भारत सरकार उन दवाओं की बिक्री रोकने की योजना बना रही है, जिन पर साइड इफेक्ट्स के कारण दुनिया के 6 बड़े ड्रग मार्केट में पाबंदी लगी हुई है। इस मामले की जानकारी दो सीनियर सरकारी अधिकारियों ने दी।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक अगर कोई दवा अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जापान और यूरोपीय यूनियन या ऑस्ट्रेलिया में नहीं बेची जा रही है तो इंडिया में भी उसकी बिक्री पर रोक लगा दी जाएगी।
अधिकारियों ने बताया है कि यह रोक तब तक जारी रहेगी जब तक कंपनी क्लिनिकल डाटा उपलब्ध नहीं कराती कि उस दवा का मरीज पर कोई बुरा असर नहीं पड़ रहा है। इसमें इंटरनैशनल रेग्युलेटर्स के फ्यूचर ऐक्शन के आधार पर ऐसे प्रतिबंध लगाए जाएंगे। यानी जिन दवाओं का इस्तेमाल डिवेलप्ड कंट्रीज में नहीं होता है, इंडिया में उन दवाओं की बिक्री अपने आप रुक जाएगी।
ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया के जी एन सिंह ने इस बात को सही ठहराया है कि इस तरह के कदम उठाने की तैयारी की जा रही है। सिंह ने कहा, 'हम एक मेकनिज़म की शुरुआत करने की तैयारी में हैं, जिसके जरिए हमारा ड्रग रेग्युलेटरी सिस्टम दुनिया के लीडिंग ड्रग रेग्युलेटर्स के फैसलों से संकेत लेकर उसी आधार पर कदम उठाएगा। ये ड्रग रेग्युलेटर्स पहले से ही बेहतर सिस्टम लागू कर चुके हैं, जो दवाओं के साइड इफेक्ट्स का ऐनालिसिस करके उस पर बैन लगाते हैं।'
डिवेलप्ड कंट्रीज के रेग्युलेटर्स के फैसलों के आधार पर दवाओं पर पाबंदी लगाने का फैसला इंडिया के लिए काफी महत्वपूर्ण है। अभी तक इंडिया के पास अपना कोई मजबूत सिस्टम नहीं है जिससे सीरियस साइड इफेक्ट वाली दवाओं की पहचान करके उस पर पाबंदी लगाई जा सके।
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1 टिप्पणी:
देखते हैं कब तक होता है !!
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