उत्तराखंड की विस्तृत खबर (15 जुलाई ) - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 15 जुलाई 2013

उत्तराखंड की विस्तृत खबर (15 जुलाई )

मखमली बुग्यालों के लिए अभिशाप साबित हो रही है जंगली पालक
  • खरास नाम इस घास ने चाट दिए है कई हिमालयी बुग्याल


देहरादून, 15 जुलाई (मनोज इष्टवाल)। लेंटेना झाडी और गाजर घास ने जहाँ मध्य हिमालयी क्षेत्र के सभी जंगलों व खेतों चारागाहों को तबाह कर दिया है ठीक उसी प्रकार खरास नामक घास ने हिमालयी क्षेत्र के हरे भरे बुग्यालों में तेजी से अपना अतिक्रमण करते हुए इस क्षेत्र के बुग्यालों को अपनी जद में लेकर तबाही मचानी शुरू कर दी है। उत्तरकाशी जनपद के पर्वत क्षेत्र के उन बुग्यालों में यह घास बड़ी तेजी से फ़ैल रही है जहाँ ट्रैकिंग का स्वर्ग कहा जाता है। स्थानीय भाषा में खरास नाम से प्रसिद्ध घास को कोई जंगली घास कहते हैं तो कोई रोमिंस के नाम से इसे पुकारते हैं। यह घास कहाँ से आई और कब आई इसका ठीक ठीक पता तो नहीं लग पाया है लेकिन भारत वर्ष और उत्तराखंड के सीमान्त गॉव ओसला, गंगाड, पवाणी, डाटमीर आदि के बुजुर्ग ग्रामीणों ने चिंता जताते हुए कहा कि यह घास हाल के कुछ वर्षों से  ही फैलनी शुरू हुई है जिसे न तो भेडालों की भेड बकरियां ही खाती हैं और न ही यह अपने आस पास किसी वनस्पति या औषधीय पादप को ही उगने दे रही है। वहीँ हर-की-दून क्षेत्र में गोबिंद वन्य पशु विहार राष्ट्रीय पार्क के वन रक्षक अमी चंद राणा का कहना है कि यह घास जितनी तेजी से फैलकर बुग्यालों को नष्ट कर रही है उतनी ही तेजी से इस क्षेत्र के वनस्पतीय पादपों का नाश भी कर रही है। यह घास जिस जगह भी पनप रही है महीनों में ही बड़े बड़े मैदानों में फैलकर बुग्याल में खिल रहे विभिन्न प्रजाति के सैकड़ों फूलों का भी विनाश कर रही है। वन रक्षक अमी चंद हैरान होते हुए कहते हैं कि उन्होंने कई दिन मेहनत कर जहाँ-जहाँ से भी यह घास उखाड़ कर साफ़ की है उसकी बगल में फिर से इस घास के मैदान लहलहाने लगे हैं जोकि चिंता का विषय है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सम्बंधित विभाग या उत्तराखंड की सरकार ने जल्दी ही इस घास के लिए उपाय नहीं ढूंढें तो आगामी १० वर्षों में हम बुग्यालों को देखने के लिए तरसने लगेंगे साथ ही दुनिया भर के पर्यटक इस क्षेत्र से मुंह मोड़ लेंगे। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि हो  न हो गाजर घास और लेंटेना की तरह इस घास को भी विमानों द्वारा विदेशियों ने यहाँ फिंकवाया हो ताकि हमारे देश की बहुमूल्य वन सम्पदा और औषधीय पादपों को नष्ट किया जा सके। देखा जाय तो पर्वत क्षेत्र के लोगों की यह चिंता जायज लगती है। क्योंकि खारस/जंगली पालक/रोमिंस के नामक यह घास जिस तेजी के साथ फ़ैल रही है और हरे भरे मखमली बुग्यालों को नुकशान पहुंचा रही है यदि उस पर शीघ्रता से कोई योजना बनाकार कार्य नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं रह जाएगा जब हम प्रदेश की इस बहुमूल्य धरा में खिले सैकड़ों प्रजाति के फूलों,वन औषधीयो और धरा के सौन्दर्यामयी रूप से महफूज हो जायेंगे.

मुआवजा नहीं आर्थिक मदद होगी, लापता लोगों की खोजबीन जारी रहेगी: मुख्यमंत्री

देहरादून, 15 जुलाई, । केंद्र सरकार आपदा के बाद उŸाराखण्ड में इन्फ्रास्ट्रक्चर के पुनर्विकास के लिए काफी गम्भीर है। केंद्र स्तर पर विभिन्न मंत्रालयों से संबंधित मामलों की स्वीकृति शीघ्र हो सके इसके लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट मंत्रियों की समिति बनाई गई है। मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा स्वयं ग्राम प्रधानों को फोन कर वेरिफाई करेंगें कि गांवों में राहत सामग्री पहुंच रही है या नहीं। लापता व्यक्तियों के परिजनों को राहत राशि देना प्रारम्भ किया जा रहा है परंतु उनकी खोज लगातार जारी रहेगी। सोमवार को सचिवालय में केंद्रीय नियोजन व संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की उपस्थिति में आपदा राहत कार्यों पर अधिकारियों की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में बताया गया कि उŸाराखण्ड में आई दैवीय आपदा में कुल लापता व्यक्तियों की संख्या अभी तक 5748 है। इसमें उŸाराखण्ड के लापता 924 व्यक्ति शामिल हैं। दूसरे राज्यों से निरंतर सूचना मिलने के कारण इसमें समय के साथ-साथ कुछ संख्या घट बढ़ भी सकती है। लापता व्यक्तियों के परिजनों को राहत राशि उपलब्ध करवाने की प्रक्रिया प्रारम्भ की जा रही है। इन्हें केंद्रीय आपदा राहत कोष से 1.5 लाख, प्रधानमंत्री राहत कोष से 2 लाख रूपए दिए जाएंगे। साथ ही उŸाराखण्ड के निवासी को राज्य आपदा राहत कोष से 1.5 लाख रूपए दिए जाएंगे। इस प्रकार दैवीय आपदा में लापता हुए उŸाराखण्ड के लापता व्यक्ति के परिजन को कुल 5 लाख रूपए जबकि दूसरे राज्यों के लापता व्यक्तियों के परिजनों को केंद्र से मिलने वाले 3.5 लाख रूपए के साथ ही संबंधित राज्य द्वारा अनुमन्य राशि मिलेगी। मुख्यमंत्री ने ग्राम प्रधानों के दूरभाष नम्बरों सहित सूची उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए ताकि गांवों में राहत सामग्री पहुंच रही है या नहीं, इसका वेरिफिकेशन ग्राउन्ड लेवल से किया जा सके। प्रदेश के आपदा ग्रस्त गांवों के पुनर्वास के लिए जल्द प्रस्ताव बनाया जाए। लगभग 240 गांवो का पुनर्वास किया जाना है। गांवों के पुनर्वास में निजी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जाएगा। इसके लिए विस्तृत गाईडलाईन तैयार की जाएगी। राज्य सरकार मॉडल विलेज बनाएगी जिसमें भूकम्परोधी तकनीक का उपयोग किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री को जानकारी दी गई कि आपदा के बाद 1 लाख 10 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। गांवो में पेयजल, बिजली, सम्पर्क मार्गों को पुनः बहाल करने का काम युद्धस्तर पर किया जा रहा है। केदारनाथ के वैकल्पिक मार्ग की सम्भावना देखी जा रही है। जिन गांवों में  बिजली सुचारू नहीं हो पाई है वहां के लिए 20 हजार सोलर लैम्प भेजे गए हैं। बीआरओ को सड़कों के पुनर्निर्माण के लिए 300 करोड़ रूपए केंद्र से तत्काल स्वीकृत किए गए हैं। पुनर्निर्माण कार्यों के लिए विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों ने विशेष योजनाएं बनाई हैं। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि खाद्य सुरक्षा बिल लागू होने से राज्य की 1 करोड़ की आबादी मे ंसे 60 लाख लोगों को फायदा होगा। बीपीएल व अन्त्योदय श्रेणी के शतप्रतिशत लोग इसके अंतर्गत आएंगे। जबकि एपीएल से लोगों को लाभान्वित करने के लिए विभिन्न श्रेणियंा बनाई गई है। इनका चिन्हिकरण ग्रामसभाओं की बैठक में होगा। न्याय पंचायत स्तर पर अनज के स्टोरेज की सुविधा विकसित की जाएगी। बैठक में मुख्य सचिव सुभाष कुमार, प्रमुख सचिव राकेश शर्मा, श्रीमती राधा रतूड़ी सचिव भाष्करानंद सहित केंद्र व राज्य के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

आपदा प्रभावितो को मिल रहे फटे कपड़े, सड़ा खाना

देहरादून, 15 जुलाई, । आपदा से प्रभावित परिवारों तक पहुंचने वाली राहत अब प्रभावितों का मजाक उड़ाने लगी है। पुरोला में प्रभावितों के लिए राहत के नाम पर फटे पुराने कपड़ों से भरे बोरे और सड़ चुका खाद्यान्न पहुंचाया गया। सामान को देखकर प्रभावित सकते में है। जून में आई आपदा से यमुना घाटी में भी काफी नुकसान हुआ। प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए देश विदेश से कई हाथ आगे आ रहे है। लेकिन इन दानदाताओं में से कईयों ने अपनी राहत देकर प्रभावितों का मजाक उड़ाया है। पुरोला में आपदा राहत के नाम पर दर्जनों बोरों में भरकर पुराने फटे कपड़े भेजे गये है। तो खाद्यान्न के नाम पर सड़ चुकी ब्रेड रस और खराब पानी की बोतलें भेजी गई है। वहीं बड़ी मात्रा में यहां पहुंचा राहत का सामान प्रशासन की भी गले की हड्डी बन चुका है। प्रभावित परिवारों ने इस राहत को स्वीकारने से साफ तौर पर मना कर दिया है। जिसके बाद अब प्रशासन के लिए यह राहत का सामान कबाड़ बनकर रह गया है। आपदा प्रभावित मोरी के लिवाड़ी, फिताड़ी, राला, कास्ला समेत अन्य गांवों में लोगों को आपदा का सबसे ज्यादा नुकसान सहना पड़ा। संपर्क मार्गाे के ध्वस्त होने के बाद यहां खाद्यान्न समेत जरूरी चीजों का संकट गहरा रहा है। ऐसे में राहत के नाम पर किया जा रहा यह मजाक प्रभावितों के गले नहीं उतर रहा।

आज से मिलेगा आपदा पीड़ितों को मुआवजा

देहरादून, 15 जुलाई, । राज्य सरकार मंगलवार से आपदा प्रभावित लोगों को मुआवजा देना शुरु करेगी, वहीं अभी तक इस आपदा में कितने तीर्थयात्री और कितने राज्यवासी मारे गए इसकी वास्तविक संख्या सरकार के पास नहीं है, इतन ही नहीं इस आपदा से हुई आर्थिक क्षति का अभी तक आंकलन का काम पूरा नहीं हुआ है। 15 जुलाई तक अपनी पूर्व घोषणा के अनुसार इस आपदा में लापता लोग अपने घर वापस नहीं पहुंचते तो सरकार उन्हंे मृत मान लेगी और इसके लिए परिजनों द्वारा एक शपथ पत्र देकर सरकार से ये मुआवजा लिया जा सकता है। मृतकांें के लिए मुआवजे के तौर पर सरकार ने पांच लाख रुपये दिये जाना निश्चित किया है केंद्र और राज्य सरकार मिलकर मृतकों के परिजनों को पांच लाख रुपये मुआवजे के तौर पर देगें। लापता लोगों की संख्या बढने का क्रम अभी भी जारी है इस आपदा मे अब तक कुल 5750 लोगों के लापता होने के बारे में सरकार मान रही है वहीं उत्तराखंड के भी 925 लोग शामिल है। उत्तराखंड में लापता लोगों का यह आंकडा 400 से शुरु होकर 925 तक पहुंच गया है जबकि अभी भी बड़ी संख्या में लोग अपने परिजनों की तलाश में मारे -मारे फिर रहें हैं। जिले के सभी 13 जनपदों के जिलाधिकारियों को राज्य सरकार द्वारा 92 करोड़ की राशि उपलब्ध करा दी गयी है, साथ ही जिलाधिकारियों द्वारा मृतकों के परिजनों को दिए जाने के निर्देश के साथ ही इसके लिए जरुरी औपारिकताए करने के निर्देश भी दिए है। यह मुआवजा राशि उचित लोगों तक पहुंच पाये इसके लिए गहन जांच पडताल के बाद भी मुआवजा राशि देने का प्रावधान किया गया है। जिलाध्किारी हर रोज जितने भी लोगों को यह मुआवजा वितरित करेंगे उसकी रिर्पोट शासन को भेजनी होगी। सरकार को न केवल मृतकों और लापता लोगों को ही मुआवजा नहीं देना है, बल्कि सरकार द्वारा की गयी घोषणा के अनुसार सरकार को सभी उन पीड़ितों को भी मुआवजा देना है, जिनके घर, मकान, दुकान, होटल, ढाबे, वाहन तथा कृषि भूमि को को नुकसान हुआ है। सरकार ने घोषणा की है और मानक तैयार किये हैं। मंगलवार से सरकार इस घोषणा पर अमल करने जा रही है मृतकों और लापता लोगों को कल से मुआवजा देना शुरु कर दिया जायेगा।

विश्वकर्मा ने संभाला आयुध निर्माणी के महाप्रबंध का कार्यभार

देहरादून, 15 जुलाई, । आयुध निर्माणी के नये महाप्रबंधक के रूप में सीएस विश्वकर्मा ने सोमवार को कार्यभार ग्रहण कर लिया है। पूर्व महाप्रबंधक आर राजशेखरन के स्थानान्तरण के बाद विश्वकर्मा को यहां भेजा गया है। इससे पूर्व विश्कर्मा जीसीएफ जबलपुर में महाप्रबंधक के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने जीसीएफ में 155 एमएम गन के विकास में सक्रिय भूमिका निभाई। विश्वकर्मा कानपुर, जबलपुर, तिरची, अम्बरनाथ, आदि स्थानों पर कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। देहरादून पहुंचकर विश्वकर्मा ने सोमवार 15 जुलाई 2013 को प्रभारी अधिकारी व अपर महाप्रबंधक आर एस ठाकुर से आयुध निर्माणी व निर्माणी एस्टेट का कार्यभार ग्रहण किया। विश्वकर्मा पूर्व में भी यहां प्रभारी अधिकारी और अपर महाप्रबंधक रह चुके हैं। उस समय उन्होंने निर्माणी के आधुनिकीकरण की नींव रखी थी और उसे दिशा प्रदान की। 

दो मंजिला इमारत पर चढ़ी महिला ने किया आत्म हत्या का प्रयास

देहरादून, 15 जुलाई, । एक महिला द्वारा पुलिस और प्रशासन पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए घण्टाघर के पास दो मंजिला भवन पर चढ़कर आत्दाह का प्रयास किया गया। पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया है। एसएसपी केवल खुराना ने इस मामले की जांच के आदेश दिए और कहा कि यदि महिला दोषी पाई गई तो उसके खिलाफ आत्म हत्या की कोशिश का मुकदमा दर्ज किया जाएगा। सोमवार को चकराता रोड़ गांधी नगर में रहने वाली महिला निर्मला वर्मा दोपहर करीब साढ़े बारह बजे घण्टाघर स्थित एक दो मंजिला भवन पर मिट्टी के तेल की बोतल हाथ में लेकर आत्म हत्या करने जा पहुंची। इससे पहले की वह कोई कदम उठाती, वहां मौजूद लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने महिला को हिरासत में ले लिया है। पुलिस इस महिला को एक रिक्शे में बिठाकर कोतवाली ले जाने लगी तो महिला ने ऑटो में बैठने का विरोध किया। आत्म हत्या की कोशिश करने वाली महिला का आरोप था कि उसके घर की दीवार को जबरन गिरा दिया गया है, जिसमें क्षेत्र की पार्षद शारदा गुप्ता और अन्य पुलिस कर्मियों की मिली भगत है। वहीं क्षेत्र की पार्षद शारदा गुप्ता का कहना है कि जिस दीवार की बात की जा रही है, इसको लेकर उसके देवर रोशन का विवाद न्यायालय में चल रहा था, रोशन न्यायालय से मुकदमा जीत गया है और उनके पास विवादित दीवार के आदेश भी हैं। पार्षद ने कहा कि वह गांधीन नगर में एक नाले का निर्माण करा रही है, लेकिन रोशन लाल ने वहां जगह खाली करने से मना कर दिया है, जिस कारण निर्माण कार्य रोक दिया गया है। उधर एसएसपी केवल खुराना ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं, उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में कोई भी दोषी होगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी। 

आपदा के कारण सीजनल सब्जियां ऊंचे दामो पर, खेतों में ही हो रही फसल बबार्द

देहरादून, 15 जुलाई, । आपदा के बाद बंद पड़े संपर्क मार्गाे ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। बीते जून भारी बारिश से भागीरथी घाटी में आलू खेतों में ही सड़ गए, अन्य हिस्सों में तैयार सीजनल सब्जियां भी संपर्क मार्ग बंद होने से बाजार नहीं पहुंचा पा रही है। ऐसे में किसानों की महीनों की मेहनत मिट्टी में मिल रही है। पिछली महीने हुई भारी बारिश में भागीरथी घाटी में आलू इस बार खेतों में ही सड़ गया। कारण कुछ आलू तो जमीन में ही खराब हो गया जबकि कुछ आलू बाजार न पहुंच पाने के कारण बर्बाद हो गया। क्षेत्र के बड़े हिस्से में आलू की बंपर खेती की जाती है। अमूमन अक्टूबर में निकलने वाले आलू की फसल की बुआई के साथ ही किसान आषाढ़ी आलू की बुआई भी बड़े पैमाने में करते हैं। आषाढ़ी आलू की फसल जून आखिर तक तैयार हो जाती है। खुदाई जुलाई के दूसरे सप्ताह तक पूरी हो जाती है। खुदाई के साथ ही इस फसल को बाजार तक पहुंचाना भी जरूरी होता हैं, जो क्षतिग्रस्त मार्ग के कारण संभव नहीं था। यह आलू की किस्म बरसाती मौसम के चलते तेजी से सड़ती है। काश्तकार मोहन सिंह, विजय सिंह, रामचंद्र सिंह बताते है कि आषाढ़ी आलू की खेती आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है ऐसे में इसके सड़ने से किसानों को काफी नुकसान हुआ है। इस फसल से बच्चों की स्कूल फीस तथा अन्य जरूरी संसाधन जुटाने में मदद मिलती है। यमुना घाटी में टमाटर की फसल आपदा की भेंट चढ़ गई। नौगांव क्षेत्र के जटा, पलेठा, बगासू, पौंटी, नौगांव, नैणी, किमी तथा पुरोला, नेत्री, खाबली सेरा, सुनारा छानी, बिनाई गाड़, बिंगसी छानी टमाटर की खेती करने वाले गांवों में बारिश के चलते बड़ी मात्रा में टमाटर की फसल खराब हो गई। आलम यह है कि बंपर टमाटर की पैदावार वाले इस क्षेत्र में ही लोगों को चालीस से पचास रुपये प्रति किलो तक टमाटर खरीदने पड़ रहे है। सके साथ ही जिले के अन्य हिस्सों में संपर्क मार्ग बंद होने से भिंडी, मूली, गोभी जैसी सीजनल सब्जियों को भी बाजार तक पहुंचाना मुश्किल हो गया है। लिहाजा काश्तकार इन फसलों को खेतों में ही खराब होते देखने को मजबूर हैं।

स्वतंत्रता सेनानी आश्रित संगठन का आमरण अनशन जारी 

देहरादून, 15 जुलाई, । उत्तराखंड सहकारी आवास संघ के चुनाव से ठीक पहले तीस नई सहकारी आवास समितियों को संघ में जोड़ने के विरोध में स्वतंत्रता सेनानी आश्रित संगठन का आमरण अनशन जारी है। संगठन का कहना है कि चुनाव में व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नियमों व अधिनियमों को ताक पर रखकर तीस नई सहकारी आवास समितियों का निबंधन किया गया है और और बिना प्रमोटर बोर्ड बनाए सामान्य निर्चाचन के लिए रजिस्ट्रेशन के दिन ही बिना प्रक्रिया को अपनाए प्रकाशन भी करा दिया गया है। स्वतंत्रता सेनानी आश्रित संगठन के कार्यकर्ताओं द्वारा प्रदेश अध्यक्ष ललित पंत के नेतृत्व में गांधी पार्क के मुख्य गेट पर आमरण अनशन और धरना दिया जा रहा है। संगठन का कहना है कि आगामी 15 व 16 जुलाई को संघ के चुनाव होने हैं, व्यक्ति विशेष का कब्जा कराने के उद्देश्य से सहकारिता विभाग के अधिकारियों द्वारा अधिनियम व नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। इस चुनाव में कई प्रतिनिधियों को आमंत्रित नहीं किया गया है। व्यक्ति विशेष की खातिर तमाम नियमों को ताक पर रखकर काम किया जा रहा है। सहकारिता विभाग असंवैधानिक रूप से निबंधक सहकारिता समितियां उत्तराखंड के निर्गत निर्वाचन आदेश छह फरवरी की घोषणा के बाद 30 सहकारी आवास समितियों का मात्र दो दिन निबंधन किया गया। निबंधित समितियों को निबंधन के दिन ही सामान्य निर्वाचन हेतु बिना प्रक्रिया अपनाये प्रकाशन कराकर अवैधानिक रूप से 12 व 13 अप्रैल को सामान्य निर्वाचन करा दिया गया और उत्तराखंड सहकारी आवास संघ लिमिटेड के निर्वाचन को प्रभावित एवं संघ में कब्जा करने के उद्देश्य से अवैधानिक रूप से डेलीगेट भी निर्वाचित कर दिये गए। बार-बार आपत्तियां करने के बाद भी उन्हें अनसुना कर दिया गया, इस संघ में कई प्रतिनिधि उत्तर प्रदेश के समय से वर्षों से जुडे हुए हैं, उन्हंे निर्वाचन में शामिल नहीं किया जा रहा है, जिससे प्रतिनिधियों में रोष व्याप्त है। कई बार सहकारिता मंत्री को अवगत कराये जाने के बाद आज तक इस दिशा में कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है, जिससे आंदोलन करने के लिए विवश होना पड़ रहा है। धरने में राजीव कोठारी, भद्र सिंह नेगी, पृथ्वीपाल सिंह रावत, नरेश शर्मा, मुकेश नारायण शर्मा, अनिल कन्नौजिया, वीरेन्द्र कुमार अग्रवाल, ओमवती चौहान, उमेश सिसौदिया, निर्मल पंत, अरूण कुमार, वीरेन्द्र सिंह आदि शामिल हुए।





(राजेन्द्र जोशी)

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