आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका 10 जुलाई को विधानसभा पर प्रदर्शन
नीमच। आज दिनाक 07.07.13 को जारी एक प्रेस नोट में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका फेडरेशन की राष्ट्रीय सचिव एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका एकता यूनियन की प्रदेश महासचिव कामरेड किशोरी वर्मा ने बताया कि आंगनबाडी कर्मियों के लगातार संघर्षो के बाद अभी तक न तो केन्द्र सरकार ने और न राज्य सरकार ने आंगनवाडी कर्मियों की सुधि ली। इसके विपरीत आई.सी.डी.एस. का हर स्तर पर निजीकरण करने का फैसला कर रही है। चाहे पोषण आहार हो या केन्द्रों का संचालन या किसी भी स्तर का आई.सी.डी.एस संबधी कार्य हो। सभी निजी हाथों, बड़े पंूजीपतियों को सरकार देने जा रही हैं। साथ ही इस कार्य के माध्यम से इन बड़े पूंजीपतियों को करोडो रुपये की छूट दी जायेगी और आंगनबाड़ी कर्मियों की स्थिति बंधुआ मजदूर से भी बुरी हो जायेगी। इन परिस्थितियों से बचने के लिये आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को एकजुट होकर सतत् संघर्ष करने होगें।
भारतीय श्रम सम्मेलन का 45वां सत्र 17-18 मई 2013 को नई दिल्ली में आयोजित हुआ, इस श्रम सम्मेलन में आंगनबाड़ी कर्मियों सहित सभी योजना कर्मियों को श्रमिक के रुप मे मान्यता देने, न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा लाभ तथा पेंशन देने की सिफारिशें की गई यह भी सिफारिश की गई कि जिन आंगनबाड़ी कर्मियों को जबरन सेवा निवृत्त्त किया गया है या जिन्हें भविष्य में सेवानिवृत्त किया जाने वाला है को एकमुश्त ग्रेच्यूटी दी जानी चाहिये। सभी ट्रेड यूनियनें, मालिकों के संगठन, राज्य सरकारें तथा श्रम मंत्रालय इन सिफारिशों से सहमत थे। परन्तु महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा इन सुझावों का विरोध किया गया। इस विरोध की हम निंदा करते है और प्रदेश में भी 45वें श्रम सम्मेलन में दिये गये सुझाव का महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा किये गये विरोध के खिलाफ 10 जुलाई 2013 को सरकार की इस निजीकरण की नीति को रोकने के लिये पूरे देश में आंगनबाड़ी कर्मी काला दिवस मनायेगें और प्रदेश की विधानसभा के समक्ष विरोध प्रदर्शन करेगें। कामरेड किशोरी ने अपील की है कि समस्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एंव सहायिका 10 जुलाई को प्रातः 10 बजे शाहजहानी पार्क भोपाल पहुंचे।
मांगें:- राज्य में सुपरवाइजर के खाली पड़े पदों को योग्य कार्यकर्ताओं से नियमित पदों पर प्रमोशन द्वारा तुरंत भरा जाये। इसी तरह सहायिकाओं को कार्यकर्ता के पद पर प्रमोशन दिया जाये तब तक नयूनतम वेतन 10,000 रुपये किये जाये। प्रमोशन का आधार योग्यता व अनुभव को शामिल करते हूये वरिष्ठता को प्राथमिकता दी जाये तथा आयु सीमा खत्म की जाय। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका दोनों को वार्षिक 10 प्रतिशत मानदेय वृद्धि दी जाये। कार्यकर्ता की तरह पंचवर्षीय मानदेय वृद्धि सहायिका को भी तुरंत लागू की जाये। सामाजिक सुरक्षा लाभ जिसमें गेच्यूटी, पेंशन, प्रोविडेन्ड फण्ड, मेडिकल सुविधायें शामिल हो सभी आंगनबाडी कर्मियों को दी जाये। जैसे केरल व तमिलनाडू की तरह मध्यप्रदेश में भी आंगनबाड़ी कर्मियों के लिये कल्याण कोष स्थापित किया जाये। जिसमें केन्द्र व राज्य सरकारों के अंशदान सुनिश्चित किये जाये। केन्द्र सरकार द्वारा आंगनबाड़ी केन्द्रों के किराये में की गई वृद्धि तुरंत प्रभाव से लागू की जाये तथा ग्रामीण केन्द्रों के किराया राशि बढ़ाकर 1500 रुपये की जाये। आंगनबाड़ी कर्मियों के लिये केन्द्र सरकार द्वारा बढ़ाया जाये, वर्दी भत्ता तुंरत लागू किया जाये। सभी आंगनबाडी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को क्रमशः ग्रेड 3 व ग्रेड 4 के सरकारी कर्मचारी के रुप मे मान्यता दी जाये। जनश्री बीमा योजना के तहत 9वीं से 12वी कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों का वजीफा एरियर सहित तुरंत भुगतान करो। मिनी आंगनबाडी केन्द्र खोलना बंद करो। सभी मिनी आंगनबाडी केन्द्रों को सम्पूर्ण आंगनबाडी केन्द्र में बदलो व मिनी आंगनबाडी कार्यकर्ताओं को पूर्ण आंगनबाडी केन्द्र में काम कर रही कार्यकर्ता के समान मानदेय व अन्य लाभ दो। ए.एन.एम., शासकीय शिक्षक, सचिव आदि की नियुक्ति में कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दो और समस्त चतुर्थ वर्ग कर्मचारी के रिक्त पदों की नियुक्ति में सहायिकाओ को प्राथमिकता दो। कार्यकर्ता सहायिकाओं के काम को स्पष्ट रुप से परिभाषित करो। कोइ भी अतिरिक्त कार्य उन्हें न दिया जाये। पंजाब की तरह प्रदेश में ग्रीष्मकालीन अवकाश लागू करो। सभी आंगनबाडी केन्द्र पर पर्याप्त मात्रा में अच्छी गुणवत्ता के पोषाहार की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करो। सेवानिवृत्ति पर कार्यकर्ता को पांच लाख रुपये एवं सहायिका को तीन लाख रुपये दो।

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