सरकार का मानना है कि दो साल या उससे अधिक जेल की सजा पाए सांसदों, विधायकों की सदस्यता समाप्त करने के उच्चतम न्यायालय के फैसले से किसी को बुनियादी तौर पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए, हालांकि इसके तकनीकी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद ही इस निर्णय पर ठोसरूप से कुछ कहा जा सकता है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाताओं के सवालों के जवाब में कहा कि बुनियादी तौर पर किसी को इस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए हां कुछ तकनीकी पहलुओं का अध्ययन किये जाने के बाद ही ठोसरूप से कुछ कहा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार का इस पर कयारूख है यह कहनाअभी जल्दबाजी होगी कयोंकि विधि मंत्रालय तकनीकी बारीकियों का अध्ययन कर रहा है, लेकिन पहली नजर में यह कहा जा सकता है कि बुनियादी तौर पर किसी को इस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
.jpg)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें