उत्तराखंड की विस्तृत खबर (14 जुलाई ) - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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रविवार, 14 जुलाई 2013

उत्तराखंड की विस्तृत खबर (14 जुलाई )

मुख्यमंत्री ने बुलाई सर्वदलीय बैठक
  • सभी के सुझावों को सरकार द्वारा गम्भीरता से संज्ञान लिया गया: आर्य


देहरादून, 14 जुलाई, । राज्य में आपदा से क्षतिग्रस्त सड़कों को जल्द खोलने के लिए केंद्र सरकार ने बीआरओ को तत्काल 300 करोड़ रूपए की स्वीकृति दी है। साथ ही अब सड़कों के पुनर्निर्माण के लिए 5 हेक्टेयर तक की वन भूमि के लिए फोरेस्ट क्लियरेंस लेने की जरूरत नहीं होगी। नोडल कार्यालय, लखनऊ का अधिकारी देहरादून बैठेगा। बेनाप भूमि मानकों के अंतर्गत ना आने के कारण इसका मुआवजा मुख्यमंत्री राहत कोष से दिया जाएगा। रविवार को सीएम आवास में पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए केबिनेट मंत्री यशपाल आर्य ने यह जानकारी दी। आर्य ने बताया कि उŸाराखण्ड में दैवीय आपदा के बाद राहत कार्यों पर रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई गई जिसमें कांग्रेस, भाजपा, बसपा, उक्रांद, सपा, माकपा सभी दलों के वरिष्ठ नेताओं ने प्रतिभाग किया। इनमें विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, केंद्रीय जलसंसाधन मंत्री हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, मे.ज.(से.नि.) भुवन चंद्र खण्डूड़ी, डा.रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट, सांसद प्रदीप टम्टा, तरूण विजय, महेंद्र सिंह माहरा, केबिनेट मंत्री प्रीतम सिंह पंवार, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष तीरथ सिंह रावत, बसपा के हरिदास, सपा के विनोद बड़थ्वाल, माकपा के समर भण्डारी सहित अन्य नेतागण शामिल हैं। केबिनेट मंत्री आर्य ने बताया कि सर्वदलीय बैठक में सभी सम्मानित नेतागणों ने अमूल्य सुझाव दिए जिन पर सरकार द्वारा गम्भीरता से संज्ञान लिया गया है। आपदा राहत के लिए किए गए कार्यों से भी सरकार ने अवगत कराया। विपरीत परिस्थितियां होते हुए भी राहत व बचाव कार्य तेजी से किया गया। लगभग 1 लाख 17 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया। 16 जून की शाम व 17 जून की सुबह यह घटना हुई। 17 जून को ही राज्य सरकार के हेलीकाप्टर से केदारनाथ का जायजा लिया गया। 18 जून को मौसम के थोड़ा सा अनुकूल होते ही यात्रियों को निकालने का काम शुरू कर दिया गया। राज्य का बड़ा हिस्सा दैवीय आपदा से प्रभावित हुआ है। आपदाग्रस्त क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी व संचार सुविधाएं दुबारा बहाल करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है। लोगों को अधिक से अधिक राहत पहुंचाने के लिए जहां मानकों को शिथिल किया गया है वहीं राहत राशि को भी कई गुना बढ़ाया गया है। बेनाप भूमि मानकों के अंतर्गत ना आने के कारण इसका मुआवजा मुख्यमंत्री राहत कोष से दिया जाएगा। गांवों में खाद्यान्न व अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की जा रही है। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि पूरी संवेदनशीलता से आपदा प्रभावितों को राहत पहुंचाने का काम करें। सतोपंथ झील का निरीक्षण वाडिया संस्थान के अधिकारियों द्वारा कर लिया गया है। किसी तरह के खतरे की बात नहीं है। आर्य ने बताया कि मार्गों को दुबारा खोलने को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी के तहत केंद्र में हुई बैठक में बीआरओ को तुरंत 300 करोड़ रूपए  जारी किए जाने की स्वीकृति दी गई है। 5 हैक्टेयर तक का क्षेत्र होने पर वन स्वीकृति नहीं लेनी पड़ेगी। वन मंत्रालय के लखनऊ स्थित नोडल कार्यालय का अधिकारी देहरादून में बैठेगा। नदियों के किनारे तटबंध की कार्ययोजना तैयार कर केंद्र से सहायता ली जाएगी। आर्य ने कहा कि आपदा राहत कार्यों में सभी राजनीतिक दलों से सहयोग लिया जा रहा है। वरिष्ठ नेताओं के सुझावों को गम्भीरता से लेते हुए आवश्यक कार्यवाही की जा रही है। पहले भी आपदा के तुरंत बाद मुख्यमंत्री द्वारा सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष करेंगे आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा

देहरादून, 14 जुलाई, । भारतीय जनता पार्टी के  प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत 15 जुलाई 2013 से 18 जुलाई 2013 तक जनपद-रूद्रपुर, नैनीताल, पिथौरागढ़, एवं अल्मोड़ा के आपदा प्रभावित क्षेत्रों के चार दिवसीय दौरे पर रहेंगे। भारतीय जनता पार्टी प्रदेश कार्यालय प्रमुख उर्बादत्त भट्ट ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष श्री रावत दिनांक 15 जुलाई 2013 को काशीपुर, हल्द्वानी, 16 जुलाई 2013 को पिथौरागढ़, बलवाकोट, धारचुला, 17 जुलाई 2013 को मुनस्यारी, मतकोट, 18 जुलाई 2013 को नैनीताल आदि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में भ्रमण कर प्रभावितों से मुलाकात करेंगे।

आपदा राहत कोष हेतु चेक प्रदान किया

देहरादून, 14 जुलाई, । रविवार को मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से उनके आवास पर त्र्रिवेनी अर्थमूवर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबन्ध निदेशक बी प्रभाकरन ने भेंट कर आपदा राहत कोष हेतु 31 लाख रूपये धनराशि का चेक प्रदान किया। यह धनराशि थ्रिवेनी अर्थमूवर्स प्राइवेट लिमिटेड के कर्मचारियों द्वारा एकत्रित की गयी है।
मुख्यमंत्री ने आपदा पीडितों की सहायता में सहयोग के लिये सभी का आभार व्यक्त किया है।

खत वनों में धड़ल्ले से हो रहा अवैध पातन, वन और राजस्व विभाग बने हैं उदासीन   

देहरादून, 14 जुलाई, । देहरादून जनपद के जौनसार-बावर क्षेत्र में खत वनों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। इन वनों की सुरक्षा व्यवस्था की न वन विभाग और न ही राजस्व विभाग अपनी जिम्मेदारी समझता है। इसके चलते खत वनों में बहुमूल्य वन संपदा लावारिस हालत में पड़ी है। सुरक्षा के अभाव में इन वनों में धड़ल्ले से अवैध कटान चल रहा है।  ब्रिटिश काल में क्षेत्र के वनों को तीन श्रेणियों में बांटा गया था, इसमें प्रथम श्रेणी के वनों को पूरी तरह से सरकारी संपत्ति माना गया जिनको कि आरक्षित वन कहा जाता है। द्वितीय श्रेणी के वनों को सरकारी देख-रेख में तो रखा गया, लेकिन इनके कुछ अधिकार जौनसार-बावर क्षेत्र की जनता को भी दिए गए। तृतीय श्रेणी के वन जिन्हें कि खत वन कहा जाता है इनको पूरी तरह जनता को दे दिया गया, लेकिन उनमें वन प्रकाष्ठ का उपयोग केवल घरेलू कार्यों में ही करने का उल्लेख किया गया था। 19 सितंबर 1918 में जारी किए गए आदेश द्वारा प्रथम व द्वितीय श्रेणी के वनों का अंतर हटाकर वे पूरी तरह आरक्षित माने गए और इनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी पूर्ण रूप से वन विभाग को सौंप दी गई। जबकि तृतीय श्रेणी के वनों की सुरक्षा का जिम्मा औपचारिक रूप से राजस्व विभाग को दिया गया। इन अनारक्षित वनों की देखभाल के लिए शासन स्तर से कोई धनराशि आवंटित नहीं की जाती है, जिस कारण ये वन लावारिस हालत में हैं। इन खत वनों में बेरोकटोक अवैध पातन होता रहता है। जौनसार-बावर क्षेत्र में खत वन 3898.52 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले हुए हैं। इन वनों देवदार, बांज, बुरांस, कैल आदि के पेड़ हैं। लावारिश हालत में होने के कारण इन वनों में धड़ल्ले से अवैध पातन हो रहा है। सैकड़ों पेड़ तस्करी के लिए काटे जा चुके हैं। ब्रिटिश काल में जो अधिकार जौनसार-बावर के लोगों को इन वनों के मिले थे, वे समाप्त कर दिए गए, जिस कारण स्थानीय लोग भी इन्हें अपनी संपदा नहीं मानते। माक्टी, बजऊ, नगऊ, कुनावा, चुराणी, लाखामंडल आदि क्षेत्रों में खत वनों की ज्यादा तादात में हैं। राजस्व व वन विभाग इन वनों की सुरक्षा के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार मानते हैं। किसी एक विभाग की जिम्मेदारी तय न होने के कारण खत वनों की सुरक्षा नहीं हो पा रही है।  /

बचाव कार्य में देरी से फजीहत

देहरादून, 14 जुलाई,। दैवीय आपदा के दौरान राहत बचाव कार्य देरी से होने पर राज्य सरकार की पूरी देश में फजीहत हुई। शायद यही कारण है कि अब सरकार कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं कर रही है। आपदा राहत के दौरान लापरवाह अधिकारियों पर गाज गिरनी तय है। नैनबाग में भी आपदा को लेकर बरती जा रही लापरवाही पर प्रशासन ने सख्त रवैया अपनाया है। चार कर्मचारियों को मुख्यालय में अटैच किया है। ग्रामीणों कई बार प्रशासन से इसकी शिकायत भी कर चुके हैं, जिस पर प्रशासन ने यह कदम उठाया है। मुख्य बाजार थत्यूड़ में आपदा राहत कार्याे में जल संस्थान विभाग की लापरवाही से 22 दिनों से लोगों को पेयजल संकट से जूझना पड़ा था। दैनिक जागरण ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद विभाग के दो कर्मचारियों को मुख्यालय अटैच किया गया। आपदा से क्षेत्र की पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त होने से 22 दिन बाद भी मुख्य बाजार सहित डांणा, सूक्टणा आदि गांव में जल संस्थान लोगों को पेयजल मुहैया नहीं करा सका। विभाग की इस उदासीनता पर शुक्रवार 12 जुलाई को क्षेत्र भ्रमण पर आए प्रभारी मंत्री हरक सिंह रावत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सहायक अभियंता शांति प्रसाद व अवर अभियंता गिरीश भट्ट को मुख्यालय में संबद्ध कर कर दिया है। इससे पूर्व क्षेत्र में आपदा राहत कार्याे में लापरवाही बरतने पर दो तहसील कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।

आगराखाल के पास ताछला बना नासूर

देहरादून, 14 जुलाई, । ऋषिकेश-गंगोत्री राजमार्ग पर ताछला पिछले कई सालों से बड़ी परेशानी बना है। अभी तक इस परेशानी का समाधान नहीं किया जा सका है। हर साल यहां पर भूस्खलन के चलते रोड बाधित हो जाती है, कई बार तो यहां भूस्खलन के चलते हादसे भी हो चुके हैं। वर्ष 2009 में यहां पर बस खाई में गिर गई थी, जिसमें 22 यात्रियों की मौत हुई थी। ऋषिकेष-गंगोत्री राजमार्ग पर आगरखाल के पास ताछला अब नासूर बन चुका है। हर साल बरसात में यहां पर भूस्खलन से मार्ग बाधित रहता है। बीते गुरुवार को भी ताछला में सुबह से लेकर शाम तक रोड ब्लॉक रही। इसके चलते सैंकड़ों वाहन और हजारों यात्री दिन भर ताछला में फंसे रहे। बावजूद इसके अभी तक यहां पर भूस्खलन रोकने की पुख्ता व्यवस्था नहीं की गई। यह सड़क बीआरओ के पास है, लेकिन बीआरओ हर बरसात में सिर्फ औपचारिकता निभाने के लिए सड़क सही करता है। हर साल यहां पर बरसात के दौरान वाहन दुर्घटना ग्रस्त होते रहते हैं। वर्ष 2009 में तो यहां पर बस खाई में गिर गई थी, जिसमें 22 लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल हो गए थे। लेकिन उसके बाद भी बीआरओ नहीं चेता और ताछला में हालात पहले जैसे ही बने रहे। ताछला के ऊपर से बनने वाले सड़क से भी सड़क के हाल बुरे हैं। ऊपर से पीडब्ल्यूडी नौर और बसुई आदि गांवों के लिए जाने वाली सड़क बना रहा है। इस सड़क का मलबा भी ताछला में मेन रोड पर गिरता है। जिससे सड़क क्षतिग्रस्त हो रही है। फिलहाल वहां पर जेसीबी लगाई गई है। सितंबर में बरसात थमने के बाद प्रॉपर तरीके से वहां पर ट्रीटमेंट किया जाएगा। बीआरओ को भी वहां पर तैनात रहने के लिए कहा गया है।

गंगोत्री धाम में सन्नाटे ने पांव पसारे

देहरादून, 14 जुलाई, । आपदा से गंगोत्री राजमार्ग के ध्वस्त होने का बुरा असर गंगोत्री धाम पर भी पड़ा है। गंगोत्री यात्रा शुरू हुए महीने भर का समय ही बीता कि आपदा ने यात्रा पर ब्रेक लगा दिया। यात्रा सीजन के दिनों में गुलजार रहने वाले गंगोत्री धाम में महज दो सौ लोग ही रह रहे है। वहीं वहां खाद्यान्न, ईधन जैसी समस्याओं से इन लोगों को जूझना पड़ रहा है। गंगोत्री धाम में मंदिर समिति के पंद्रह पदाधिकारी, आश्रम संचालक, वहां पूरे साल भर रहने वाले साधु संत, सफाई मजदूरों और पुलिस कर्मी ही रह गए है। इनकी संख्या में महज दो सौ से भी ज्यादा नहीं रह गई है। गंगोत्री से लौटे स्वामी राजाराम दास ने बताया कि गंगोत्री से मजदूर, होटल संचालकों समेत अन्य लोग घरों को लौट चुके है। उन्होंने बताया कि धाम में आम तौर काफी चहल पहल होती थी, लेकिन आपदा के बाद वहां सन्नाटा छाया हुआ है। गंगोत्री हाईवे बंद होने के बाद यहां जरूरी चीजों समेत ईधन की आपूर्ति बंद पड़ी है। इसके चलते यहां रह रहे लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। गंगोत्री राजमार्ग बीस से भी ज्यादा स्थानों पर बुरी तरह से क्षतिग्रस्त है, जिसे दुरूस्त करने में बीआरओ को दो महीने से भी ज्यादा समय लगेगा। ऐसे में फिलहाल गंगोत्री यात्रा के शुरू होने के आसार भी नहीं लग रहे है।

शिक्षामित्र के रूप में समायोजित किए जाने की मांग 

देहरादून, 14 जुलाई, । बेरोजगार शिक्षा आचार्य एवं अनुदेशक संगठन का स्नातक योग्यताधारी शिक्षा आचार्यों एवं अनुदेशकों को शिक्षामित्र के रूप में समायोजित करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना जारी है। शिक्षा आचार्यों का कहना है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं हो जाती आंदोलन जारी रहेगा। शिक्षा आचार्य एवं अनुदेशक संगठन द्वारा शिक्षामित्र के रूप में समायोजित करने की मांग को लेकर लैंसडाउन चौक स्थित पुराना रायपुर बस स्टैंड पर अनिश्चितकालीन धरना दिया जा रहा है। संगठन का कहना है कि सरकार द्वारा वर्ष 2008 में ईजीएस एवं एआईई सेेंटरों को बंद कर दिया गया था। ईजीएस एवं एआईई सेेंटरों को बंद किए जाने से इनमें कार्यरत 1745 शिक्षा आचार्य एवं अनुदेशक बेरोजगार हो गए थे। सरकार ने 18 जुलाई 2010 को शासनादेश जारी कर प्रथम चरण में स्नातक योग्यताधारी 1,107 शिक्षा आचार्य एवं अनुदेशकों को शिक्षामित्र के रिक्त पदों पर वरिष्ठता के आधार पर आरक्षण के प्राविधानों के अनुरूप समायोजित कर दिया था लेकिन जो शिक्षा आचार्य एवं अनुदेशक रह गए थे उन्हें अभी तक समायोजित नहीं किया गया है। वर्ष 2011-12 तक स्नातक योग्यता हासिल करने वाले 1,745 शिक्षा आचार्यों एवं अनुदेशकों को शीघ्र शिक्षामित्र के रूप में समायोजित किया जाए। शिक्षामित्र के पदों पर समायोजित न किए जाने से ईजीएस एवं एआईई सेेंटरों को बंद किए जाने से बेरोजगार हुए शिक्षा आचार्य एवं अनुदेशकों के समक्ष आजीविका का संकट पैदा हो गया है। संगठन का कहना है कि प्रदेश में शिक्षामित्रों के 1,797 पद रिक्त चल रहे हैं, लेकिन सरकार इन पदों पर शिक्षा आचार्य एवं अनुदेशकों का समायोजन नहीं कर रही है, जबकि शिक्षा आचार्य एवं अनुदेशक समायोजन की मांग को लेकर आंदोलनरहत हैं।

तीस आवास समितियों को जोड़ने के विरोध में अनशन जारी 

देहरादून, 14 जुलाई, । उत्तराखंड सहकारी आवास संघ के चुनाव से कुछ समय पहले तीस नई सहकारी आवास समितियों को संघ में जोड़ने के विरोध में स्वतंत्रता सेनानी आश्रित संगठन का अनशन जारी है। संगठन का कहना है कि चुनाव में व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नियमों व अधिनियमों को ताक पर रखकर तीस नई सहकारी आवास समितियों का निबंधन किया गया है और और बिना प्रमोटर बोर्ड बनाए सामान्य निर्चाचन के लिए रजिस्ट्रेशन के दिन ही बिना प्रक्रिया को अपनाए प्रकाशन भी करा दिया गया है। इसके विरोध में स्वतंत्रता सेनानी आश्रित संगठन के कार्यकर्ताओं द्वारा प्रदेश अध्यक्ष ललित पंत के नेतृत्व में गांधी पार्क के मुख्य गेट पर अनशन और धरना दिया जा रहा है। संगठन का कहना है कि आगामी 15 व 16 जुलाई को संघ के चुनाव होने हैं, व्यक्ति विशेष का कब्जा कराने के उद्देश्य से सहकारिता विभाग के अधिकारियों द्वारा अधिनियम व नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। इस चुनाव में कई प्रतिनिधियों को आमंत्रित नहीं किया गया है। व्यक्ति विशेष की खातिर तमाम नियमों को ताक पर रखकर काम किया जा रहा है। सहकारिता विभाग असंवैधानिक रूप से निबंधक सहकारिता समितियां उत्तराखंड के निर्गत निर्वाचन आदेश छह फरवरी की घोषणा के बाद 30 सहकारी आवास समितियों का मात्र दो दिन निबंधन किया गया। निबंधित समितियों को निबंधन के दिन ही सामान्य निर्वाचन हेतु बिना प्रक्रिया अपनाये प्रकाशन कराकर अवैधानिक रूप से 12 व 13 अप्रैल को सामान्य निर्वाचन करा दिया गया और उत्तराखंड सहकारी आवास संघ लिमिटेड के निर्वाचन को प्रभावित एवं संघ में कब्जा करने के उद्देश्य से अवैधानिक रूप से डेलीगेट भी निर्वाचित कर दिये गए। बार-बार आपत्तियां करने के बाद भी उन्हें अनसुना कर दिया गया, इस संघ में कई प्रतिनिधि उत्तर प्रदेश के समय से वर्षों से जुडे हुए हैं, उन्हंे निर्वाचन में शामिल नहीं किया जा रहा है, जिससे प्रतिनिधियों में रोष व्याप्त है। कई बार सहकारिता मंत्री को अवगत कराये जाने के बाद आज तक इस दिशा में कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है, जिससे आंदोलन करने के लिए विवश होना पड़ रहा है। धरने में राजीव कोठारी, भद्र सिंह नेगी, पृथ्वीपाल सिंह रावत, नरेश शर्मा, मुकेश नारायण शर्मा, अनिल कन्नौजिया, वीरेन्द्र कुमार अग्रवाल, ओमवती चौहान, उमेश सिसौदिया, निर्मल पंत, अरूण कुमार, वीरेन्द्र सिंह आदि शामिल हुए। 

पीआरडी जवानों का अलग ढांचा बनाया जाए

देहरादून, 14 जुलाई, । प्रांतीय रक्षक दल हित संगठन का अपनी मांगों को लेकर धरना जारी है। संगठन का कहना है कि पीआरडी जवानों का अलग ढांचा बनाया जाए और उन्हें नियमित किया जाए। प्रांतीय रक्षक दल हित संगठन द्वारा अपनी मांगों को लेकर लैंसडाउन चौक स्थित पुराना रायपुर बस अड्डे पर धरना दिया जा रहा है। संगठन का कहना है कि पीआरडी एक्ट में संशोधन करते हुए पीआरडी जवानों को राज्य कर्मचारी की भांति नियमित किया जाए। पीआरडी जवानों का अलग ढांचा तैयार कर युवा कल्याण विभाग से अलग किया जाए और कंपनी एवं बटालियन बनाई जाए। संगठन का कहना है कि पीआरडी जवानों की ड्यूटी के दौरान मृत्यु की स्थिति में बीमा लगभग दस लाख रुपये किया जाए। पीआरडी जवान की मृत्यु होने पर मृतक आश्रित को नौकरी दी जाए, जिससे उसके परिवार का भरण-पोषण हो सके। पीआरडी जवानों की भर्ती एवं सेवानिवृत्ति की आयु एवं शैक्षिक योग्यता निश्चित होनी चाहिए। पीआरडी जवान को सेवानिवृत्ति के दौरान एकमुश्त धनराशि दी जाए और विदायी सम्मान के साथ दी जाए। संगठन का कहना है कि पीआरडी विभाग में केवल उत्तराखंड के मूलनिवासियों को ही वरीयता दी जाए। संगठन का कहना है कि पीआरडी जवान मैदानी क्षेत्रों से लेकर सुदूरवर्ती पहाड़ी क्षेत्रों तक विभिन्न विभागों में अपनी सेवा दे रहे हैं। पीआरडी जवान बगैर सुविधाओं के अधिक समय देकर कार्य कर रहे हैं। धरने में राजेंद्र मेहरा, रीना पारल, शीशराम, पप्पू सिंह, सुनील सजवाण, राकेश मिश्रा, सतेंद्र नौगाईं, शीशराम, शारदा देवी, कमला रावत, अंजना वालिया, वीर सिंह रावत आदि शामिल रहे।




(राजेन्द्र जोशी)

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