बादल फटने के बाद मची तबाही में केवल शताब्दियों पुराना केदारनाथ मंदिर और उसके भीतर स्थित शिवलिंग ही सुरक्षित है, जबकि मंदिर के चारों तरफ तहसनहस हो गया है और शव बिखरे हुए हैं। उत्तराखंड के एक मंत्री ने शुक्रवार को यह बताया। उत्तराखंड के कृषि मंत्री हरक सिंह रावत ने संवाददाताओं से कहा कि अत्यंत कठिनाई के साथ केदारनाथ में उनका हेलीकाप्टर उतरा। उन्होंने कहा, "हालांकि शिवलिंग जस का तस है, फिर भी मंदिर के चारों तरफ विध्वंस और शव बिखरे पड़े हैं। यह अत्यंत हृदय विदारक स्थिति है।" प्रशासन बद्रीनाथ मंदिर से कुछ दूरी पर हेलीकॉप्टर उतारने का प्रयास कर रहा है। मंत्री ने कहा, "वहां करीब 250 लोग फंसे हुए हैं।"
उन्होंने आगे बताया, "गौरीकुंड में करीब 8000 से 10,000 लोग फंसे हुए हैं। हम बीमार और बुजुर्ग लोगों को लाने का प्रयास कर रहे हैं। सेना और आईटीबीपी (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस) शेष लोगों को रस्से के सहारे निकालने के प्रयास में जुटी है।" उन्होंने कहा कि आईटीबीपी और सेना ने शुक्रवार को 2000 लोगों को निकाला।
केदारनाथ के समीप तबाह हो चुके रामबाड़ा में अधिकारियों ने एक हेलीपैड बनाया है जहां छोटे हेलीकाप्टर उतारे जा सकते हैं। रावत ने कहा कि पहाड़ों में ध्वस्त हो गई छोटी झोपड़ियों में लोग रुके हुए हैं। लोगों को खाने के पैकेट मुहैया कराया जा रहा है और राहत दल लोगों को निकालने के लिए उन इलाकों तक गए हैं।
उन्होंने कहा, "बुरी तरह प्रभावित केदारनाथ इलाके में बुनियादी ढांचे की हुई व्यापक क्षति से उबरने में कम से कम पांच वर्षो का समय लगेगा।" अधिकारियों के मुताबिक करीब 207 लोग मारे गए हैं और करीब 50,000 लोग फंसे हुए हैं।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें