मत्स्य पालक महेश प्रसाद को मुख्यमंत्री श्री चौहान ने किया सम्मानित
- विदेशी प्रजाति फंगेशियस का उत्पादन कर दिखाई नई राह
बालाघाट जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के ग्राम बिठली के मत्स्य पालक कृषक महेश प्रसाद गढ़ेवाल ने अपने स्वयं के तालाब में विदेशी प्रजाति की फंगेशियस मछली का उत्पादन कर मत्स्य पालक कृषकों को कम समय में अधिक लाभ लेने की नई राह दिखाई है। महेश प्रसाद के प्रयासों को मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भी सराहा है और गत दिवस भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में उसे सम्मानित भी किया। इस अवसर पर म.प्र. के मछली पालन मंत्री श्री अजय विश्नोई भी उपस्थित थे। बिठली के निवासी महेश प्रसाद गढ़ेवाल अपने 12.50 एकड़ क्षेत्र के तालाब में पुश्तैनी रूप से मछली पालन का कार्य करते रहे है। लेकिन उन्हें इस कार्य में ज्यादा कुछ लाभ नहीं मिल रहा था। पांच वर्ष पहले वे मत्स्य पालन विभाग के सम्पर्क में आये तो उसका उन्हें लाभ मिला और आज वे मछली पालन का कार्य व्यवसायिक तौर पर करने लगे है। मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों द्वारा महेश प्रसाद को आधुनिक तकनीक से मत्स्य पालन की सलाह दी गई और तालाब के सुधार पर ध्यान देने कहा गया। महेश प्रसाद को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत जल क्षेत्र के संवंर्धन एवं विकास के लिए वर्ष 2011-12 में 10 लाख रु. का ऋण उपलब्ध कराया गया। मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों की देखरेख में महेश प्रसाद ने बैंक से मिली इस राशि का उपयोग कर एक हेक्टेयर जल क्षेत्र में 10 नर्सरियों का निर्माण कराया तथा पेकिंग शेड व पाईप लाईन का कार्य कराया। महेश प्रसाद ने माह जुलाई 2012 में अपने तालाब में मत्स्य बीज संवर्धन का कार्य प्रारंभ किया। उसके द्वारा मत्स्य पालन विभाग से 25 लाख मिश्रित स्पान, 10 लाख शुध्द कतला एवं अन्य स्थानों से कामन कार्प का 28 लाख स्पान लाकर तालाब में संवर्धन का कार्य किया गया। उसने मत्स्य बीज का सवंर्धन कर 20 लाख फ्राय का विक्रय कर दिया और 4 लाख फ्राय का स्वयं के तालाब में संचयन किया। महेश प्रसाद को स्पान बीज को फ्राय बनाकर बेचने से ही एक लाख 25 हजार रु. की आय हुई। उप संचालक श्री आर.के. राय ने बताया कि महेश प्रसाद को कम समय में तेजी से बड़ी होने वाली विदेशी प्रजाति की फंगेशियस मछली पालन के लिए प्रोत्साहित किया गया। उसने छत्तीसगढ़ राज्य से फंगेशियस मछली का 10 हजार फिंगरलिंग लाकर स्वयं के तालाब में संचयन किया। महेश प्रसाद ने अपने तालाब से माह मई 2013 में 35 क्विंटल मेजर कार्प मछली तथा 25 क्विंटल फंगेशियस मछली का विक्रय किया है। इससे उसे 4 लाख 75 हजार रु. की शुध्द आय हुई है। इसमें से उसने ढाई लाख रु. की राशि बैंक का ऋण अदा करने में लगा दी है और शेष राशि मकान के मरम्मत में तथा मोटर साईकिल लेने में खर्च कर दी है। महेश प्रसाद को गत दिवस भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया है। महेश प्रसाद मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित होकर खुश है। वह कहता है कि मछली पालन के नये व्यवसाय ने उसे अब बड़ा आदमी बना दिया है। महेश प्रसाद का कहना है कि किसानों को धान की खेती के साथ ही स्वयं की भूमि पर तालाब बनाकर मत्स्य पालन करना चाहिए। इससे निश्चित रूप से अधिक आय प्राप्त होती है।
कलेक्टर श्री चन्द्रशेखर 15 से 19 जुलाई तक प्रशिक्षण अवकाश पर
कलेक्टर श्री बी. चन्द्रशेखर ने आगामी 15 से 19 जलाई 2013 तक आडिट एचं एकाउंट के प्रशिक्षण के लिए शिमला जा रहे है। इस दौरान अपर कलेक्टर श्री एच.एस. मीना कलेक्टर के प्रभार में रहेंगें। कलेक्टर के प्रशिक्षण अवकाश पर रहने के कारण 15 जुलाई की टी.एल. बैठक स्थगित कर दी गई है।
अडोरी में गोदाम सह दुकान निर्माण के लिए 5 लाख रु. मंजूर
भारत सरकार द्वारा जिले के विशेष पिछड़े क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए उपलब्ध कराई गई आई.ए.पी. योजना की राशि से कलेक्टर श्री बी. चन्द्रशेखर ने बिरसा जनपद के ग्राम अडोरी में गोदाम सह दुकान निर्माण के लिए 5 लाख रु. की मंजूरी प्रदान की है। ग्राम पंचायत अडोरी द्वारा 100 मिट्रीक टन क्षमता के गोदाम सह दुकान का निर्माण किया जायेगा। इस कार्य के लिए प्रथम किश्त के रूप में ग्राम पंचायत अडोरी को 3 लाख रु. की राशि आबंटित कर दी गई है। इस कार्य को 31 मार्च 2014 तक अनिवार्य रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिये गये है। इस कार्य में मजदूरों को शासन द्वारा निर्धारित दर पर मजदूरी का भुगतान करना होगा।
नक्शी में माध्यमिक शाला के अतिरिक्त कक्ष के शेष कार्य के लिए 4.78 लाख रु. मंजूर
कलेक्टर श्री बी. चन्द्रशेखर ने किरनापुर जनपद के ग्राम नक्शी के माध्यमिक शाला भवन के अतिरिक्त कक्ष के शेष बचे कार्य को पूर्ण कराने के लिए आई.ए.पी. योजना से 4 लाख 78 हजार रु. की मंजूरी प्रदान की है। ग्राम पंचायत नक्शी को इस कार्य के लिए प्रथम किश्त के रूप मे 2 लाख 87 हजार रु. की राशि आबंटित कर दी गई है। इस कार्य को 31 मार्च 2014 तक अनिवार्य रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिये गये है।
15 करोड़ के लक्ष्य के विरूध्द 4.25 करोड़ स्पान मत्स्य बीज का हुआ उत्पादन
उज्जैन एवं रतलाम जिले को दिया गया 45 लाख स्पान
प्रकृति ने बालाघाट जिले को मत्स्य पालन के लिए उपयुक्त वातावरण दिया है। इस जिले में बहने वाली नदियों एवं तालाबों की अधिक संख्या के कारण मत्स्य पालन का बड़े पैमाने पर व्यवसाय होता है। मत्स्य पालन के साथ ही बालाघाट जिला मत्स्य बीज उत्पादन के क्षेत्र में भी प्रदेश का अग्रणी जिला है। इस वर्ष जिले को 15 करोड़ स्पान मत्स्य बीज उत्पादन का लक्ष्य दिया गया है। उप संचालक मत्स्योद्योग श्री आर.के. राय ने बताया कि मत्स्य बीज प्रक्षेत्र मुरझड़ में मत्स्य बीज उत्पादन का कार्य किया जा रहा है। अब तक 4 करोड़ 25 लाख स्पान मत्स्य बीज का उत्पादन किया जा चुका है। बालाघाट जिले के मत्स्य पालकों को 2 करोड़ 25 लाख स्पान मत्स्य बीज का तालाबों में सर्वधन के लिए विक्रय किया जा चुका है। इसके अलावा मत्स्य बीज प्रक्षेत्र तिरोड़ी, बालाघाट, बैहर एवं गर्रा में भी मत्स्य बीज विक्रय के लिए रखा गया है। जिले के मछुवारों को मत्स्य बीज प्रदाय करने के साथ यहां से अन्य जिलों को भी मत्स्य बीज प्रदाय किया जा रहा है। अब तक उज्जैन जिले को 15 लाख तथा रतलाम जिले को 30 लाख स्पान मत्स्य बीज प्रदाय किया जा चुका है। उप संचालक श्री राय ने बताया कि मत्स्य बीज का उत्पादन करना एक कठिन एवं जटिल कार्य है। मुरझड़ प्रक्षेत्र में व्यस्क मछलियों को इंजेक्शन प्रजनन के लिए तैयार किया जाता है। वर्षा न होने पर वहां पर कृत्रिम रूप से वर्षा कराई जाती है। उपयुक्त ताप एवं वातावरण मिलने पर मछली अंडे देती है। इन अंडों को एकत्र कर उनसे बच्चे तैयार किये जाते है। मत्स्य बीज को पालीथीन के पैकेट में आक्सीजन मिलाकर पैक किया जाता है। आगामी 14 एवं 15 जुलाई को मुरझड़ प्रक्षेत्र से मत्स्य बीज का विक्रय किया जायेगा। श्री राय ने बताया कि मुरझड़ प्रक्षेत्र पर मत्स्य बीज उत्पादन का कार्य निरंतर किया जा रहा है। वर्षा अच्छी होने के कारण 15 करोड़ मत्स्य बीज उत्पादन का लक्ष्य समय पर हासिल कर लिया जायेगा। गत वर्ष जिले में रिकार्ड 13 करोड़ स्पान मत्स्य बीज का उत्पादन किया गया था। गत वर्ष की उपलब्धि को देखते हुए इस वर्ष लक्ष्य बढ़ाकर 15 करोड़ कर दिया गया है।
अनुसूचित जनजाति वर्ग के शिक्षित युवाओं के लिए टंटया भील स्वरोजगार योजना
- 175 युवाओं को स्वरोजगार के लिए सहायता देने का लक्ष्य
म.प्र. आदिवासी वित्त एवं विकास निगम द्वारा अनुसूचित जनजाति वर्ग के शिक्षित बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार उपलब्ध कराकर आत्मनिर्भर बनाने के लिए टंटया भील स्वरोजगार योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के चालू वित्तीय वर्ष 2013-14 में 175 युवाओं को सहायता देने का लक्ष्य रखा गया है। अनुसूचित जनजाति वर्ग के शिक्षित बेरोजगार युवा सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कार्यालय बालाघाट में सम्पर्क कर सहायता के लिए आवेदन कर सकते है। सहायक आयुक्त आदिवासी विकास श्री खरे ने बताया कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के शिक्षित युवक युवतियों को स्वयं का उद्योग/सेवा/व्यवसाय स्थापित कर रोजगार के अवुसर सुलभ कराने के लिए टंटया भील स्वरोजगार योजना लागू की गई है। इस योजना के अंतर्गत निगम मुख्यालय द्वारा बालाघाट जिले को 50 हजार रु. तक की लागत वाली 100 ईकाईयां लगाने का लक्ष्य दिया गया है। इसी प्रकार 50 हजार से 25 लाख रु. तक की लगात की 75 ईकाई स्थापना का लक्ष्य दिया गया है। इस योजना में हितग्राही को ईकाई लागत का 30 प्रतिशत अधिकतम 3 लाख रु. का अनुदान दिया जायेगा। इस योजना के अंतर्गत स्वयं का व्यवसाय व उद्योग लगाने के इच्छुक अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवक/युवती निर्धारित प्रारूप में आवेदन कर सकते है। आवेदक को बालाघाट जिले का मूल निवासी होना चाहिए तथा उसे अनुसूचित जनजाति वर्ग का सदस्य होना चाहिए। आवेदक को कक्षा 10 वीं पास होना चाहिए तथा उसकी आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होना चाहिए। आवेदक को किसी बैंक या संस्था का डिफाल्टर नहीं होना चाहिए। पारंपरिक शिल्पियों एवं व्यवसायियों के लिए शैक्षणिक योग्यता का बंधन नहीं है। इस योजना का लाभ लेकर अपना स्वयं का व्यवसाय प्रारंभ करने के इच्छुक युवक, युवतियां सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कार्यालय बालाघाट में अपना आवेदन प्रस्तुत कर सकते है। योजना का लाभ प्रथम आये प्रथम पाये की तर्ज पर दिया जायेगा।
आंगनवाड़ी कार्र्यकत्ता के लिए 20 जुलाई तक आवेदन पत्र आमंत्रित
एकीकृत बाल विकास परियोजना किरनापुर के अंतर्गत पांच आंगनवाड़ी केन्द्रों में कार्र्यकत्ता के रिक्त पदों की पूर्ति के लिए इच्छुक महिला उम्मीदवारों से आगामी 20 जुलाई 2013 तक आवेदन पत्र आमंत्रित किये गये है। बाल विकास परयोजना अधिकारी श्री देवेन्द्र यादव ने बताया कि किरनापुर परियोजना के अंतर्गत ग्राम रजेगांव के केन्द्र क्रमांक-03, ग्राम मंगोलीकला के केन्द्र क्रमांक-02 , ग्राम सिंगोड़ी के केन्द्र क्रमांक-02 तथा ग्राम मड़कापार के आंगनवाड़ी केन्द्र में कार्र्यकत्ता का पद का रिक्त है। इन केन्द्रों में पदस्थ कार्र्यकत्ता का चयन संविदा शाला शिक्षक वर्ग-3 के पद पर हो जाने के कारण कार्र्यकत्ता का पद रिक्त हो गया है। इन केन्द्रों में कार्र्यकत्ता के पद पर नियुक्ति के लिए महिलायें आगामी 20 जुलाई तक बाल विकास परियोजना कार्यालय किरनापुर में आवेदन कर सकती है। आवेदक महिला की आयु 01 जनवरी 2013 को 18 से 45 वर्ष के बीच होना चाहिए। आवेदक को संबंधित ग्राम की स्थाई निवासी होना चाहिए। आवेदक को 12 वीं कक्षा उत्तीर्ण होना चाहिए।
निबंध प्रतियोगिता एवं प्रश्न मंच के माध्यम से बच्चों ने जाना निर्मल भारत अभियान योजना को
भारत सरकार, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के क्षेत्रीय प्रचार निदेशालय, बालाघाट इकाई द्वारा विगत दिवस ग्राम खारा के शासकीय उच्च. मा विद्यालय एवं ग्राम हिर्री के शासकीय कन्या हाई स्कूल में निबंध प्रतियोगिता एवं प्रश्नौत्तरी के माध्यम से सरकार के निर्मल भारत अभियान योजना के बारे में जानकारी दी गई । इकाई प्रभारी श्री बीएस ध्रुव ने निर्मल भारत अभियान के उद्देश्यों पर जानकारी देते हुए कहा कि 1986 में केन्द्रीय ग्रामीण स्वच्छता कार्यक्रम शुरू किया गया है, इसका प्राथमिक उद्देश्य ग्रामीण लोगों के जीवन स्तर को सुधारना और महिलाओं को निजात तथा प्रतिष्ठा प्रदान करना है। देश के सभी ग्राम पंचायतों द्वारा निर्मल स्थिति प्राप्त करने के साथ 2022 तक देश की सभी ग्राम पंचायतों को निर्मल ग्राम बनाने का लक्ष्य रखा गया। साथ ही निर्मल भारत अभियान के माध्यम से ग्रामीण लोगो के जीवन की गुणवत्ता में गोपनीयता और गरिमा को प्रदान करने के लिये शौचालय निर्माण एवं उसे उपयोग को बढावा देना है। श्री धुव ने कहा कि बाहर में शौच करने से उसमे उपस्थित सूक्ष्म जिवाणु हवा एवं पानी के माध्यम हमारे वातावरण एवं भोज्य पदार्थ में चली जाती जिससे हैजा, पीलिया, पोलियो, हैपाटाटिस जैसे बिमारियाँ हो सकती है । शासन द्वारा ग्राम पंचायत के माध्यम से शौचालय निर्माण हेतु प्रोत्साहन राशि रूपये 4600- हितग्राही का अंशदान रूपये 900- एवं मनरेगा के माध्यम से रूपये 4400- कुल राशि 9900- में एक शौचालय निर्माण हेतु दिया जा रहा है । कार्यक्रम में स्कूली छात्र-छात्राओं को विषय पर छोटे-छोटे प्रश्न पूछे गये सही उत्तर देने वाली छात्र-छात्राओं को विभाग की ओर से तुंरत आकर्षक पुरस्कार अतिथियों द्वारा प्रदान किया गया । ग्राम हिर्री के कार्यक्रम में ब्लाँक समन्वयक श्रीमती शमा खान ने सम्बोधित कर जनपद पंचायत द्वारा निर्मल भारत अभियान योजना पर चलाई जा रही विविध कार्यक्रमों के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की गई । एवं हिर्री के जनपद सदस्य श्री नंद किशोर मोहारे एवं ग्राम के वरिष्ठ नागरिक विशेष रूप से उपस्थित थे । कार्यक्रम के अन्त में निर्मल भारत अभियान पर निबंध प्रतियोगिता के विजयी प्रतिभागी प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय को प्रमाण पत्र एवं आकर्षक पुरस्कार प्रदान किया गया । कार्यक्रम को श्रीमती गीता बनोट, अध्यापक, श्री ताराचन्द्र मस्करे, पुष्पेन्द्र पाठक, भुपेन्द्र कुमार टेम्भरे शासकीय कन्या हाई स्कूल, हिर्री के प्रभारी प्राचार्य श्री रामेश्वर इडपाचे, श्री मोहम्मद शफी अहमद, श्रीमती प्रीति पराशर, श्री राजेश कुमार तोमर एवं शैलेन्द्र कुमार बोपचे ने भी सभा को सम्बोधित कर शासन की निर्मल भारत अभियान पर जानकारी प्रदान की । कार्यक्रम में ग्राम खारा के सरपंच श्री उमा शंकर कुंमरे ने सहयोग प्रदान किया । कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण जन भी उपस्थित थे ।
24 जुलाई तक जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा का आयोजन
जनसंख्या वृध्दि पर नियंत्रण रखने तथा इसके लिए जनता में जागरूकता लाने के मकसद से विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई से जिले में जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा का आयोजन किया जा रहा है। यह पखवाड़ा 24 जुलाई तक चलेगा और इसके अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. के.के. खोसला ने बताया कि जनसंख्या स्थिरता पखवाड़े के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में रैली एवं विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर जनता को छोटा परिवार समग्र विकास, कम संतान सुखी इंसान, दो बच्चे घर में अच्छे का संदेश दिया जा रहा है। जनता को प्रेरणा योजना के अंतर्गत परिवार नियोजन के स्थाई साधन के रूप में नसबंदी आपरेशन को अपनाने तथा दो बच्चों के बीच अंतर रखने के लिए कापरटी, ओरल पिल्स, निरोध का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है। आशा कार्र्यकत्ता, ए.एन.एम. एवं एम.पी.डब्ल्यू. से कहा गया है कि वे पुरूष नसबंदी को बढ़ावा देने के लिए योग्य दम्पत्तियों से सतत सम्पर्क बनाकर रखें।


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