दिल्ली की एक अदालत ने रेलवे बोर्ड के निलंबित सदस्य महेश कुमार और पूर्व रेल मंत्री पीके बंसल के भांजे विजय सिंगला तथा पांच अन्य की न्यायिक हिरासत 19 जुलाई तक के लिए बढ़ा दी. विशेष सीबीआई न्यायाधीश स्वर्ण कांत शर्मा ने सातों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ा दी . उन्हें आज न्यायिक हिरासत की अवधि खत्म होने से पहले अदालत में पेश किया गया.
अदालत ने आरोपी एमवी मुरली कृष्ण को ताजा सम्मन भेजा क्योंकि वह पूर्व में सम्मन तामील नहीं हो पाने की वजह से अदालत में पेश नहीं हुआ. सीबीआई ने जांच के दौरान कृष्ण और सम्मन के पालन में आज अदालत में पेश हुए सीवी वेणुगोपाल को गिरफ्तार नहीं किया . इन दोनों का नाम दो जुलाई को दायर आरोपपत्र में आरोपी के रूप में था . वेणुगोपाल ने जमानत के लिए आवेदन भी दायर किया.
अदालत ने सिंगला, रेलवे बोर्ड के तत्कालीन सदस्य (स्टाफ) महेश कुमार, बेंगलूर स्थित जीजी ट्रॉनिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक नारायण राव मंजूनाथ, बिचौलिए समीर संधीर और सुशील डागा की न्यायिक हिरासत 19 जुलाई तक बढ़ा दी. कुमार के वास्ते मनपसंद पद हासिल करने के लिए रिश्वत की राशि तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के आरोपी कथित दलाल अजय गर्ग को अदालत ने 8 जुलाई को जमानत दे दी थी.
अदालत ने पहले ही सिंगला, मंजूनाथ, गोयल, यादव, डागा और संधीर की जमानत याचिकाओं पर फैसला कल तक के लिए सुरक्षित रख लिया है . कुमार के जमानत आग्रह पर कल भी सुनवाई होगी. सभी 10 अरोपियों के खिलाफ भादंसं के तहत आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत आरोपपत्र दायर किया गया है.
अदालत ने चार जुलाई को सीबीआई के आरोपपत्र का संज्ञान लिया था, जिसमें एजेंसी ने आरोप लगाया था कि सिंगला ने रेलवे बोर्ड में सदस्य (इलेक्ट्रिकल) के पद पर कुमार की नियुक्ति के लिए उनसे 10 करोड़ रूपये मांगे थे और आरोपियों के बीच सहमति बनी थी कि पांच करोड़ रूपये नियुक्ति से पहले तथा शेष राशि नियुक्ति के बाद दी जाएगी. इसने कहा है कि 89.68 लाख रूपये की पहली खेप कथित तौर पर सिंगला को दी गई जिसे चंडीगढ़ में राशि स्वीकार करते समय गिरफ्तार कर लिया गया.
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