सरकारें अक्सर नियम बनाकर उसे भूल जाने के लिए जानी जाती हैं। अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियमावली 1968 का नियम 17ए एक ऐसा ही नियम है। इस नियम के अनुसार, इन सेवाओं के प्रत्येक अधिकारी को अपने व्यक्तिगत स्तर पर 'दो शिशु परिवार' मानक का पालन करना अनिवार्य है मगर ऐसा नहीं हो रहा है। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने यह मुद्दा उठाकर नियम का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की मांग की है।
यह नियम 13 जनवरी 1995 को लागू किया गया था। इसलिए इस नियम के लागू होने के बाद प्रत्येक आईएएस, आईपीएस तथा भारतीय वन सेवा (आईएफएस) से यह अपेक्षा की जाती है कि उनके पास दो से अधिक संतानें न हों, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारों ने इन नियमों का पालन कराने के लिए कोई भी प्रयास नहीं किया है।
उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की पत्नी और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नूतन ठाकुर ने ये बातें इन तीनों सेवाओं के कैडर नियंता मंत्रालय-कार्मिक मंत्रालय (आईएएस), गृह मंत्रालय (आईपीएस) तथा वन मंत्रालय (आईएफएस) के सामने उठाया है। नूतन ने प्रत्येक अधिकारी के संबंध में सूचना एकत्र कर उन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई किए जाने की मांग की है जिन्होंने इस नियम का उल्लंघन किया है।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें