झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 18 जुलाई को विश्वास मत भले ही हासिल कर लिया है लेकिन अपने सभी सहयोगियों की आकांक्षाओं को देखते हुए मंत्रिमंडल विस्तार उनके लिए एक चुनौती है। विधानसभा का मानसून सत्र 25 जुलाई से शुरू हो रहा है और उससे पहले मंत्रिमंडल का विस्तार संभव नहीं दिखाई दे रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निर्दलीय विधायकों द्वारा मंत्री पद की मांग को देखते हुए सोरेन की राह आसान नहीं है। सूत्रों के अनुसार मानसून सत्र 27 जुलाई को खत्म होगा और इसके बाद ही मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना है।
झारखंड के राज्यपाल सैयद अहमद 25 जुलाई को विधानसभा को संबोधित करेंगे। राज्य सरकार 26 जुलाई को सदन में पूरक बजट रखेगी। कांग्रेस के समर्थन वाली सरकार की इच्छा मानसून सत्र के दौरान धन्यवाद प्रस्ताव और पूरक बजट पारित करवाने की है। राज्य के 82 विधायकों में से सोरेन को 43 विधायकों का समर्थन हासिल है। इसमें 18 झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के, 13 कांग्रेस के, राजद के पांच और सात निर्दलियों या छोटी पार्टियों के विधायक हैं।
निर्दलियों में से एक बंधु तिर्की ने केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश के उस बयान का विरोध किया जिसमें उन्होंने कहा था कि निर्दलीय विधायकों को मंत्री नहीं बनाया जाएगा। तिर्की ने कहा कि उन्होंने सोरेन का समर्थन किया है न कि रमेश का। और सोरेन ने उनको मंत्री बनाने का आश्वासन दिया है। नियम के अनुसार झारखंड में मुख्यमंत्री सहित केवल 12 मंत्री बनाए जा सकते हैं। गठबंधन के साझेदारों की सहमति के अनुसार झामुमो और कांग्रेस के पांच-पांच मंत्री और दो मंत्री राजद के बनाए जाएंगे।

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