आम चुनाव से पहले केंद्र सरकार इस साल झारखंड में विधानसभा चुनाव करा सकती है. कैबिनेट की बैठक में गुरुवार को गृह मंत्रालय के उस प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा जिसमें झारखंड में राष्ट्रपति शासन को खत्म कर नए चुनाव को हरी झंडी दी जाए या नहीं.
झारखंड में राष्ट्रपति शासन की अवधि 18 जून को खत्म हो रही है. ऐसे में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने के लिए संसद से अनुमति लेने के बाद इस अवधि को दोबारा 6 महीने के लिए बढ़ाया जा सकता है.
सूत्रों के मुताबिक पहले झारखंड का चुनाव अक्तूबर-नवंबर में दिल्ली और मध्यप्रदेश के साथ कराने की संभावना कही जा रही थी लेकिन कर्नाटक चुनाव के नतीजे से गदगद केंद्र सरकार आम चुनाव से पहले जुलाई में ही चुनाव करा सकती है. जानकारों का मानना है कि कर्नाटक नतीजे के बाद यदि झारखंड में कांग्रेस उम्दा प्रदर्शन करती है तो मिशन 2014 में कांग्रेस को फायदा मिल सकेगा.
केंद्र में भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी कांग्रेस के लिए कर्नाटक भले ही किसी सौगात से कम नहीं. हालांकि अब अपने भरोसे सरकार बनाकर कांग्रेस गठबंधन का दर्द ढोने से भी बच गई है. लेकिन अब इस साल होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में जीत तय करना उसके लिए बड़ी चुनौती है. अर्जुन मुंडा की बीजेपी सरकार ने इस साल जनवरी में बहुमत खो देने के बाद विधानसभा भंग करने की सिफारिश की थी. इसी के बाद से वहां राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था. संकट तब पैदा हुई थी जब शिबू सोरेन की झारखंड मुक्ति मोर्चा ने मुंडा सरकार से समर्थन वापस ले लिया था.
कांग्रेस के रणनीतिकारों का आकलन है कि झारखंड के जो मौजूदा राजनीतिक हालात हैं उसमें पार्टी क्षेत्रीय दलों को जोड़कर बीजेपी से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है. इसका असर लोकसभा चुनाव की तैयारी पर भी पड़ सकता है. कांग्रेस का मानना है कि इस कवायद से चौतरफा घिरी सरकार को नई ऊर्जा दी जा सकती है. हालांकि, पहले झारखंड का चुनाव अक्टूबर-नवंबर में दिल्ली और मध्य प्रदेश के साथ कराने की भी संभावना व्यक्त की जा रही थी.
होम मिनिस्ट्री के प्रस्ताव पर गुरुवार को ही विचार होना है कि झारखंड में राष्ट्रपति शासन को खत्म कर नए चुनाव को हरी झंडी दी जाए या नहीं. चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, जुलाई महीने में झारखंड में चुनाव कराने में कोई दिक्कत नहीं होगी लेकिन इसके लिए पहले केंद्र सरकार को फैसले लेने होंगे. राष्ट्रपति शासन की अवधि 6 महीने की होती है और इसके बाद संसद से अनुमति लेने के बाद इस अवधि को दोबारा छह महीने के लिए बढ़ाया जा सकता है.
केंद्रीय चुनाव आयोग ने झारखंड में विधानसभा चुनाव की तैयारी पर एक अनौपचारिक बैठक की. बैठक में राज्य की प्रशासनिक स्थिति पर मुख्य चुनाव अधिकारी पीके जाजोरिया के साथ निर्वाचन सदन में करीब दो घंटे तक कई बिंदुओं पर चर्चा हुई. उप चुनाव आयुक्त आलोक शुक्ला ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति, बारिश की संभावना तथा पिछले वर्ष जुलाई से सितंबर महीने में हुई बारिश का रिकॉर्ड, मतदाता सूची की तैयारी जैसे मामलों पर जानकारी ली.
सूत्रों के मुताबिक आयोग ने राज्य के अधिकारियों से यह जानकारी भी ली कि नक्सल प्रभावित इलाकों में चुनाव कराने के लिए अधैसैनिक बलों की कितनी टुकडिय़ों की जरूरत पड़ सकती है. बैठक में आयोग ने यह जानने की कोशिश की कि केंद्र सरकार यदि हाल के दिनों में विधानसभा भंग कर चुनाव की अनुशंसा करती है तो तुरंत चुनाव कराना संभव होगा अथवा नहीं. जाजोरिया ने आयोग को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है.
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