केंद्र सरकार ने अब एसिड को जहर की श्रेणी में रखने का फैसला किया है. एसिड की खुली बिक्री को देखते ये निर्णय लिया गया. देश भर में एसिड अटैक के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में ड्राफ्ट दिया है. ड्राफ्ट के मुताबिक एसिड को अब जहर की श्रेणी में रखा जाएगा. इसके अलावा, एसिड बिक्री के लिए अब लाइसेंस जरूरी होगा. साथ ही एसिड की खरीद के लिए पहचान को भी अनिवार्य कर दिया गया है. मालूम हो कि एसिड अटैक पर सुप्रीम कोर्ट की सरकार को दी डेडलाइन मंगलवार को खत्म हो गई. कोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए एक हफ्ते के भीतर जवाब मांगा था.
कोर्ट ने कहा था कि लोग अपने जान गंवा रहे हैं और सरकार गंभीर नहीं है. अगर एक सप्ताह के भीतर इस पर कोई नीति नहीं बनाई जाती तो कोर्ट स्वयं इस बारे में आदेश पारित करेगी. न्यायमूर्ति आर एम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सरकार के रवैये पर नाराजगी व्यक्त करते हुए 9 जुलाई को कहा था कि तेजाब के हमलों से रोजाना लोग मर रहे हैं लेकिन कोर्ट को 16 अप्रैल को आश्वासन देने के बावजूद केंद्र इस बारे में नीति तैयार करने में विफल रहा है.
न्यायाधीशों ने राज्य सरकारों से परामर्श करके नीति तैयार करने के लिए केंद्र सरकार को एक सप्ताह का समय देते हुए कहा था, इस मसले के प्रति सरकार की गंभीरता नज़र नहीं आती है. लोग मर रहे हैं लेकिन आपको इसकी परवाह नहीं है. उन लोगों के बारे में सोचिये जो रोजाना जिंदगी गंवा रहे हैं. देश के विभिन्न हिस्सों में रोजाना लड़कियों पर हमले हो रहे हैं. दरअसल कोर्ट ने अप्रैल में आदेश पारित किया था लेकिन सरकार इसके बावजूद बाजार में तेजाब की बिक्री को नियंत्रित करने की नीति तैयार करने में विफल रही.
न्यायालय ने कहा था कि अगर 16 जुलाई तक सरकार इस बारे में कोई नीति तैयार करने में विफल रहती है तो फिर वह उचित आदेश पारित करेगी.

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