नए प्रशिक्षण विमान ‘पिलाटस’ ने क्रिकेट के मास्टर ब्लास्टर ग्रुप कैप्टन सचिन तेंदुलकर से भारतीय वायु सेना के ब्रांड एम्बेसडर की पदवी छीन ली. वायु सेना ने सचिन तेंदुलकर को 2011 में ग्रुप कैप्टन की मानद रैंक से अलंकृत किया था और उसके बाद से युवाओं को पायलट बनने और वायु सेना में आकर्षित करने के लिए उनके पोस्टर लगाए गए थे.
अब वायु सेना ने अपने तमाम प्रचार अभियान में सचिन तेंदुलकर को हटाकर उनके स्थान पर यह दर्जा बेसिक ट्रेनर विमान ‘पिलाटस’ को दे दिया है. यही नहीं वायु सेना की प्रचार शाखा दिशा में भी ब्रांड एम्बेसडर के तौर वायु सैनिक की वर्दी पहनकर लगाया गया सचिन का चित्र हटा दिया है और उनके स्थान पर नीले रंग के नए विमान का चित्र लगाया गया है.
ब्रांड एम्बेसडर की पदवी से हटाए जाने के बारे में पूछने पर वायु सेना के एक अधिकारी ने बताया कि सचिन तेंदुलकर को 2011 में ग्रुप कैप्टन की मानद रैंक दी गई थी और उन्हें ब्रांड एम्बेसडर बनाने की आधिकारिक रूप से कोई घोषणा नहीं की गई थी. उन्होंने कहा कि उस समय यह सोचा गया था कि सचिन तेंदुलकर को प्रचार सामग्री में पेश करने से युवा आकर्षित होंगे. लेकिन अब नया बेसिक ट्रेनर विमान अपनी मोहक छवि से युवाओं को आकर्षित कर रहा है.
वायुसेना ने 75 पिलाटस विमानों का सौदा स्विट्जरलैंड से किया है और 14 विमान हैदराबाद के पास स्थित डुंडीगल की वायु सेना की पायलट प्रशिक्षण अकादमी में पहुंच गए हैं. जुलाई से वायु सेना के पायलटों के नए बैच ने इन नए विमानों पर हाथ आजमाना शुरू कर दिया है. पिछले महीने पिलाटस विमान को वायुसेना प्रमुख ने विधिवत सेवा में लिया था. सचिन को वायु सेना ने लगातार यह दूसरा झटका दिया है. इससे पहले वायु सेना प्रमुख एनएके ब्राउन ने यह कहकर सचिन की सुखोई में उड़ान भरने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया था कि वायु सेना का बहुत व्यस्त कार्यक्रम है और उनके पास इस तरह की उड़ानों के लिए फुर्सत नहीं है.
वायु सेना ने सचिन तेंदुलकर को 2011 में पायलट की वर्दी पहनाई थी और उन्हें ग्रुप कैप्टन की मानद रैंक से सुशोभित किया था. उस समय के वायु सेना प्रमुख पीवी नाइक ने उनकी सुखोई लड़ाकू विमान से उड़ान की भी घोषणा की थी. सेना की ओर से लेफ्टीनेंट कर्नल रैंक से नवाजे गए क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी ने भी सुखोई में उड़ान भरने की इच्छा जाहिर की थी और इसे भी सरकार ने स्वीकार कर लिया था. लेकिन, इन दोनों ही क्रिकेटरों के पास सुखोई में उड़ान भरने की फुर्सत नहीं थी. जब इन दोनों ने सुखोई में उड़ान भरने की इच्छा नहीं जताई तो वायु सेना ने भी अपना रुख बदल लिया और यह स्पष्ट संदेश सुना दिया कि अब उसके पास इन दोनों के लिए समय नहीं है.
वायुसेना ने 75 पिलाटस विमानों का सौदा स्विट्जरलैंड से किया है और 14 विमान हैदराबाद के पास स्थित डुंडीगल की वायु सेना की पायलट प्रशिक्षण अकादमी में पहुंच गए हैं. जुलाई से वायुसेना के पायलटों के बैच ने इन नए विमानों पर हाथ आजमाना शुरू कर दिया है. पिछले महीने पिलाटस विमान को वायुसेना प्रमुख ने विधिवत सेवा में लिया था. मगर अब नया बेसिक ट्रेनर विमान अपनी मोहक छवि से युवाओं को आकर्षित कर रहा है.
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