देश की कमान आज एक विख्यात अर्थशास्त्री के हाथों में है, लेकिन लोकसभा सचिवालय के आंकड़े दर्शाते हैं कि निचले सदन में किसानों, राजनीतिज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की तो भरमार है, मगर अर्थशास्त्री कोई नहीं है। इतना ही नहीं कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं, जिनका लोकसभा में कोई प्रतिनिधि नहीं है। निचले सदन में चार्टर्ड अकाउंटेंट, जज, औद्योगिक मजदूर, पशु पालक, निर्माता और वितरक तथा सर्जन कोई नहीं है। इन श्रेणियों के आगे शून्य दर्शाया गया है।
लोकसभा सचिवालय के आंकड़ें दर्शाते हैं कि पेशे के लिहाज से लोकसभा में ऐसे सांसदों की सबसे अधिक संख्या है, जो कृषि से जुड़े हैं। आंकड़े बताते हैं कि संसद में 221 किसान, 156 सामाजिक कार्यकर्ता, 102 राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता, 75 वकील, 88 कारोबारी, 26 शिक्षाविद, 25 किसान तथा 15 इंजीनियर हैं। उल्लेखनीय है कि लोकसभा की कुल सदस्य संख्या 545 है और इन सदस्यों के बायोडाटा के अनुसार उनके व्यवसायों को 65 श्रेणियों में बांटा गया है, जिनमें 221 सदस्यों ने खुद को कृषिविद के रूप में दर्ज कराया है।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ सांसद ने इस संबंध में बताया कि सदस्यों के नामों के आगे दर्ज उनके व्यावसायों से यह अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए कि ये सदस्य अब भी इस पेशे से जुड़े हैं, बल्कि इसका अर्थ यह है कि ये लोग इन व्यावसायों से जुड़े रहे हैं और उसके बाद राजनीति में आए हैं। यह भी अपने आप में एक रोचक तथ्य कहा जा सकता है कि देश की 15वीं लोकसभा में पहली बार सर्वाधिक 61 महिलाएं चुनाव जीत कर आयीं, लेकिन उनमें महिलाओं के मुद्दों से जुड़ी रहीं सामाजिक कार्यकर्ता एक ही हैं।
इसके अलावा लोकसभा में 13 लेखक, एक सेवानिवृत्त अध्यापक और 18 अध्यापक, सात खिलाड़ी, एक समाज सुधारक, एक वैज्ञानिक, दो धार्मिक मिशनरी से जुड़े व्यक्ति, चार प्रकाशक, आठ प्रोफेसर, एक प्रोड्यूसर और डायरेक्टर, दो पायलट, दो कवि, आठ पत्रकार, एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी, एक इंटरनेशनल सिविल सर्वेन्ट, एक फिल्म प्रोड्यूसर और छह फिल्म कलाकार, तीन राजनयिक, एक क्रिकेटर और आठ बिल्डर भी शामिल हैं।
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