पटना में श्री सुरेश द्त्त मिश्रा लिखित काव्य ‘प्रवंचना’ का लोकार्पण और परिचर्चा का आयोजन - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

शुक्रवार, 5 जुलाई 2013

पटना में श्री सुरेश द्त्त मिश्रा लिखित काव्य ‘प्रवंचना’ का लोकार्पण और परिचर्चा का आयोजन

शुक्रवार को आई आई बी एम के सभागार में पवनसुत सर्वांगिण विकास केन्द्र की ओर से श्री सुरेश द्त्त मिश्रा लिखित काव्य ‘प्रवंचना’ का लोकार्पण  और ‘ वर्तमान परिवेश में संस्कृत शिक्षा का महत्व’  विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उदघाटन डाँ उत्तम कुमार, निदेशक आई0 आई0 बी0 एम0,पटना के द्वारा किया गया। कार्यक्रम में सरस्वती विध्या मन्दिर के छात्रों ने सरस्वती बन्दना प्रस्तुत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डाँ देवेन्द्र प्रसाद सिंह, प्रो0 ए0 न0 कालेज सह प्रदेश अध्यक्ष जनता पार्टी के द्वारा की गई। 

श्री सुरेश द्त्त मिश्रा लिखित काव्य ‘प्रवंचना’ का लोकार्पण डाँ उत्तम कुमार, निदेशक आई0 आई0 बी0 एम0,पटना के द्वारा किया गया। इस अवसर पर डाँ उत्तम कुमार ने कहा की ‘प्रवंचना’ मे राज नेताओं और व्यवस्था पर काफ़ी सटीक टिप्पणियाँ कि गई है। आज के दौर मे इस प्रकार की पुस्तकों की जरुरत समाज को है। लेखक ने अपनी लेखनी के जरिए समाज में जागरूकता लाने का प्रयास किया है। ‘ वर्तमान परिवेश में संस्कृत शिक्षा का महत्व’  विषय पर परिचर्चा में बोलते हुए डाँ देवेन्द्र प्रसाद सिंह ने कहा की संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है इसका प्रसार तो होना ही चाहिए येसे भी संस्कृत को राष्ट्र भाषा बनाना हमारे जनता पार्टी का प्रमुख एजेडा है। 

परिचर्चा में बोलते हुए पवनसुत सर्वांगिण विकास केन्द्र के सचिव डाँ राकेश दत्त मिश्रा ने कहा की आज संस्कृत कि माँग विदेशो में बढती जारही है और अपने देश मे संस्कृत उपेक्षित है। विदेशियों ने साजिश के तहत इस भाषा को लोगों से दुर कर दिया, जब की संस्कृत मे अर्थशास्त्र , राजनीतिशास्त्र और बिज्ञान भरे पड़े है। सरस्वती विध्या मन्दिर के आचार्य सर्वश्री उमेश कुमार मिश्रा, भवेश कुमार पाठक एवं  कुन्दन कुमार , भारतीय जन क्रांति दल के प्रदेश अध्यक्ष श्री अविनाश कुमार, श्री भव्यनाथ झा प्रकाशन एवं शोध पदाधिकारी महाविर मन्दिर, पटना, श्री मुरली मनोहर सिंह, राष्ट्रीय सचिव जनता पार्टी, श्री सच्चिदा नंन्द पान्डेय, कोषाध्यक्ष, पवनसुत सर्वांगिण विकास केन्द्र, श्री लक्ष्मण पान्डे, सदस्य पवनसुत सर्वांगिण विकास केन्द्र, श्री सुह्रिद चाक्रवर्ति,  श्री विजय कुमार ने भी विचार व्यक्त किये । 

कोई टिप्पणी नहीं: