सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को बार नर्तकियों के पेशा जारी रखने के अधिकार पर अपनी मुहर लगा दी, मगर कहा कि बार नर्तकियां उन्हीं बारों में नृत्य कर सकेंगी, जिनके पास राज्य सरकार से इसका लाइसेंस प्राप्त होगा। प्रधान न्यायाधीश अल्तमस कबीर और न्यायमूर्ति एस.एस. निज्जर ने बार नर्तकियों के अधिकार को बरकरार रखते हुए महाराष्ट्र सरकार की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें बंबई उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें पुलिस के आदेश को रद्द कर दिया गया था। महाराष्ट्र पुलिस ने अपने आदेश के तहत तीन सितारा से नीचे की श्रेणी वाले होटलों में नृत्य पर रोक लगा दी थी।
फैसला सुनाते वक्त न्यायाधीश निज्जर ने कहा कि उन्होंने अनुच्छेद 19 (ए) के अंतर्गत बार नर्तकियों के अधिकार के प्रश्न को स्पर्श नहीं किया।बार नर्तकियों ने दलील दी थी कि पुलिस का आदेश उनके प्रति भेदभावपूर्ण होने के अलावा आजीविका कमाने के उनके अधिकार का हनन है। उन्होंने यह दलील भी दी थी कि वह आजीविका चलाने के लिए नृत्य के अलावा कोई दूसरा हुनर नहीं जानतीं।
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