भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रदर्शन एवं धरना - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 16 जुलाई 2013

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रदर्शन एवं धरना

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव राजेन्द्र प्रसाद सिंह ने आम गरीबों एवं खेत मजदूरों के विभिन्न ज्वलंत सवालों को लेकर राज्यभर के प्रखंड मुख्यालयों पर बड़ी संख्या में प्रदर्शन करने एवं धरना देने के लिए राज्य की आम जनता को धन्यवाद दिया है।

राज्य कार्यालय से जारी अपने बयान में श्री राजेन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा है कि बढ़ती गरीबी, जानलेवा बढ़ती महंगाई, दावानल की भांति फैल रहे भ्रष्टाचार, बेरोजगारी की समस्या के चलते बढ़ते पलायन और अनियंत्रित पुलिस प्रशासन की समस्याओं ने राज्य में आम जन-जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसी पृष्ठभूमि में राज्य के सभी प्रखंड मुख्यालों पर खेत मजदूरों एवं आम गरीब जनता ने अपनी मांगों को लेकर आज कम्युनिस्ट पार्टी एवं खेत मजदूर यूनियन के संयुक्त नेतृत्व में प्रदर्शन किया और कुछ जगहों पर धरना दिया।

उनकी प्रमुख मांगों में भूमिहीन बेघर परिवारों को अवास के लिए 10 डिमिल जमीन और इंदिरा आवास देने, पर्चाधारीयों को जमीन पर कब्जा और कब्जाधारीयांे को जमीन का पर्चा देने संबंधी, बंधोपाध्याय भूमि सुधार आयोग की सिफारीशों को लागू करने, किसानों को सस्ता खाद-बीज-पानी-डीजल-ऋण आदि देने, उद्योगीकरण के  नाम पर किसानों की जमीन छीनना बंद करने, बिजली शुल्क की बढ़ोत्तरी वापस लेने, जमीन की मनमानी कीमत लगाकर रजिस्ट्री लेना बंद करने, किसानों के उपज की सरकारी खरीद  सुनिश्चित करने, खाद्य सुरक्षा की गांरटी करने, सभी परिवारों को 2 रू. किलो की दर से 35 किलो खाद्यान्न देने तथा जनवितरण प्रणाली को सार्वभौम बनाने एवं इसमें व्याप्त धांधली को रोकने की मांग की गयी है। खेत मजदूरों और सभी असंगठित मजदूरों की काम एवं काम का वाजिब दाम देने, मनरेगा में व्याप्त भ्रष्टाचार बंद करने तथा 60 साल को उम्र वाले सभी  किसानों, मजदूरों और श्रमजीवियांे को तीन-तीन हजार रूपये पेंशन प्रतिमाह देने की भी मांग इन्होंने की है। समान स्कूल प्रणाली लागू करने, शिक्षा का व्यवसायीकरण बंद करने, सभी विश्वविद्यालयों में छात्र संघों का चुनाव कराने, शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों के वेतन एवं अन्य सुविधाओं पर हमले बंद करने, विश्वविद्यालयांे की स्वायत्ता पर हमला बंद करने, प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक व्याप्त अराजकता समाप्त करने, शहरी गरीबांे को उजाड़ना बंद करने, उन्हें आवास एवं आजीविका का साधन मुहैया कराने, मनरेगा जैसा रोजगार गारंटी कानून शहरी गरीबों के लिए भी लागू करने, महिलाओं पर अत्याचार बंद करने, उनके साथ भेद-भाव बंद करने, उनको आतंकवादी बातकर सताना बंद करने, उनकी आर्थिक-सामाजिक दशा में सुधार के लिए रंगनाथ मिश्रा आयोग और सच्चर कमीटी की सिफारीशों तथा 15 सूत्री प्रधानमंत्री कार्यक्रम को लागू करने, नीचे से उपर तक राज्य में हो रहे भ्रष्टाचार पर रोक लगाने, बाढ़ सुखाड़-बिजली संकट का स्थायी निदान करने तथा बिहार के आदिवासीयों के लिए अलग पंचायत गठित करने की मांग इनकी प्रमुख मांगों में शामिल है।

अब तक प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 35 जिलों के अधिकांश प्रखंडों में यह कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। गया, पश्चिम चम्पारण और कटिहार में प्रदर्शनकारियों ने जिला समाहरणालयों पर प्रदर्शन किया तथा जिला पदाधिकारियों के समक्ष अपनी मांगें रखी। मधेपुरा में उदाकिशुनगंज रोड को प्रदर्शनकारियों ने जाम किया। राज्य के बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में लोगों ने बाढ़ राहत की मांग के साथ संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपनी मांग रखी। बेगूसराय में जहाँ कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव राजेन्द्र प्रसाद सिंह ने आन्दोलनकारियों को नेतृत्व प्रदान किया, वहीं खगडि़या के सत्यनारायण सिंह,    मधुबनी में रामनरेश पाण्डेय, भागलपुर में अम्बिका प्रसाद तथा गया में जलालुदीन अंसारी ने आन्दोलनकारियों को नेतृत्व किया।              

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