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शनिवार, 15 जून 2013

नीतीश ने कहा-स्थिति गंभीर, भाजपा अभी भी पसोपेश में

बिहार में सत्ताधारी गठबंधन में घटक दलों के बीच तनाव बढ़ते जाने को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को स्वीकार किया कि स्थिति अब गंभीर हो चुकी है। उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी समेत भाजपा के अधिकांश मंत्रियों ने दफ्तर जाना बंद कर दिया है और वे शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन कार्यालय नहीं गए। कटिहार से सेवायात्रा में हिस्सा लेकर पटना लौटे मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से कहा कि जदयू में तो हर वक्त बैठकें होती रहती हैं। ऐसे में अगर मौजूदा हालात पर गौर किया जाए तो हालात मुश्किल भरे हैं। इन हालात में क्या करना है, इस पर फैसला लेना है। आपसी चर्चा से जो भी फैसला लिया जाएगा, वह सबको बताया जाएगा। 

उन्होंने भाजपा के कुछ नेताओं द्वारा पुराने गठबंधन को नहीं तोड़ने की सलाह पर एक शेर से इशारा किया "दुआ देते हैं जीने की और दवा करते हैं मरने की।" उन्होंने कहा कि एक ओर हमें सुझाव दे रहे हैं और दूसरी ओर हमारी सुनने के लिए तैयार भी नहीं हैं। जद-यू नेताओं के मुताबिक नीतीश कुमार शनिवार को सबसे पहले अपने करीबी माने जा रहे पार्टी नेताओं से और फिर अपने सहयोगियों से मुलाकात करेंगे। 

पार्टी के एक सूत्र ने बताया कि इस मामले पर अंतिम बैठक जद-यू अध्यक्ष शरद यादव की उपस्थिति में शनिवार रात या रविवार सुबह में हो सकती है। नीतीश की अगुआई वाली सरकार में भाजपा के 11 मंत्री हैं। उल्लेखनीय है कि भाजपा के गोवा अधिवेशन में नरेंद्र मोदी को अगले लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी की चुनाव समिति के अध्यक्ष बनाए जाने के बाद से ही जदयू और भाजपा के बीच तनाव और बढ़ गया था। पार्टी में मोदी को नई जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद नीतीश के लिए उन्हें बिहार आने से रोकना मुश्किल हो जाएगा।

जद-यू ने भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के पार्टी के महत्वपूर्ण पदों से इस्तीफे पर भी असंतोष जताया था। भाजपा नेताओं ने जद-यू पर भाजपा के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया था। शुक्रवार को भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडेय ने कहा कि यदि गठबंधन टूटता है तो इसके लिए जद-यू जिम्मेवार होगा। भाजपा नेता सी.पी. ठाकुर ने मीडिया को बताया, "यह आपात स्थिति है इसलिए रणनीति तैयार करने के लिए और बैठकें होंगी।"

भाजपा से अलग होने पर जद-यू को सरकार बचाने के लिए संभवत: ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ सकती है। 243 सदस्यीय विधानसभा में जद-यू के 118 विधायक हैं। यह संख्या बहुमत से चार काम है।  जद-यू के लिए अच्छी खबर यह है कि छह निर्दलीय विधायकों में से चार ने सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है। यहां तक कि कांग्रेस भी समर्थन दे सकती है। कांग्रेस के चार विधायक हैं।

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