झारखंड में नई सरकार बनाने के लिए आपस में हाथ मिलाने के बाद कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पांच राज्यों में मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया है।
पिछले तीन दिनों से दिल्ली में डटे हेमंत सोरेन के लिए शुक्रवार को मंजिल तक पहुंचने का रास्ता पूरी तरह तैयार हो गया। शुक्रवार को फिर से हेमंत कांग्रेस महासचिव व प्रदेश प्रभारी बीके हरिप्रसाद से मिले और लंबी बैठक के बाद गठबंधन की औपचारिक घोषणा हो गई। पिछले दिनों में वह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एके एंटनी, अहमद पटेल समेत कई नेताओं से मिल चुके हैं। बताते हैं कि शपथ ग्रहण के बाद दिल्ली आने पर उनकी मुलाकात कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से होगी।
उत्साहित हेमंत ने कहा कि अब जल्द ही सरकार गठन हो जाएगा। वहीं हरिप्रसाद ने एक बयान जारी कर कहा कि दोनों दलों ने धर्मनिरपेक्षता और विकास के लिए साझा सरकार बनाने का निर्णय लिया है। उन्होंने आशा जताई कि राज्य में निचली पायदान पर खड़े लोगों का विकास होगा। बाद में उन्होंने राजग पर चुटकी लेते हुए कहा कि एक तरफ जहां राजग के सहयोगी छोड़कर कर जा रहे हैं, वहीं संप्रग के साथियों की संख्या बढ़ रही है। ध्यान रहे कि झारखंड में कांग्रेस पहली बार सत्ता में शामिल होगी। इससे पहले उसने एक बार मधु कोड़ा सरकार को बाहर से समर्थन दिया था। वहां पर तीन बार राष्ट्रपति शासन लग चुका है। राष्ट्रपति शासन के समय हर बार केंद्र की सत्ता में कांग्रेस थी।
लंबी कवायद के बाद हुए समझौते के अनुसार लोकसभा चुनाव में कांग्रेस सीटों का बड़ा हिस्सा लेगी। 14 सीटों वाले झारखंड में 10 सीटों पर कांग्रेस फैसला करेगी। बताते हैं कि सरकार गठन मे साथ आ रहे राजद को कांग्रेस अपने खाते से दो सीट दे सकती है। जबकि चार पर झामुमो चुनाव लड़ेगी। इसके अलावा ओड़िशा, बिहार, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल में भी दोनों दल साथ लड़ेंगे। यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि छत्तीसगढ़ में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। ओड़िशा में भी अगले साल चुनाव है। इन दोनों राज्यों में आदिवासियों की बड़ी संख्या है और झामुमो नेता शिबू सोरेन की उन पर पकड़ रही है। पिछली संसद में ओड़िशा से झामुमो के एक सांसद भी रह चुके हैं।
शपथ ग्रहण की तिथि अभी तय नहीं हुई है लेकिन माना जा रहा है कि अब सरकार गठन में देर नहीं होगी। सूत्रों के अनुसार नई सरकार में कांग्रेस को पांच मंत्री पद मिल सकते हैं। इसके अलावा विधानसभा अध्यक्ष का पद भी कांग्रेस के खाते में होगा। जबकि झामुमो को मुख्यमंत्री पद के अलावा चार मंत्री पद मिलेंगे। सरकार में शामिल होने वाले राजद को दो मंत्री पद दिए जा सकते हैं।
गौरतलब है कि 81 सदस्यों वाली विधानसभा में झामुमो के 18, कांग्रेस के 13 और राजद के 5 विधायक हैं। सरकार गठन के लिए 41 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है। सरकार गठन के लिए बाकी संख्या की जुगाड़ निर्दलीय विधायकों व अन्य दलों से पूरी की जाएगी। कांग्रेस की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि सरकार के लिए न्यूनतम साझा कार्यक्रम बनेगा और उसकी निगरानी के लिए समन्वय समिति। समन्वय समिति की कमान झामुमो के पास रहेगी।

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