रुपये को संभालने के लिए सरकार ने देर रात बड़े कदम उठाए हैं। आरबीआई ने कमर्शियल बैंकों के लिए रातोंरात कर्ज महंगा कर दिया है। अब आरबीआई की एमएसएफ यानि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी की दर तत्काल प्रभाव से 2 फीसदी बढ़कर 10.25 फीसदी हो गई है। एमएसएफ के तहत बैंक उस वक्त आरबीआई से ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज ले सकते हैं जब बाजार में नकदी की किल्लत बढ़ जाती है।
हालांकि रेपो रेट के साथ आरबीआई ने कोई छेड़छाड़ नहीं की है। इसके अलावा सरकार बाजार से नकदी सोखने के लिए 12,000 करोड़ रुपये के सिक्योरिटीज बेचेगी। सिक्योरिटीज की ये बिक्री 18 जुलाई को होगी। रुपये पर ये फैसला देर रात वित्त मंत्री पी चिदंबरम की प्रधानमंत्री और रिजर्व बैंक गवर्नर डी सुब्बाराव के साथ बैठक के बाद आया। इसके अलावा सरकार ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर और कदम उठाए जा सकते हैं। ध्यान रहे कि अप्रैल में रुपया 53.80 के स्तर पर था लेकिन उसके बाद लगातार रुपये में गिरावट आई है।
यूको बैंक के सीएमडी अरुण कौल का कहना है कि रुपये की कमजोरी को रोकने के लिए आरबीआई ने कदम उठाए हैं। आरबीआई के कदमों से रुपये में मजबूती लौटने की उम्मीद है। रुपये में स्थिरता लौटने पर कुछ कदम वापस लिए जाने की उम्मीद है।
एचडीएफसी के वाइस चेयरमैन केकी मिस्त्री का कहना है कि आरबीआई के कदमों से छोटी अवधि में ब्याज दरों में बढ़त का अनुमान है। रुपये में स्थिरता लौटने पर आरबीआई ने उठाए कदमों में से कुछ कदम वापस लिए जाने की उम्मीद है। आरबीआई के कदम केवल छोटी अवधि के लिए होने का अनुमान है। अब 30 जुलाई को पॉलिसी में दरों में कोई बदलाव की उम्मीद नहीं है। प्रामेरिका म्यूचुअल फंड के फिक्स्ड इनकम हेड महेंद्र जाजू का कहना है कि आरबीआई के कदमों से 10 साल की बॉन्ड यील्ड में 0.1-0.5 फीसदी की बढ़त संभव है। शॉर्ट टर्म यील्ड में 0.2-0.25 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान है। आरबीआई के कदमों से अगले 3-6 महीने में रुपया स्थिर होने का अनुमान है। बॉन्ड मार्केट में निवेश से पहले रुपये में स्थिरता लौटन का इंतजार करें।
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