भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी में बताया है कि पिछले पांच सालों में उसे विभिन्न स्रोतों से तीन करोड़ रुपये का चंदा मिला है। यह जानकारी सोमवार को सार्वजनिक हुई। भाकपा ने यह जानकारी पिछले महीने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के इस आदेश के बाद दायर आरटीआई आवेदन के जवाब में दी है कि राजनीतिक पार्टियां भी सार्वजनिक प्राधिकरण हैं और उन्हें आरटीआई के तहत छह सप्ताह के भीतर जानकारी देना आवश्यक है।
आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष चंद्र अग्रवाल के आवेदन के जवाब में भाकपा ने कहा कि उसे वर्ष 2008 में विभिन्न स्रोतों से तीन करोड़, 13 लाख 62 हजार 341 रुपये का चंदा मिला। भाकपा से उक्त जानकारी मिलने के बाद अग्रवाल ने कहा कि पार्टी की इसके लिए सराहना की जानी चाहिए। उन्होंने छह राष्ट्रीय दलों के साथ-साथ कई अन्य दलों से भी आरटीआई आवेदन के तहत चंदों को लेकर जानकारी मांगी थी, लेकिन जवाब केवल भाकपा ने दिया।
सीआईसी ने तीन जून को दिए अपने आदेश में कहा था कि छह राष्ट्रीय राजनीतिक दल -कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भाकपा तथा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को पर्याप्त चंदा मिलता है और ये आरटीआई अधिनियम के तहत सार्वजनिक प्राधिकारण की श्रेणी में आते हैं।
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