कहा कि मेंडबंधान एवं कूप निर्माण कार्य के लिए हितग्राही को कुछ भी लाने की जरूरत नहीं है। उस पंचायत के सचिव की जिम्मेदारी होगी कि वह हितग्राही के जमीन का खसरा एवं नक्शा लेकर आये।
साल के भर के कार्यों की टी.एस. तैयार रखें
कलेक्टर श्री चन्द्रशेखर ने ग्राम पंचायतों के सरपंचों एवं सचिवों को सख्त निर्देश दिये कि वे ग्राम के जाब कार्ड धारकों को 100 दिनों का रोजगार दिलानें के लायक कामों की तकनीकी स्वीकृति एकमुश्त तैयार करके रखें। उन्होंने उपयंत्रियों को भी हिदायत दी कि टी.एस. के अभाव में काम नहीं रूकना चाहिए।
अनपढ़ सरपंचों को सचिव साक्षर बनायेगा
मलाजखंड में ग्रामीण विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान पाया गया कि कुछ ग्राम पंचायतों के सरपंच पढ़ना-लिखना भी नहीं जानते है। कलेक्टर श्री चन्द्रशेखर ने इसे गंभीरता से लेते हुए इन सरपंचों से कहा कि उन्हें 15 लाख रु. तक के कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति देना होता है अत: उनका पढ़ा-लिखा होना आवश्यक है। ग्राम पंचायत के सचिव की जिम्मेदारी होगी कि वह अपने अनपढ़ सरपंच को पढ़ायेगा। तीन माह में अनपढ़ सरपंच को साक्षर बनाना होगा। तीन माह बाद ऐसे सरपंचों की परीक्षा ली जायेगी। जो सरपंच परीक्षा में पास नहीं होगा वहां के सचिव को पद से हटा दिया जायेगा। जो सरपंच परीक्षा में पास होगा वहां के सचिव को नहीं हटाया जायेगा।
उपयंत्री जे.एल. पटेल को निलंबित करने के निर्देश
ग्रामीण विकास कार्यों की समीक्षा बैठक में बताया गया कि ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के उपयंत्री श्री जे.एल. पटेल अपने कार्यों में रूचि नहीं लेते है। वे जनपद कार्यालय में बैठकर ही कार्यों का कागजों पर मूल्यांकन कर लेते है और निर्माण कार्या की माप पुस्तिका भी भर लेते है। इस पर कलेक्टर श्री चन्द्रशेखर ने उपयंत्री श्री पटेल को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिये है।
कोई भी उपयंत्री सरपंच-सचिव से पैसे नहीं मांगेगा
कलेक्टर श्री चन्द्रशेखर ने बैठक में सभी उपयंत्रियों से दो टूक शब्दों में कहा कि निर्माण कार्यों के पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने, कार्यों के मूल्यांकन एवं ले आउट देने के लिए कोई भी सरपंच एवं सचिव से पैसों की मांग नहीं करेगा। यदि किसी उपयंत्री द्वारा ऐसा किये जाने की शिकायत आई तो उसकी सेवा समाप्त कर दी जायेगी। उन्होंने सरपंचों से भी कहा कि यदि कोई उपयंत्री इस तरह की हरकत करता है तो सीधे कलेक्टर के मोबाईल नं. पर या जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के मोबाईल नम्बर पर सूचना दें। ऐसे उपयंत्री के विरूध्द तत्काल कार्यवाही की जायेगी।
सरपंच-सचिव 30 मई तक प्रमाण पत्र दें
कलेक्टर श्री चन्द्रशेखर ने सभी सरपंचों एवं सचिवों से कहा कि वे 30 मई 2013 तक इस आशय का प्रमाण पत्र जिला कार्यालय को दें कि उनके गांव में हितग्राही मूलक योजना में पात्रता रखने वाले सभी व्यक्तियों को योजनाओं का लाभ मिल रहा है और कोई भी व्यक्ति योजना के लाभ से वंचित नहीं है। ग्राम पंचायत का प्रमाण पत्र प्राप्त होने के बाद जिला स्तर से एक दल बनाकर ग्राम पंचायतों में सत्यापन के लिए भेजा जायेगा और कोई भी व्यक्ति हितग्राही मूलक योजना के लाभ से वंचित पाया जायेगा तो वहां के सरपंच एवं सचिव को बख्शा नहीं जायेगा।
सर्व शिक्षा अभियान के अधूरे कार्य 15 दिनों में पूर्ण करने के निर्देश
बैठक में सर्व शिक्षा अभियान के पूर्व के वर्षों के अपूर्ण कार्यों को 15 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिये गये। ग्राम अचानकपुर, देवगांव, डाबरी, मछुरदा में शाला भवन एवं अतिरिक्त कक्ष के कार्य अब तक अधूरे है।
आंगनवाड़ी का पैसा अन्य कार्य में लगाया
बैठक में बताया गया कि ग्राम पंचायत सालेटेकरी द्वारा आंगनवाड़ी केन्द्र भवन के लिए आई.ए.पी. योजना से दी गई राशि पशु चिकित्सा भवन निर्माण में लगा दी गई है। कलेक्टर श्री चन्द्रशेखर ने इसे गंभीरता से लेते हुए वहां के सरपंच एवं सचिव को गलत तरीके से खर्च की गई 3 लाख रु. की राशि चेक लेकर दो दिनों के भीतर उपस्थित होने के निर्देश दिये।
बिना पैसे के ठेकेदार ने काम शुरू कर दिया
बैठक में ग्राम पंचायत झामुल के सरपंच ने बताया कि उनके ग्राम में ठेकेदार द्वारा ग्राम पंचायत भवन का कार्य दो वर्ष से अधूरा छोड़ दिया गया है। इसकी पड़त्ताल करने पर पता चला कि आर.ई..एस. द्वारा ग्राम पंचायत भवन का टेंडर दिया गया था। लेकिन इस कार्य के लिए कोई भी राशि उपलब्ध नहीं कराई गई थी। इसके बाद भी ठेकेदार द्वारा बिना राशि के ही पंचायत भवन का कार्य प्ंलिथ स्तर तक करा दिया गया और राशि नहीं मिलने पर कार्य को अधूरा छोड़ दिया गया।

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