बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी ग्रामीण योजनाओं का प्रचार करने के लिए तीसरी कसम का सहारा ले रहे हैं. तीसरी कसम यानि राज कपूर और शैलेंद्र की मशहूर फिल्म.
नीतीश कुमार इस फिल्म के जरिए फिल्म का प्रचार तो करने लगे लेकिन उन्होंने इसकी इजाजत नहीं ली. इस फिल्म को बनाने वाले आरा जिले के ही मशहूर संगीतकार शैलेंद्र हैं उनके परिवार वालों तक को इसकी जानकारी नहीं दी गई. यह कार्यक्रम पांच मार्च को शुरू हुआ है और इसके तहत 38 जिलों के 2000 से अधिक पंचायतों में यह फिल्म दिखाई जा रही है. संगीतकार शैलेंद्र के छोटे बेटे दिनेश शैलेंद्र ने कहा कि हमने बिना इजाजत फिल्म दिखाने के लिए सरकार से 15 करोड़ का हर्जाना मांगा है. इस सिलसिले में बिहार सरकार और केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी को भी पत्र लिखा गया है. दरअसल, बिहार सरकार ने फैसला किया है कि इस फिल्म को राज्य की 2000 पंचायतों को दिखाया जाएगा.
उल्लेखनीय है कि नीतीश के पास ग्रामीण विकास मंत्रालय भी है. कार्यक्रम के तहत बासु भट्टाचार्य की इस राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म को गांवों में दिखाया जा रहा है.दिनेश ने बताया, हमने सन 1967 में इस फिल्म के बारे में कोर्ट से यह आदेश ले लिया था कि इसका पूरा कॉपीराइट हमारे पास है और बिना हमारी इजाजत के इसे दिखाया नहीं जा सकता है.नीतीश सरकार मोबाइल थिएटर के जरिए दिखायी जाने वाली इस फिल्म के बीच-बीच में राज्य सरकार की उपलब्धियां भी दिखाएगी.
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