प्रधानमंत्री ने कैबिनेट समिति बनाकर मुख्यमंत्री के कतरे पर!
देहरादून, 11 जुलाई। आजादी के बाद से देश के इतिहास में यह पहला मौका है, जब किसी प्रदेश के मुख्यमंत्री की अक्षमताओं को लेकर केंद्र ने केंद्रीय कैबिनेट की एक समिति का गठन किया हो। उल्लेखनीय है कि देश के इतिहास में पहली बार किसी आपदा को लेकर केंद्र सरकार ने केंद्रीय मंत्रियों की एक समिति बनाई और उसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री को महज स्थाई आमंत्रित सदस्य के रूप में स्थान दिया है। गौरतलब हो कि बीते दिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राज्य के पुर्ननिर्माण और पुर्नवास कार्यों को लेकर एक विशेष 14 सदस्यी समिति का गठन किया है। जिसके अध्यक्ष स्वंय प्रधानमंत्री होंगे, इस समिति में रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी, कृषि मंत्री शरद पंवार, वित्त मंत्री पी. चिदंबरम, स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद, गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे, सड़क परिवहन मंत्री ऑस्कर फर्नांडिस, कानून मंत्री कपिल सिब्बल, आवास मंत्री गिरिजा व्यास, ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश और जल संसाधन मंत्री हरीश रावत को शामिल किया गया है, जबकि योजना अयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलुवालिया और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकार उपाध्यक्ष एम शशिधर रेड्डी सहित उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को स्थाई आमंत्रित सदस्य बनाया गया है।
राज्य में आई आपदा के बाद से प्रदेश सरकार पर लगातार आपदा राहत कार्यों में हिलाहवाली सहित आपदा के दिन से चार दिन तक असहाय सा बने रहना केंद्र को नागवार गुजरा है। वहीं प्रदेश का दौरा कर वापस लौट चुके राहुल गांधी की रिपोर्ट को भी प्रदेश सरकार के खिलाफ बताया गया है। इतना ही नहीं तीर्थयात्रियों की संख्या को लेकर व मरने वालों की वास्तविक संख्या को लेकर प्रदेश सरकार अभी भी कटघरे में है, जबकि आपदा और राहत कार्यों सहित खाद्यान्न की सप्लाई के मामले में भी सरकार फिसड्डी साबित हुई है। वहीं यह भी उल्लेखनीय है कि आपदा के 27 दिन बाद अभी तक प्रदेश के चार धाम यात्रा मार्ग पूरी तरह से नहीं खुल पाए हैं, यह भी सरकार की अक्षमता को प्रदर्शित करता है। वहीं मनमोहन और सोनिया के दौरे के बाद केंद्र सरकार ने प्रदेश में अपना प्रतिनिधि पूर्व गृह सचिव वी.के. दुग्गल को भी राहत एवं बचार्व कार्य की देखरेख के लिए लगाया था। उनकी रिपोर्ट भी प्रदेश की अफसरशाही व नेताओं के बीच सामंजस्य न होना और आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सरकार की लापरवाही को लेकर केंद्र को गई है। इन सबको देखते हुए आखिकार केंद्र सरकार ने आपदा एवं राहत कार्यों के बाद राज्य के पुर्ननिर्माण और पुर्नवास के कार्यों को अपने हाथों में लेकर यह जता दिया है कि वह भी प्रदेश सरकार के कार्यों से खुश नहीं है। हालांकि मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा केंद्रीय 14 सदस्यी विशेष कमेटी को राज्य के पुर्ननिर्माण में मददगार बता रहे हैं, लेकिन इस समिति के गठित हो जाने के बाद यह साफ है कि केंद्र ने मुख्यमंत्री के पर कतर दिए हैं। यह समिति राज्य में पुर्ननिर्माण और पुर्नवास कार्यों पर जहां नजर रखेगी वहीं उत्तराखण्ड में हुए व्यापक नुकसान और उसके पुर्ननिर्माण पर होने वाले खर्च पर निगरानी रखेगी। गौरतलब हो कि उत्तराखण्ड में हुए जलप्रलय के बाद प्रधानमंत्री ने राहत एवं बचाव कार्यों के लिए एक हजार करोड़ के पैकेज के साथ ही ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 340 करोड़ रूपये का पैकेज और केंद्र के अन्य मंत्रालयों और सरकारी संस्थाओं ने उत्तराखण्ड पुर्ननिर्माण और पुर्नवास कार्यों के लिए और भी मदद देने की घोषणा की है। वहीं दूसरी ओर भाजपा के राष्ट्रीय सचिव त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड में आपदा के बचाव और राहत कार्यों के लिए आई धनराशि में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होने की आशंका थी, इसी आशंका पर प्रधानमंत्री ने मुहर लगाते हुए केंद्रीय मंत्रियों की निगरानी कमेटी बनाई है।
पोल खुलने की डर से हादसे की जांच कराने से मुकरी सरकार!
देहरादून, 11 जुलाई। उत्तराखण्ड में 16-17 जून को आई भीषण तबाही का सच आखिर क्यों छिपाना चाह रही है सरकार यह सवाल प्रदेशवासियों जेहन में बार-बार कौंध रहा है। मुख्यमंत्री द्वारा केदारनाथ हादसे पर जांच न बैठाए जाने की घोषणा के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि प्रदेश सरकार कुछ तो छिपा रही है। लोगों का तो यहां तक कहना है कि इस तबाही की जिम्मेदार प्रदेश सरकार है और वह क्यों जांच कराएगी। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के ताजा बयान कि ‘‘केदारनाथ हादसे की जांच नहीं होगी‘‘ पर जहां एक ओर राजनैतिक माहौल गरमा गया है, वहीं प्रदेशवासी भी मुख्यमंत्री की इस घोषणा से खासे नाराज हैं। प्रदेशवासी जानना चाहते हैं कि यह दैवीय आपदा थी या प्राकृति प्रकोप। वहीं देश यह भी जानना चाहता है कि हादसे में मरने वालों की संख्या सरकार द्वारा बताए गए मरने वालों की संख्या से कहीं ज्यादा है। वहीं सरकार यह भी बहाना बनाकर अपनी नाकामी को छिपाना चाह रही है, जो उसने आपदा से चार दिन तक हाथ पर हाथ धरे बैठे किया। वहीं कई सवाल अब भी खड़े हैं, जिनका जवाब सरकार को देना होगा कि जब 17 जून को हैलीकाप्टर पाईलेट ने प्रदेश के प्रमुख सचिव राकेश शर्मा को सूचना दे दी थी कि केदारनाथ में भारी तबाही हुई है, तो सरकार 19 तारीख तक क्यों हाथ पर हाथ धरे बैठे रही, वहीं यह सवाल भी उठ खड़ा हो रहा है कि चार धाम यात्रा शुरू होने के दौरान ही सरकार ने रूद्रप्रयाग जिले से युवा जिलाधिकारी को क्यों बदला। उल्लेखनीय है कि डा. नीरज खैरवाल के स्थान पर प्रदेश सरकार ने विजय ढ़ौंडीयाल को आपदा से कुछ ही दिन पूर्व रूद्रप्रयाग जिले का जिलाधिकारी बनाया था। वहीं यह सवाल भी उठ खड़ा हो रहा है कि 16-17 जून हादसे के बाद जब जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग विजय ढ़ौंडीयाल की तबीयत खराब हुई तो पांच दिनों तक रूद्रप्रयाग जिले को बिना जिलाधिकारी के क्यों रखा गया। वहीं यह भी एक सवाल उठ खड़ा हो रहा है कि हादसे से दो दिन पूर्व केदारनाथ में खच्चरों की हड़ताल के चलते जब भारी संख्या में वहां यात्री एकत्रित होने शुरू हो गए तो प्रशासन ने यात्रियों को वहां से निकालने के प्रयास क्यों नहीं किए। यदि जिला प्रशासन द्वारा अथवा प्रदेश सरकार द्वारा यात्रियों को वहां से निकाल लिया जाता तो हादसे में कम मौते होती। वहीं यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि जब केदारनाथ में खच्चर और घोड़े वालों की हड़ताल जारी थी, ऐसे में फाटा और अगस्तमुनी से हैलीकाप्टरों के उड़ान पर किस अधिकारी द्वारा रोक लगाई गई। वहीं यह सवाल भी सामने आ रहा है कि किस मंत्री के निर्देश पर ऋषिकेश से चार धाम यात्रा के लिए बनी संयुक्त रोटेशन यातायात समिति को भंग किया गया। यहां यह भी जानकारी सामने आई है कि समिति के भंग हो जाने के बाद चार धाम, दो धाम और एक धाम यात्रा पर गए वाहनों में यात्रियों की सूची नहीं थी, जिससे यह पता चल पाए कि कौन सा वाहन रूद्रप्रयाग से केदारनाथ मार्ग पर गया और उसमें कितने यात्री और कहां के यात्री सवार थे। यह सवाल भी निकलकर आया है कि सरकार के पास चार धाम यात्रा पर गए यात्रियों का कोई लेखा जोखा नहीं है। वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डा. रमेश पोखरियाल निशंक सहित नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट सहित समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद बड़थ्वाल व जनता दल यूनाईटेड के नेताओं ने सरकार से केदारनाथ हादसे पर श्वेत पत्र की मांग की है। भाजपा सहित तमाम राजनैतिक दलों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह जान बूझकर अपनी कमियांे को छिपाने को लेकर केदारनाथ हादसे की जांच करने से पीछे हट रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को पता है कि उसने हादसे के दौरान आपदा एवं राहत कार्यों को लेकर लापरवाही बरती है। वहीं प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाठकर ने उत्तराखण्ड में नेतृत्व परिवर्तन की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि आपदा के वक्त राहत एंव बचाव कार्य में सरकार पूरी तरह नाकाम रही है, सरकार के अधिकारी गलत बयानबाजी कर गलत आंकड़े पेश कर रहे हैं, इतना ही नहीं सरकारी तंत्र राहत सामग्री लेकर पहुंच रहे लोंगों और संस्थाओं के बीच समन्वय बनाने तक में नाकाम साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि आपदा के बाद पहाड़ के लोगों का सब कुछ बर्बाद हो गया है, लेकिन सरकार अभी भी हाथ पर हाथ धरे बैठी है। उन्होंने कहा कि पहाड़ के दुर्गम इलाकों में लोग भूखे हैं, जिन क्षेत्रों में राहत सामग्री बांटी जा रही है, वह पर्याप्त नहीं है। उन्होंने आपदा की विस्तृत जांच किए जाने की मांग भी की। उन्होंने सरकार के अधिकारियों पर आरोप भी लगाया कि वे राहत लेकर आ रहे लोगों को अब मदद न किए जाने की बात कहकर वापस लौटा रहे हैं। वहीं बुद्धिजीवीयों का कहना है कि सरकार को केदारनाथ त्रासदी पर एक जांच आयोग का गठन कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हों।
सेना के बाद आरएसएस और विहिप ने किया सराहनीय कार्य
देहरादून, 11 जुलाई, । भारतीय सेना के बाद यदि उत्तराखण्ड के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में किसी ने मदद की है तो वह राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने की है। हादसे के बाद सो रही सरकार और लचर प्रशासन तंत्र की सुविधाओं को दरकिनार कर आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने केदारनाथ, गुप्तकाशी, जोशीमठ और धारचूला क्षेत्रों में वह कार्य कर दिखाया जो सरकारी अमला न कर पाया। आरएसएस ने गुप्तकाशी, फाटा, उखीमठ और गौचर, कर्णप्रयाग, जोशीमठ, मुनस्यारी क्षेत्रों में प्रभावित परिवारों को आपदा ग्रस्त क्षेत्रों से निकालकर उनकी शिशु मंदिरों में रहने की व्यवस्था की। विहिप के वरिष्ठ नेता शिव नारायण सिंह ने बताया कि विहिप ने उर्गम क्षेत्र में हुई आपदा के बाद उस समूचे क्षेत्र को गोद लेने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि विहिप द्वारा आपदा काल में 65 हजार लोगों से अधिक आपदा प्रभावित लोगों और तीर्थयात्रियों की भोजन की व्यवस्था की गई। उन्होंने बताया कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों से निकाले जाने के बाद अपने गंतव्यों को जा रहे लगभग 35 हजार तीर्थयात्रियों को उन्होंने चाय और नाश्ते की व्यवस्था की, इतना ही नहीं 14 हजार तीर्थयात्रियों को प्राथमिक चिकित्सा देकर उन्हें उनके घरों को भेजा गया। शिव नारायण सिंह ने बताया कि विहिप द्वारा हरिद्वार से विभिन्न स्थानों को जाने वाले लगभग पांच हजार तीर्थयात्रियों को रेल के टिकट मुहैया कराए गए, इतना ही नहीं कई लोगों की ऋषिकेश, हरिद्वार और काठगोदाम में रहने की व्यवस्था भी विहिप द्वारा की गई। उन्होंने बताया के विहिप द्वारा पीपलकोटी, हरिद्वार, ऋषिकेश, कोटद्वार सहित छहः अन्य स्थानों पर स्थाई आपदा राहत शिविर बनाएं गए हैं, जिन पर एक हजार से अधिक कार्यकर्ता तैनात किए गए हैं। उन्होंने बताया कि संघ और विहिप द्वारा आपदा प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर आपदा में अपना सब कुछ गंवा चुके लोगों को बिस्तर से लेकर मोमबत्ती और खाना बनाने के बर्तन तक विश्व हिंदू परिषद उपलब्ध करवा रहा है। उन्होंने बताया के 1991 उत्तरकाशी में आए भूकंप के बाद विहिप द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में केदार कुटी स्थापित किए गए थे, उसी तर्ज पर केदारनाथ और उर्गम क्षेत्र में केदार कुटी का निर्माण किया जाएगा, ताकि उन ग्रामीणों को राहत मिल सके जिनके घर आपदा में बर्बाद हो गए।
अब ओखलकांडा में प्रकृति का तांडव
- पहाड़ी से आया मलबा मकान पर गिरा, एक ही परिवार के छह लोग दबे, सभी की मौत
हल्द्वानी/देहरादून, 11 जुलाई, । ओखलकांडा विकासखंड के अंतरगत आने वाले ल्वाडड़ोवा गांव में मकान के पीछे पहाड़ी से आए मलबे ने एक ही परिवार के छह लोगों को मौत की नींद सुला दिया। इनमें परिवार की चार लडकियां और उनके माता-पिता भी शामिल बताए गए हैं। परिवार के एक बेटा घर से बाहर होने के कारण जीवित बच सका। इस परिवार में वंश बेल के नाम पर अब 13 साल का वही बालक जिंदा बच्चा है। नैनीताल के डीएम अरविंद सिंह ह्यांकी मौके पर पहुंच गए हैं। इस घटना में 15बकरियां, चार गाय व दो भैंसों के भी मलबे में दबकर मरने की खबर हैं। उत्तराखण्ड में आई प्राकृतिक आपदा के जख्म अभी सूखे भी नहीं थे कि कुमाऊं में अब तक की सबसे बड़े व्यक्तिगत त्रासदी घटित हो गई। नैनीताल जिले के ओखलकांडा विकास खंड में लोगों की नींद अभी पूरी तरह से खुली भी नहीं थी कि ल्वाड डोबा गांव में प्रकृति ने गत रात्रि चमोली जिले के पोखरी विकास खंड के भिकोना गांव में हुई त्रासदी को दोहरा दिया। पहाड़ से बह कर आया मलबा ल्वाड़ डोबा गांव के हयाद राम के मकान की पिछली दीवार से ऐसा टकराया कि दीवार भरभरा कर गिर गई। दीवार गिरी तो मकान की छत भी कहां ठहरनी थी। मकान के मलबे में पूरी छह जिंदगियां ऐसी दबी कि उनकी सांस की डोर ही टूट गई। हयादराम उसकी पत्नी, और चार बेटिया मलबे के ढेर के नीचे दब गईं। दूरदराज का गांव होने के नाते प्रशासनिक राहत दल मौके पर 12 बजे भी नहीं पहुंच सका। एसडीएम मौके के लिए रवाना हो गए। तहसीलदार भी मौके पर पहुंचे। अनुसूचित जाति से संबंधित यह परिवार पहले ही गरीबी की रेखा से नीचे जीवन बिता रहा था। कल रात हयादराम का 13 साल का बेटा अपने ताऊ के घर पर गया हुआ था, इसलिए वह सकुशल है। चक डोबा गांव निवासी जीवन दत्त रुवाली ने बताया कि सुबह के समय मलबा तेजी से हयादराम के घर के पीछे की ओर आया। उन्होंने बताया कि मकान इतनी जल्दी गिर गया कि अंदर सो रहे लोगों को इसकी भनक भी नहीं लगी। फिलहाल मलबा हटाने का कार्य चल रहा है। डीएम मौके पर है लेकिन मोबाइल सिगनल न मिल पाने के कारण उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।
कांवड यात्रा भी चढ़ी आपदा की भेंट
देहरादून, 11 जुलाई, । उत्तराखंड में आई भीषण आपदा की भेंट भगवान शिव के प्रति भारी उत्साह और आस्था की प्रतीक मानी जाने वाली ऐतिहासिक कांवड़ यात्रा भी चढ़ गई। हरिद्वार और ऋषिकेश आदि आसपास के जिलों तक ही इस बार यात्रा में आने वाले शिव भक्त आ जा सकेंगे। इन श्रद्धालुओं को पहाड़ी क्षेत्रों में जाने की अनुमति होगी। इस आशय के संकेत उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक सत्यव्रत ने राजधानी देहरादून में यूपी के साथ आयोजित नवीं अंतरराज्यीय व अंतर इकाई समन्वय बैठक में दिए। उन्होंने बैठक की अध्यक्षता करते हुए साफ किया कि कांवड़ यात्रा में आए कांवडि़ए इस दौरान चार धामों की यात्रा भी करते हैं, लेकिन आपदा के कारण इस बार उन्हें पर्वतीय क्षेत्रों में जाने से कड़ाई से रोका जाएगा। उन्होंने कहा कि कांवड़ मेला कानून व्यवस्था के दृष्टिकोण से भी अत्यन्त संवेदनशील है। इस दौरान भारी संख्या में कांवडिय़ों का हरिद्वार और ऋषिकेश की तरफ आवागमन रहता है। उन्होंने कहा कि कांवड़ मेले को शांन्तिपूर्वक ढंग से सम्पादित कराना उत्तराखंड पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है और इस पर सफल होने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस और शासन का सहयोग जरूरी है। उन्होंने अरूण कुमार अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध एवं कानून व्यवस्था उत्तर प्रदेश, से अनुरोध किया कि कांवड़ मेला प्रारम्भ होने से पहले जनपद मेरठ में भी एक समन्वय बैठक आयोजित की जाए जिसमें सभी महत्वपूर्ण बिन्दुओं व तैयारियों की पुनर्समीक्षा हो सके। बैठक में कावडिय़ों को जागरूक करने के उद्देश्य से यात्रा मार्गाे व क्षेत्रों में पर्चे पंफलेट बटवाने व पोस्टर बैनर लगवाने के सम्बन्ध में निर्णय भी लिया गया। डीजीपी सत्यव्रत ने कहा कि उन्होनें कहा कि पिछले दिनों जलप्रलय के कारण राज्य में आयी आपदा के कारण राज्य पुलिस बल काफी संख्या में राहत व बचाव कार्य में लगा हुआ है। इस कारण पड़ोसी राज्यों का समन्वय व सहयोग भी अतिआवश्यक हो गया है। बैठक में बैठक में अध्किारियों द्वारा निम्न प्रमुख बिन्दुओं पर प्रस्तुतिकरण दिये गये जिन पर गहन विचार विमर्श किया गया। इन बिंदुओं में आगामी कांवड़ मेेला के परिपेक्ष्य में सुरक्षा की दृष्टि से अभिसूचना का आदान प्रदान, कावडिय़ों द्वारा नहर की पटरी का प्रयोग किये जाने, डीजे का प्रयोग न करने देना, कॉवड़ मेेला में हॉकी, डंडे, त्रिशुल आदि प्रतिबन्ध्ति करने व यातायात नियमों का पालन कराये जाने, उत्तराखण्ड तथा पडोसी राज्यों में वामपन्थी उग्रवाद व उनकी गतिविधियों के सन्दर्भ में सूचनाओं का आदान प्रदान, नेपाल व चीन सीमाओं के सन्दर्भ में सभी पुलिस संगठनों व सुरक्षा एजेन्सियों के मध्य सूचनाओं के आदान प्रदान, समन्वय, वैधानिक/अवैधानिक रास्तों व वाहनों की चैकिंग व सुरक्षा तथा महत्वपूर्ण पुलों आदि की सुक्षा, जालीमुद्रा के आवागमन व परिचालन को रोकने हेतु की जाने वाली कार्यवाही और तिब्बत/नेपाल अन्तर्राष्ट्रीय सीमा से होने वाली तस्करी की रोकथाम आदि प्रमुख रहे। बैठक में अरूण कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध् एवं कानून व्यवस्था उ0प्र0, बी.के. सिंह, पुलिस महानिरीक्षक मेरठ जोन, राम सिंह मीना, पुलिस महानिरीक्षक अपराध् एवं कानून व्यवस्था, उत्तराखण्ड, जगमोहन, डीडी-आईबी, देहरादून, दीपक ज्योति घिल्डिय़ाल, पुलिस महानिरीक्षक अभिसूचना उत्तराखण्ड, आईएस नेगी, पुलिस महानिरीक्षक आईटीबीपी, देहरादून, श्याम सिंह, पुलिस महानिरीक्षक, एसएसबी, एनएफ रानीखेत अल्मोड़़ा, सुभाष यादव, डीआईजी टेलीकॉम, हरियाणा, जीएन गोस्वामी, पुलिस उपमहानिरीक्षक, कुमाऊं परिक्षेत्र आदि आला अफसरों ने भाग लिया।
केंद्र सरकार उत्तराखण्ड को राहत दिलाने के प्रति गम्भीररू बहुगुणा
देहरादून, 11 जुलाई, । मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने प्रधानमंत्री द्वारा उŸाराखण्ड में आपदा के बाद पुनर्निर्माण व पुनर्वास के लिए 12 सदस्यीय समिति बनाए जाने को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार उत्तराखण्ड को राहत दिलाने के प्रति गम्भीर है। विभिन्न मंत्रियों की समिति बनाए जाने से मंत्रालयों से संबंधित समस्याएं एक ही जगह पर हल हो जाएंगी। गुरूवार को सचिवालय में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने दो वर्ष से अधिक सजा होने पर सांसद व विधायक को अयोग्य ठहराए जाने संबंधी सर्वाेच्च न्यायालय के निर्णय को स्वागतयोग्य बताया। उन्होंने कहा कि इससे राजनीति में स्वच्छ छवि के लोग आएंगे। भारतीय लोकतंत्र को लाभ होगा और हम स्वस्थ लोकतंत्र की दिशा में आगे बढेंगे। आपदा में लापता व्यक्तियों के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 जुलाई तक लापता व्यक्तियों को मृत मानते हुए मुआवजा दिया जाएगा। फिर भी सरकार अपना सर्च आपरेशन जारी रखेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक बुलाई गई है जो खाद्य सुरक्षा पर चर्चा करेगी। राज्य में इससे किस तरह अधिकाधिक जरूररतमंद लोगों को लाभान्वित किया जा सकता है, इसके लिए रूपरेखा तैयार की जाएगी।
राज्य सरकार कराएगी आर्मी को भूमि उपलब्ध
देहरादून, 11 जुलाई, । राज्य सरकार आर्मी को उत्तराखण्ड के दूरस्थ क्षेत्रों में पॉलीक्लिनिक स्थापित करने के लिए भूमि उपलब्ध करवाएगी। गुरूवार को सचिवालय में सेंट्रल कमाण्ड के कमाण्डिंग इन चीफ, लेफ्टिनेंट जनरल राजन बक्शी द्वारा प्रस्ताव दिए जाने पर मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने मुख्य सचिव सुभाष कुमार को आवश्यक भूमि आर्मी को जल्द उपलब्ध करवाए जाने के लिए आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए। यूएवी के लिए जमीन उपलब्ध करवाने की औपचारिकताएं शीघ्र पूरी करने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि भीषण आपदा के समय राहत कार्यों के संचालन में सेना की भूमिका सराहनीय रही। विपरीत परिस्थितियों में सेना, वायुसेना, एनडीआरएफ व पुलिस के जवानों ने अदम्य साहस का परिचाय देते हुए मानवता के लिए कार्य किया। लेफ्टिनेंट जनरल बक्शी ने कहा कि यह बचाव अभियान ऐसी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में दुनिया का अपनी तरह का सबसे बड़ा अभियान था। सभी के सम्मिलित प्रयासों से ही एक लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा सका। उन्होंने राज्य के दूरवर्ती क्षेत्रों में डाक्टर, उपकरण व अन्य सुविधाओं से युक्त पॉलीक्लिनिक स्थापित करने का प्रस्ताव किया व असके लिए राज्रू सरकार से भूमि दिए जाने के लिए अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव सुभाष कुमार को भूमि चिन्हित कर आर्मी को उपलब्ध करवाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य में भी एनडीआरएफ की तर्ज पर एसडीआरएफ का गठन किया जा रहा है। जिसकी चार कम्पनियां स्थापित की जाएंगी। राज्य में आपदा प्रबंधन के लिए जिओलोजिस्ट, पर्यावरणविदों व अन्य विशेषज्ञों की सेवाएं ली जाएंगी। यात्रियों को तो निकाल लिया गया है परंतु सम्पर्क मार्गों से कटे गांवों में खाद्यान्न व अन्य आवश्यक वस्तुएं पहुंचाने का काम जारी रहेगा। सड़कों को दुरूस्त करने का काम तेजी से चल रहा है। केदारनाथ क्षेत्र व अन्य जगहों पर सड़कों के एलाईनमेंट में जीएसआई के सुझावों पर अमल किया जाएगा।
राज्यपाल से मिले रूद्रप्रयाग के आपदा प्रभावित
देहरादून, 11 जुलाई, । उत्तराखण्ड के राज्यपाल डॉ0 अज़ीज़ कुरैशी से आज दैवीय आपदा से सर्वाधिक प्रभावित रूद्रप्रयाग जनपद के केदारघाटी से आये लोगों ने मुलाकात की। केदारनाथ क्षेत्र से पूर्व विधायक आशा नौटियाल, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष धनसिंह रावत तथा रूद्रप्रयाग से भाजपा के जिला महामंत्री महावीर सिंह पंवार के नेतृत्व में राजभवन पहुंचे एक बड़े प्रतिनिधिमण्डल ने राज्यपाल को पन्द्रह सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में रूद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग को शीघ्र खोले जाने, जल-प्रलय में पूर्ण व आंशिक क्षतिग्रस्त हुए गाँवों, कस्बों के आवासीय भवनों, दुकानों का वास्तविक आकलन कर पूरा मुआवजा दिलाने एवं पुनर्वास की व्यवस्था करने, आपदा में मृत व घायलों के लिए निर्धारित मुआवजा राशि को बढ़ाने, मृत पशुओं व घोड़े खच्चरों के मालिकों को मुआवजा देने, केदारनाथ धाम की सफाई व मरम्मत कर उसमें पूजा शुरू कराने, आपदा में बह चुके वाहनों का मुआवजा दिलाने जैसी कई मांगों का उल्लेख किया गया है। राज्यपाल ने उन्हें भरोसा दिलाया कि आपदा प्रभावितों को राहत देने तथा उन्हें सुव्यवस्थित तरीके से पुनर्वासित करने में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार के स्तर से हर संभव प्रयास जारी हैं।
राज्यपाल से मिले जी.ओ.सी-इन-सी. सेन्ट्रल कमाण्ड, ले0ज0 राजन बख्शी
देहरादून, 11 जुलाई, । आज राज्यपाल डॉ0 अज़ीज़ कुरैशी से जनरल ऑफिसर कमाण्डिंग-इन-चीफ सेन्ट्रल कमांड लेफ्टिनेंट जनरल राजन बख्शी, ने राजभवन पहुंचकर शिष्टाचार भंेट की। ले0ज0 बख्शी ने भेंटवार्ता के दौरान अपने पद से जुड़े दायित्वों के संदर्भ में राज्यपाल को विस्तृत जानकारी भी दी। उनके साथ देहरादून सब एरिया जी0ओ0सी0 मेजर जनरल सुशील अग्रवाल भी मौजूद थे। राज्यपाल ने भारतीय रक्षा सेवा तथा अन्य सभी अर्द्ध सैन्य बलों के जवानों के प्रति अपना सम्मान एवं आभार व्यक्त करते हुए कहा कि 16-17 जून को राज्य में आयी दैवीय आपदा में सेना के जवानों व अर्द्ध सैन्य बलों ने जिस समर्पण भाव से अपने जीवन को दांव पर लगाकर बचाव एवं राहत कार्य किया उसके लिए उत्तराखण्ड ही नहीं बल्कि पूरा देश उनका आभारी है।
बुर्का पहन बिजली विभाग के कलेक्सन सेंटर में लूट का प्रयास
देहरादून, 11 जुलाई, । विकासनगर क्षेत्र में बिजली विभाग के कलेक्सन सेंटर में घुस कर दिनदहाड़े दो बदमाशों ने नगदी लूटने का प्रयास किया लेकिन महिला द्वारा हल्ला मचाए जाने पर लुटेरे मौके से फरार हो गए। मौके पर पहुंची पुलिस ने महिला कर्मचारी से पूछताछ की लेकिन बदमाशांे के बारे में कोई सुराग नहीं मिल पाया। उधर महिला का कहना था कि दोनों लुटेरे बुर्का पहने हुए थे और वह उनकी शक्लें नहीं देख पाई। इस घटना से कर्मचारियों में भी दशहत का माहौल बना हुआ है। दून मंे बदमाशों पर पुलिस के बढते शिकंजों के बाद अब बदमाशों ने लूट की वारदातों केा अंजाम देने के लिए नए-नए हथकंडे अपनाने शुरू कर दिए हैं। विकासनगर में बदमाशों ने बुर्का पहन कर अपनी हरकत को अंजाम देने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो
पाए। घटनाक्रम के अनुसार 18 फीटा रोड पर विद्युत विभाग का बिल सेंटर है। यहां दिनदहाडे़ दो महिलाएं बुर्का पहन कर आईं। इन महिलाओं ने सहायक कर्मचारी श्रीमती शालिनी शर्मा से बिल जमा करने के बारे पूछा तो महिला भी हैरान रह गयी क्योंकि बुर्का पहन कर आने वाले दोनों पुरूष थे। इससे पहले कि शालिनी शर्मा कुछ समझ पातीं, दोनों बुर्काधारी बदमाशों ने कैश के दराज को खोलने का प्रयास किया जिस पर महिला ने हल्ला मचा दिया। महिला कर्मचारी द्वारा हल्ला मचाए जाने पर दोनों बदमाश घबरा गए और वहां से फरार हो गए। कुछ कर्मचारियों ने उनका पीछा करने का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हो पाए। उधर सूचना मिलने पर विकासनगर पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन बदमाशों के बारे में कोई जानकारी या उनके हुलिए के बारे में पता नहीं चल पाया। बुर्का पहन कर लूट के प्रयास की इस घटना के बाद कर्मचारियों मंे भी दहशत का माहौल बना हुआ है। बताया जा रहा है कि दोनों युवक एक ईनोवा गाड़ी में आए थे और अपने इसी वाहन में सवार होकर भाग भी गए। पुलिस के अनुसार दराज में विद्युत बिल के एक लाख सत्तर हजार रूपए रखे हुए थे जो कि सुरक्षित पाए गए हैं। पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ उपखंड अधिकारी प्रशांत पंत की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया है।
पुलिस की नौकरी का झांसा देकर ठगा
देहरादून, 11 जुलाई, । ठगों ने दो लाख की रकम पुलिस में सिपाही के पद पर भर्ती कराने का आश्वासन देकर ठग ली है। सहसपुर थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है लेकिन अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। अधिकारियों का दावा है कि उत्तराखंड पुलिस मंे भर्ती एक पारदर्शिता प्रक्रिया के तहत ही होती है, लेकिन बावजूद इसके कई ऐसे ठग पुलिस में भर्ती कराने के नाम पर युवाओं एवं उनके परिजनों को भ्रमित कर रहे हैं। पूर्व में भी पुलिस में भर्ती कराने के नाम पर कई लोगांे के साथ धोखाधड़ी के मामले सामने आ चुके हैं और कई युवक अपनी जमा पूंजियों केा गंवा चुके हैं। ऐसे ही एक और मामले में दो लोगों पर एक युवक के परिजनों ने मामला दर्ज कराया है जिसमें उनके दो लाख रूपए ठगने की बात कही गयी है। इस संबंध में पहले मौहम्मद नाजिम निवाासी ढकरानी विकासनगर ने विकासनगर कोतवाली में शिकायत दी थी लेकिन घटना स्थल सहसपुर क्षेत्र में होने के कारण मामला सहसपुर पुलिस को स्थानांतरित कर दिया गया। पुलिस को दी गयी शिकायत में मौहम्मद नाजिम ने बताया कि कुछ समय पूर्व उत्तराखंड पुलिस में निकली भर्तियांे को लेकर उनका संपर्क राजकुमार निवासी जस्सोवाला एवं वीरसिंह नाम के एक व्यक्ति से हुआ। इन दोनों लोगों ने पुलिस में अपने अच्छे संबंधों का हवाला देते हुए नाजिम के पुत्र को भर्ती कराने का आश्वासन दिया, लेकिन भर्तियां पूरी होने के बावजूद भी सेलेक्सन नहीं हो पाया। दोनों लोगों ने भर्ती के नाम पर दो लाख रूपए भी ले लिए। इधर अपने पैसे वापस मांगने पर भी पैसा वापस नहीं दिया गया और अगली भर्ती मंे काम पूरा करने की बात कही गयी, लेकिन अपने साथ हुई धोखाधड़ी को भांपते हुए आखिर मौहम्मद नाजिम ने राजकुमार व वीरसिंह के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया।
(मनोज इष्टवाल)

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