पर्यटकों को शांति और सुकून देता है 'ज्ञानस्थली' बोधगया - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 28 अप्रैल 2013

पर्यटकों को शांति और सुकून देता है 'ज्ञानस्थली' बोधगया


तपती गर्मी और छुट्टियों का मौसम! ऐसे में आप घूमने के मूड में हैं और चाहते हैं कि भ्रमण की मस्ती के साथ ज्ञानार्जन भी हो तो बिहार का बोधगया स्थल एक बेहतर विकल्प हो सकता है। हालांकि आपको तपती गर्मी का एहसास हो सकता है लेकिन बुद्ध नगरी के रूप में मशहूर इस शहर का धार्मिक मिजाज आपको काफी सुकून देने वाला साबित होगा। बिहार की राजधानी पटना से मात्र 100 किलोमीटर दूर गया से सटे बोधगया में प्रतिवर्ष लाखों देशी और विदेशी पर्यटक आते हैं। इतिहासकारों के मुताबिक बोधगया में स्थित बोधिवृक्ष के नीचे तपस्यारत गौतम बुद्घ को ज्ञान प्राप्त हुआ था। इसीलिए इसे 'ज्ञानस्थली' भी कहा जाता है। 

बोधिवृक्ष के पास ही महाबोधि मंदिर स्थापित है। यूनेस्को ने इस मंदिर परिसर को 2002 में विश्व धरोहर घोषित किया है। मंदिर के अंदर भगवान बुद्घ की पद्मासन मुद्रा में विराट मूर्ति है। कहा जाता है कि जहां भगवान बुद्घ की मूर्ति स्थापित है उसी स्थल पर बुद्घ को ज्ञान प्राप्त हुआ था। यूं तो ये स्थल बौद्ध धर्म के मतावलंबियों के लिए बेहद अहम है लेकिन इस स्थल से जुड़ी ऐतिहासिकता और धार्मिकता प्रतिवर्ष अन्य लाखों मतावलंबियों को भी बरबस अपनी ओर खींच लेती है। पक्षियों की चहचाहट के बीच 'बुद्धं शरणमं गच्छामि' की मंत्रमुग्ध कर देने वाली ध्वनि यहां आने वाले पर्यटकों को असीम शांति का एहसास कराती है। 

कहते हैं कि बौद्ध धर्म के पतन के साथ लोग इस स्थल को विस्मृत कर चुके थे। लेकिन 1883 में इस स्थान की खुदाई की गई और मंदिर को फिर से जीवंत स्वरूप प्रदान किया गया। इस मंदिर में उन सात स्थानों को भी चिह्न्ति किया गया है, जहां भगवान बुद्घ ने ज्ञान प्राप्ति के बाद सात सप्ताह व्यतीत किए थे। यहां आकर आप सिर्फ महाबोधि मंदिर ही नहीं बल्कि तिब्बती मंदिर, चीन का मंदिर, जापानी मंदिर जैसे अन्य दर्शनीय मंदिरों और स्थलों का दीदार भी कर सकते हैं। पुरातात्विक चीजों में रुचि है तो यहां का पुरातात्विक संग्रहालय आपके लिए खास हो सकता है। 

इस खूबसूरत ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल के भ्रमण के लिए दो दिन का समय काफी है। यहां पर रातें गुजारना भी जेब पर बहुत ज्यादा भारी नहीं पड़ता है। बजट के मुताबिक यहां हर तरह के होटल आसानी से बुक किए जा सकते हैं। फिलहाल नवंबर से फरवरी तक का समय यहां आने वाले पर्यटकों के अनुकूल माना जाता है लेकिन यहां की जीवंतता इस स्थल को सदाबहार बनाए रखती है।

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