मुस्लिम गैर-सरकारी संगठन, जमीयत उलेमा-ए-महाराष्ट्र (अरशद मदानी) ने रविवार को यहां 350 छात्रों को अकादमिक वजीफे दिए, जिनमें 15 हिन्दू थे। छात्रों के बीच वजीफों का वितरण करते हुए मौलाना आजाद फाइनैंशियल कॉरपोरेशन (एमएएफसी) के अध्यक्ष अमीन पटेल ने कहा कि केवल शिक्षा ही मुसलमानों का जीवन स्तर बेहतर बना सकती है।
जेयूईएम-एएम की वैधानिक इकाई के प्रमुख गुलजार आजमी ने कहा कि यह चौथा साल ह, जब एनजीओ गैर-मुस्लिम छात्रों को वजीफे दे रहा है। वजीफे 1,000 रुपये से 10,000 रुपये तक हैं और ये स्कूलों की फीस अदायगी के लिए पर्याप्त हैं। आजमी ने कहा, "इस साल हमने छठी कक्षा से 12वीं कक्षा के जरूरतमंद छात्रों के बीच करीब 20 लाख रुपये वितरित किए। वजीफों की संख्या हर साल मिलने वाले आवेदन के आधार पर तय होती है।"
जेयूईएम-एएम के अध्यक्ष मौलाना एम. अहसान आजमी ने कहा कि वर्ष 1919 में शुरुआत के बाद से ही यह गैर-सरकारी संगठन समाज की मदद में किसी भी तरह का धार्मिक भेदभाव नहीं कर रहा। जेयूएईएम-एएम उन 300 से अधिक निर्दोष मुसलमानों को नि:शुल्क कानूनी सुविधा भी मुहैया करवा रहा है, जो देशभर में विभिन्न आतंकवादी घटनाओं में कथित संलिप्तता के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए हैं।

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