अच्छे कामों में बाधाओं का मतलब, कार्यसिद्धि का शुभ संकेत - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शुक्रवार, 10 मई 2013

अच्छे कामों में बाधाओं का मतलब, कार्यसिद्धि का शुभ संकेत


कार्य सिद्धि के लिए दो प्रकार की बाधाएं सामने आती हैं। किसी शिखर का आरोहण करना हो तब चढ़ाई करना बहुत मुश्किल हो उठता है। जबकि मैदानों में परिभ्रमण करना कोई खास मुश्किल काम नहीं है। कोई सा कार्य हो उसमें तरह-तरह की बाधाओं का आना निश्चित है। जिन कामों को ईश्वरीय और लोक कल्याणकारी माना जाता है वे अपनी पूर्णता आने तक तमाम प्रकार के विघ्नों और बाधाओं को पहले ही किश्तों-किश्तों में पार कर लिया करते हैं और उस समय लगता है कि अमुक कार्यों में बाधाओं पर बाधाएं आती जा रही हैं। लेकिन यह कार्य सिद्धि का आरंभिक लक्षण होने के साथ ही इस बात का भी स्पष्ट संकेत है कि कार्य शुद्धता  और परिमार्जन के साथ हो रहा है और भविष्य में जो परिणाम सामने आएगा वह जीवन भर के लिए बाधाओं से रहित और समस्याओं से मुक्त होगा और इससे जुड़े सभी लोगों तथा क्षेत्रों को सुकून प्रदान करेगा।

ईश्वरीय कार्यों में प्रायः यही होता है कि इनकी शुरूआत से लेकर अंत तक अडंगे और विभिन्न प्रकार की बाधाएँ आती रहती हैं और स्वतः ही इनके समाधान का मार्ग भी प्रशस्त होता रहता है और जब इन कार्यों को पूर्णता का स्तर प्राप्त होने वाला होता है तब तक ये समस्त प्रकार की बाधाओं और समस्याओं से मुक्त होकर शुद्ध, सात्ति्वक, परिमार्जित और सोने की तरह निखरे हुए स्वरूप में आ जाते हैं, फिर भविष्य में कोई बाधाएं सामने नहीं आ पाती हैं। अच्छे कार्यों के संपादन की पूरी यात्रा में कई सारे चेहरे आसुरी भावों के साथ भी हमारे आस-पास मण्डराते रहकर हमें परेशान करते रहते हैं और हमारे मनोबल को खण्डित करने की पूरी कोशिश करते हैं। इन आसुरी लोगों के साथ कई बार यह भी हो सकता है कि इन्हीं की किस्मों के लोग भी इनके साथ जुड़े जाएं भले ही ऎसे कमीनों का उन अच्छे कर्मों से कोई लेना-देना न हो।

दूसरी ओर जो काम सहजतापूर्वक, किसी के दबाव में या प्रलोभन की खातिर आरंभिक बाधाओं को दमित करते हुए आरंभ होते हैं और जिनमें बाधाएं नहीं आती उनके बारे में साफ मानना चाहिए कि इनका अंत बुरा होने वाला है अथवा ये पूर्णता को प्राप्त कर चुकने के बावजूद किसी उपयोग के नहीं रहने वाले अथवा इनसे यश-प्रतिष्ठा की कामना व्यर्थ है। ऎसा प्रायःतर सांसारिक कर्मों की नियति है और संसार से जुड़े हर कर्म में ऎसा होना स्वाभाविक लोक धर्म माना गया है। जब एक बार हम कोई सा कार्य ईश्वरीय कार्य मानकर आरंभ करते हैं तब उस कार्य में आने वाले विघ्न आभासी बाधाओं के रूप में सामने आकर पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं तथा कार्यपूर्णता के समय ऎसे सभी प्रकार के ईश्वरीय कार्य दिव्यत्व और दैवत्व का अहसास कराने लगते हैं।

आज बहुतेरे सामाजिक लोक कल्याण के सच्चे मन से किये जाने कामों की बात हो या सार्वजनीन हितों से जुड़े ईश्वरीय मंशा के कर्म, सभी के संपादन में किसी न किसी प्रकार की बाधाओं का सामना करना ही पड़ता है। इन बाधाओं को यह समझकर नहीं लेना चाहिए कि इनसे कार्यसिद्धि पर कुप्रभाव पड़ेगा बल्कि इन बाधाओं से यही संकेत प्राप्त करना चाहिए कि हम कार्यसिद्धि की ओर एक डग आगे बढ़ रहे हैं और कार्य सिद्धि में किसी भी प्रकार का संशय नहीं रह गया है। तभी तो कार्यसिद्धि का समय आने से पूर्व ही सारी प्रकार की बाधाएं एक-एक कर समाप्त होने लगती हैं और पूर्णता प्राप्त होने तक शून्य हो जाती हैं और वहीं से शुरू होता है आनंद और सुकून का महास्रोत... जहां से आगे न कोई अंधेरा होता है, न समस्याओं या बाधाओं के स्पीड़ब्रेकर। इसलिए अच्छे कर्मों में आने वाली बाधाओंं से हतोत्साहित न हों बल्कि कार्यपूर्णता की आशा में और अधिक उत्साह से काम करें।

अच्छे कार्यों में आने वाली बाधाओं को कार्य सम्पूर्णता के लिए ईश्वरीय संकेत मानें तथा पूरे उत्साह के साथ काम करें।








---डॉ. दीपक आचार्य---
9413306077
dr.deepakaacharya@gmail.com

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