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मंगलवार, 16 जुलाई 2013

हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा.

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में आरक्षण के नए नियम को लेकर शहर में मचे बवाल के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से इस मसले पर जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने यूपीपीएससी में पीसीएस परीक्षा-2011 के दौरान नई आरक्षण नीति लागू करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकार और लोक सेवा आयोग से एक हफ्ते में जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने इस याचिका की सुनवाई के लिए 22 जुलाई की तारीख तय की है। 

न्यायमूर्ति एल. के. महापात्र और न्यायमूर्ति राकेश श्रीवास्तव की बेंच ने यूपीपीएससी में आरक्षण के नए नियम को लेकर सुधीर कुमार सिंह सहित कई उम्मीदवारों की याचिका पर यह निर्देश दिया। याचिका में यूपीपीएससी की ओर से परीक्षा के हर स्तर पर आरक्षण की नई नीति लागू करने के फैसले को विभिन्न आधार पर चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने वालों का कहना है कि ओबीसी आरक्षण की आड़ में एक जाति विशेष को नाजायज लाभ पहुंचाने के लिए ओबीसी में शामिल अन्य जातियों और सामान्य वर्ग के समस्त प्रतियोगियों का भविष्य दांव पर लगाने के लिए प्रदेश सरकार और लोक सेवा आयोग साजिश रच रहा है। याचिका में कहा गया कि 1994 से प्रदेश में लागू आरक्षण नियमावली के तहत अंतिम स्तर पर आरक्षण देना था, पर लोक सेवा आयोग ने परीक्षा के हर स्तर पर इस बार आरक्षण का नियम लागू कर दिया है। प्रदेश के अपर महाधिवक्ता सी. बी. यादव ने इसका विरोध करते हुए कहा कि 1994 की आरक्षण नियमावली के तहत उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग परीक्षा ले रही हैं। उन्होंने कहा कि ओबीसी के जो उम्मीदवार सामान्य श्रेणी में आ जाएंगे, उनका नियमानुसार सामान्य पदों पर चयन किया जा सकता है। बहरहाल हाईकोर्ट में इस मामले की 22 जुलाई को सुनवाई होगी। 

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