राजधानी में पिछले वर्ष 16 दिसम्बर को चलती बस में एक पैरामेडिकल की छात्रा के साथ बलात्कार और उसकी हत्या के नाबालिग आरोपी के संबंध में किशोर न्याय बोर्ड तब तक अपना फैसला नहीं सुना पाएगा, जब तक बाल अपराधी की पुनर्व्याख्या संबंधी जनता पार्टी प्रमुख सुब्रण्यणम स्वामी की याचिका का निपटारा नहीं कर देता।
मुख्य न्यायाधीश पी सदाशिवम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने स्वामी एवं अन्य की याचिकाओं की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और जनता पार्टी प्रमुख को बोर्ड को यह सूचित करने का बुधवार को निर्देश दिया कि संबंधित याचिका के निपटारे तक नाबालिग आरोपी के संबंध में कोई फैसला न सुनाया जाए।
न्यायालय ने मामले की सुनवाई के लिए 14 अगस्त की तारीख मुकर्रर की है। इससे पहले केंद्र सरकार ने इस मामले में स्वामी की याचिका के औचित्य पर कई सवाल खडे़ किये। स्वामी ने किशोर अपराध न्याय कानून में बाल अपराधी की फिर से व्याख्या करने की मांग करते हुए दलील दी है कि बाल अपराधी से जुडे़ मामले की सुनवाई उसकी उम्र के अनुरूप करने के बजाय उसकी मानसिक परिपक्वता ध्यान में रखकर की जानी चाहिए।
इसके बाद अतिरिक्त महाधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने न्यायालय को बताया कि वह लोक अभियोजक को इस बारे में किशोर न्याय बोर्ड को बताने के लिए कहेंगे कि वह अपना आदेश 14 अगस्त से पहले न सुनाए। बोर्ड पांच अगस्त को ही अपना आदेश सुनाने वाला था। न्यायालय ने यह भी कहा कि वह देखेगा कि स्वामी की याचिका कितनी विचारणीय है, क्योंकि अतिरिक्त महाधिवक्ता लूथरा ने कहा है कि सरकार और किसी व्यक्ति से संबंधित आपराधिक मामले में किसी तीसरे पक्ष का हस्तक्षेप नहीं हो सकता। बसंत विहार सामूहिक दषुकर्म मामले के छठे आरोपी की घाटना के दिन उम्र महज 17 वर्ष थी और उसकी सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड में की जा रही थी, जिसने पिछले दिनों फैसला सुरक्षित रख लिया था।
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