बिहार उपचुनाव में सीपी के बेटे को टिकट पर भाजपा में विवाद - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 27 अप्रैल 2013

बिहार उपचुनाव में सीपी के बेटे को टिकट पर भाजपा में विवाद


बिहार विधान परिषद के लिए 9 मई को होने जा रहे उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता सी.पी. ठाकुर के बेटे को पार्टी प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतारे जाने को लेकर पार्टी के भीतर ही खलबली मच गई है। एक नेता ने इस कदम को स्वीकार नहीं करने के लायक बताया है। भाजपा के प्रवक्ता और पूर्व विधायक रामकिशोर सिंह ने शनिवार को कहा, "सी.पी. ठाकुर के बेटे को पार्टी का प्रत्याशी बनाया जाना गलत है। भाजपा में वंशवादी राजनीति स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि पार्टी की मूलभावना पारिवार के सदस्यों को प्रोत्साहित करने का निषेध करती है।"

बिहार विधान परिषद के लिए विवेक ठाकुर ने शुक्रवार को भाजपा प्रत्याशी के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया है। प्रत्याशी बनने की आकांक्षा रखने वाले रामकिशोर सिंह ने कहा, "मैं सीधे तौर पर पार्टी के वरिष्ठ नेता और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को इसके लिए जिम्मेवार ठहराता हूं। वे सी. पी. ठाकुर को खुश रखने के लिए उनके सामने घुटने टेक रहे हैं।" सिंह ने कहा कि उन्होंने इस संबंध पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा, "मैंने उन्हें (राजनाथ सिंह) ठाकुर के नामांकन पर अपने विरोध से अवगत करा दिया है।"

एक अन्य पार्टी नेता ने अपनी पहचान जाहिर नहीं होने देने की इच्छा जताते हुए कहा कि विवेक ठाकुर को विधान परिषद का प्रत्याशी घोषित किए जाते समय कई समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की गई। उन्होंने कहा, "इससे पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच गलत संदेश जाएगा।" विधान परिषद के तीन सदस्यों बादशाह प्रसाद आजाद और रामचंद्र प्रसाद (राष्ट्रीय जनता दल), रामाश्रय प्रसाद सिंह (जनता दल-यूनाइटेड) के निधन के कारण उपचुनाव कराए जा रहे हैं। 

जनता दल (यूनाइटेड) ने दो सीटों के लिए पूर्व मंत्री मंजर आलम और राजकिशोर कुशवाहा को अपना प्रत्याशी बनाया है। भाजपा-जद (यू) गठबंधन के सभी तीनों प्रत्याशियों का चुनाव जीतना तय है, क्योंकि विपक्ष के पास विधानसभा में मौजूद संख्या बल विधान परिषद में अपने सदस्य भेजने लायक नहीं है और उन्होंने मैदान में अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है। विवेक ठाकुर का विधान पार्षद के रूप में कार्यकाल अगले साल तक का होगा, क्योंकि वे बादशाह प्रसाद आजाद के निधन से खाली हुई जगह पर चुनाव लड़ रहे हैं। बादशाह का कार्यकाल 2014 में खत्म होना था।

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