जनता त्रस्त, मंत्री हवाई दौरों में मस्त
देहरादून, 17 जुलाई। जहां एक ओर आपदा प्रभावित क्षेत्रों में महिलाएं प्रसव पीड़ा से तड़प रही हैं, लोगों के पास खाने के लिए अन्न नहीं है, आने-जाने के लिए मार्ग इतने क्षतिग्रस्त हो चुके हैं कि इनमें पैदल चलना भी जान को जोखिम में डालना है, ऐसे में प्रदेश सरकार के मंत्री अपनी छवि चमकाने के लिए हैलीप्टरों का सहारा लेकर आपदा ग्रस्त क्षेत्रों के लोगों को मुंह चिढ़ा रहे हैं। आपदा का आज एक माह पूरा हो गया, आज तक पहाड़ के दुर्गम इलाकों में न तो खाद्यान्न ही पहुंच पाया है और न ही स्वास्थ्य सुविधाएं। देहरादून सचिवालय के वातानुकूलित कमरों में बैठकर मुख्यमंत्री और मंत्री आपदा राहत के नाम पर भले ही बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, लेकिन पहाड़ों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। आपदा के बाद अपनी जान बचा चुके स्कूली बच्चे अपने स्कूलों को ढूंढ रहे हैं, तो अध्यापक छात्रों को। ऐसी स्थिति में पहाड़ों पर पढ़ाई भी भगवान भरोसे ही है। उल्लेखनीय है कि भले ही आज तक उत्तराखण्ड सरकार राज्य में आए महा जलप्रलय में बचाव व राहत का कार्य पूरा न कर पाई हो, लेकिन सरकार के मंत्री हवाई दौरों का रिकार्ड बनाने में जुटे हैं, ऐसे ही एक मंत्री ने गुप्तकाशी में नियम विरूद्ध एक दिन पूर्व केदारधाम में जबरन अपना हैलीकॉप्टर उतरवाया और बुधवार को दिल्ली से आई एक मीडिया कर्मी को गुप्तकाशी से हैलीकॉप्टर के द्वारा देहरादून तक पहंुचवाया। वहीं तीन दिन से गुप्तकाशी हैलीपैड़ पर मौजूद रामबाड़ा के दर्जनों वाशिंदे गौरीकुंड जाने की आस लगाये बैठें हैं, लेकिन उन्हें हैलीकॉप्टर नसीब नहीं हो पा रहा है। जिस कारण उनके परिवारों की गर्भवती महिलाओं के सामने भी जीवन-मरण का संकट आ खड़ा हुआ है। इतना ही नहीं गुप्तकाशी के लोगों के मन में इस बात को लेकर भी काफी नाराजगी है कि जब वह प्रशासन से खाद्य सामग्री मांगने के लिए जाते हैं तो उनसे पहले पूछा जाता है कि उनके घर का कौन सा सदस्य इस आपदा मंे मरा है। प्रदेश में दैवीय आपदा क्या आई, सरकार के कुछ नेताओं को तो मानो हवाई सैर सपाटा करने का चस्का लग गया। पहाड़ांे में आज भी हजारों वाशिंदे खाने के एक-एक दाने के लिए तरस रहे हैं। जहां हवाई मार्ग से खाद्य सामग्री पहंुचाने के लिए भले ही सरकार आगे न आ रही हो लेकिन गुप्तकाशी में इन दिनों प्रदेश के एक मंत्री जमकर हवाई सैर सपाटा करने में लगे हुए हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के लिए हेलीकाप्टर की व्यवस्था की गई है, लेकिन गुप्तकाशी में एक हेलीकॉप्टर में सरकारी मशीनरी के बजाए एक मंत्री हवाई सैर करने में लगे हुए हैं। उन्हें इन दिनों मीडिया में छाने का चस्का सा लग गया है। सूत्रों का कहना है कि सोमवार की शाम मंत्री जी ने नियम विरूद्ध तरीके से हैलीकॉप्टर केदारधाम में उतरवाया और उसके अगले दिन उसे गुप्तकाशी ले जाया गया। गुप्तकाशी में सड़क मार्ग जहां खराब हालत में हैं वहीं आज तक सरकार इस इलाके में बिजली तक बहाल नहीं करा पाई है। गुप्तकाशी के आसपास के गांवों में खाद्यान्न व दवाईयों का एक बड़ा संकट आकर खड़ा हो रखा है। बताया जा रहा है कि रामबाड़ा गांव के 10-12 ग्रामीण पिछले तीन दिन से गुप्तकाशी हैलीपैड पर गौरीकुंड जाने के लिए राह देख रहे हैं लेकिन इन्हें बहाना बनाकर हैलीकॉप्टर से गौरीकुंड तक नहीं ले जाया जा रहा है। गुप्तकाशी का हाल देखकर साफ तौर पर झलक रहा है कि वहां प्रशासन नाम की कोई चीज नहीं है और सब कुछ भगवान भरोंसे चल रहा है। गुप्तकाशी के लोगों मंे इस बात को लेकर भी काफी नाराजगी है कि जब वह खाद्यान्न लेने के लिए प्रशासन के पास जाते हैं तो उनसे पूछा जाता है कि उनके घर का कौन व्यक्ति मरा है उसके बाद ही उसे राशन दिया जाएंगा। सरकार सचिवालय में बैठकर दावे कर रही है कि पहाड़ों में खाद्यान्न सामग्री पहंुचाई जा रही है और प्रशासनिक अमला सही ढं़ग से काम कर रहा है। सरकार ने ग्राम प्रधानों से जानकारी लेने की पहल की है लेकिन जिस तरह से बर्बाद हो चुके पहाड़ के हजारों बाशिंदे खाने-पीने के सामान के लिए तरस रहे हैं उससे साफ नजर आ रहा है कि सरकार सिर्फ मुआवजा राशि देकर अपना पिंड़ इस आपदा से छुड़ाने में लगी हुई है। सवाल उठ रहे हैं आखिरकार सरकार में ढे़ड साल पूर्व दावा किया था कि अधिकारी पहाड़ के दूरदराज के गांवों में डेरा डालेंगे लेकिन प्रदेश में जब आपदा आई तो सरकार ने तमाम अधिकारियों को आखिरकार क्यों पहाड़ों में डेरा डालने का हुक्म नहीं दिया, यह भी सरकार की मंशा पर सवाल खड़ें कर रहा हैं। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चन्द खण्डूरी इन दिनों आपदा ग्रस्त इलाकों के दौरे पर है। बीते रोज उन्होंने गुप्तकाशी व उसके आसपास के इलाकों का दौरा करने के बाद वहां सरकार द्वारा पहंुचाई जा रही आपदा राहत सामग्री की हकीकत अपनी आंखों से देखी तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस आपदा में उजडें ग्रामीणों को खराब गेंहू व चावल दिया जा रहा है तथा अधिकांश गांवों में आज तक सरकार राहत तक नहीं पहंुचा पाई। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उत्तराखण्ड को बनाने के लिए सरकार कितनी गभीर हो रखी है।
ग्रीन बोनस पर केंद्र सिद्धान्तः सहमतरू जयंती नटराजन
देहरादून, 17 जुलाई, । प्रदेश में वन भूमि हस्तांतरण के मामलों को तेजी से निपटाने के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय का क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून में खोला जाएगा। उत्तराखंड की ग्रीन बोनस की मांग से केंद्रीय वन एव पर्यावरण मंत्रालय सैद्धांितक रूप से सहमत है। दैवीय आपदा से हुई तबाही के बाद उत्तराखंड में आधारिक संरचना के पुनर्निर्माण के संबंध में बुधवार को सचिवालय में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री(स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती जयंति नटराजन व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में पूरा देश उत्तराखंड के साथ है। केंद्र सरकार हर सम्भव सहायता उपलब्ध करवाने के लिए कटिबद्ध है। वन भूमि हस्तांतरण के मामलों के तीव्र निस्तारण के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय का क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून में खोला जाएगा। पहले कैम्प आफिस स्थापित किया जाएगा जबकि औपचारिकताएं पूरी होने पर फुल टाईम क्षेत्रीय कार्यालय स्थापित किया जाएगा। आपदाग्रस्त गांवो के विस्थापन के लिए वन भूमि की स्वीकृति के अनुरोध पर उन्होंने प्रस्ताव भेजने को कहा कि कुल कितनी भूमि की कहां-कहां आवश्यकता है। उन्होंने इस पर सकारात्मक विचार किए जाने का आश्वासन दिया। तय किया गया कि पहले सिविल सोयम भूमि, उसके बाद डिग्रेडेड वन भूमि व फिर आवश्यकता होने पर वन भूमि पर विचार किया जा सकता है। आपदा की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए निर्माण कार्यों में वन भूमि का उपयोग करने पर आवश्यक बाध्यकारी वनीकरण को दोगुना भूमि की बजाय समान भूमि पर वनीकरण की स्वीकृति दी। केंद्रीय मंत्री ने राज्य के 280 अतिसंवेदनशील गांवों के पुर्नवास के लिए भी वनकानूनों में ढील दिए जाने की बात स्वीकारी है, वहीं उन्होंने कहा कि बीआरओ द्वारा भेजे गए सभी प्रस्तावों को माना जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के 65 फीसदी से भी अधिक भाग पर वन भूमि है। प्रदेश देश को अमूल्य पर्यावरण सेवाएं उपलब्ध करवाता है। उन्होंने मुख्यमंत्री की ग्रीन बोनस की मांग से सैद्धांतिक सहमति जताते हुए इसके समर्थन में योजना आयोग में पैरवी करने की बात कही। आपदा में नष्ट हुई सड़कों के पुनर्निर्माण व रिएलाईनमेंट के काम को तेजी करने के लिए एक हेक्टेयर तक के लिए वन भूमि की सामान्य स्वीकृति जबकि एक से पांच हेक्टेयर तक की स्वीकृति देहरादून में प्रस्तावित क्षेत्रीय कार्यालय से दे दी जाएगी। नदियों से सिल्ट निकालने की स्वीकृति के अनुरोध पर केंद्रीय मंत्री प्रस्ताव भिजवाने को कहा। बैठक में सांसद सतपाल महाराज, केबिनेट मंत्री डा.हरक सिंह रावत, दिनेश अग्रवाल, विधायक गण्ेाश गोदियाल, शैलारानी रावत, पूर्व मंत्री नवप्रभात, प्रमुख सचिव एसएस संधु, एम रामास्वामी, राज्य आपदा प्रबन्धन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष ले.ज. (से.नि.) एमसी बधानी, प्रमुख वन संरक्षक डा.आरबीएस रावत सहित केंद्र व राज्य सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
अगले 48 घण्टों में भारी बारिश की संभावनाएं
देहरादून, 17 जुलाई,। उत्तराखंड के समूचे जनजीवन को बीती 16-17 जून को हुई भारी बरसात के कारण आए जलप्रलय ने तहस नहस करके रख दिया है। यहीं नहीं बरसात का यह कहर लगातार जारी है। प्रदेश में आये दिन होने वाली बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं से प्रदेश के लोग सहमें हुए है एक बार फिर मौसम के मिजाज में जिस तरह का बदलाव पिछले दो दिनों से देखने को मिल रहा है वह एक बार फिर आपदा के संकेत
दे रहा है। इससे प्रदेश के लोगों में दहशत स्वाभाविक है। मौसम विभाग द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार अगले 48 घण्टों में प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। 18 और 19 जुलाई को प्रदेश में भारी वर्षा से एक बार फिर तबाही की संभावनाए बनी हुई है हालांकि फिलहाल चारधाम यात्रा बंद है और खराब मौसम के कारण पर्यटकों की आवाजाही भी बहुत कम है लेकिन इसके बावजूद भी पहले से ही आपदा की मार झेल रहे प्रदेश के लोग लगातार हो रही बारिश और नदियों के उफान को देखकर डरे सहमे हुए है वहीं इस बारिश के कारण राहत कार्याे का पहियां थम सा गया है। राजधानी दून सहित राजय के कई हिस्सों में पिछले दो दिनों से कहीं सामान्य तो कहीं सामान्य से अधिक बरसात हो रही है। चम्पावत में शारदा नदी का कहर जारी है लगातार बढते जल स्तर के कारण कई कच्चे पक्के मकान लहरों मे समा गए है टनकपुर में भी बारिश से भारी तबाही हुई है बागेश्वर के कपकोट में पिन्ड़र नदी ने भारी नुकसान पहुंचाया है पिन्ड़र नदी पर बना पुल बह जाने से क्षेत्र के दस गांवो का सम्पर्क टूट चुका है बद्रीनाथ में भी पिछले दो दिनों से भारी बारिश हो रही है जिसके कारण स्थानीय लोग डरे हुए है क्षेत्र में सड़कों के टूट जाने के कारण यातायात पहले ही बाधित है अब खराब मौसम के कारण हैलीकाप्टरों से भी यहंा खाद्यान्न भी नहीं पहुंच पा रहा है। ऊखीमठ मे भी पिछले दो दिनों से हो रही बारिश के कारण मन्दाकिनी नदी में कहर बरपा रखा है। नदी में उफान के कारण लोग डरे सहमे है मन्दाकिनी अब तक दर्जनों भवनांे को ध्वस्त कर चुकी है यहां बड़ी संख्या में लोग एक सुरक्षा पुस्ता बनाने में जुटे हुए है जिससे उनकी जाल-माल की सुरक्षा हो सके। केदारनाथ और रामबाड़ा में भी मौसम खराब होने के कारण शवों को ढूढने और उनके संस्कार करने का काम पूरी तरह रुक गया है वहीं गंगोत्री धाम में भी लगातार बारिश हो रही है यहां के 37 गांव में अंधेरा छाया हुआ है तथा अनेक क्षेत्रों में खाद्यान्न की आपूर्ति बाधित हुई है । राजधानी देहरादून मसूरी और धनौल्टी मे बीती रात से रुक रुककर बारिश का क्रम जारी है।
छात्रों का कालेज में प्रदर्शन पुतला फूंका, कालेज बंद कराया
देहरादून, 17 जुलाई,। डीएवी कालेज में बुधवार को भी कालेज में प्रवेश की नयी व्यवस्था के विरोध में छात्रों ने जमकर हंगामा काटा तथा जबरन कालेज को बंद करा दिया गया। कालेज प्रशासन की मनमानी के खिलाफ छात्रों ने कालेज प्रबन्धन का पुतला भी फूंका। डीएवी कालेज में नये सत्र की शुरुआत जिस हंगामे से शुरु हुई है उसे देखते हुए इंटरनल परीक्षा के भविष्य का तो सवाल या निशान लग ही गया है साथ ही कालेज में प्रवेश को लेकर विश्वविद्यायल द्वारा की गई मैरिट व्यवस्था का लगातार विरोध जारी है। छात्रों ने आज इस मुद्दे को लेकर कालेज में जमकर हंगामा किया तथा बीएससी फिजिक्स सहित जो फैकलटियां खुली थी उन्हें बंद करा दिया। छात्रों ने कालेज प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की तथा आक्रोशित छात्रों ने कालेज प्रशासन का पुतला भी फूंका। छात्रों के आक्रोश को देखते हुए कालेज में भारी सुरक्षा के प्रबंध किये हैं आज डीएवी कालेज छावनी में तबदील दिखा। विश्वविद्यालय द्वारा मैरिट के आधार पर छात्रों को एडमिशन दिये जाने के विरोध के कारण पिछले दस दिनों से एडमिशन का कार्य रुका हुआ है और प्रोस्पेक्टस की बिक्री नहीं हो रही है। छात्रों के विरोध को देखते हुए कालेज प्रशासन ने फिलहाल कालेज को बंद कर दिया है। इस बाबत छात्र नेता स्वाती नेगी ने बताया कि कालेज तभी खुलेगा जब इस मुद्दे पर कालेज प्रशासन अंतिम फैसला कर लेगा उन्होंने कहा कि यह छात्रों के भविष्य का सवाल है इसलिए वह अपना आंदोलन जारी रखेंगे उधर कालेज प्रशासन का कहना है कि वह विश्वविद्यालय द्वारा बनाये गये नियम कानून और व्यवस्थाओं के बाहर जाकर काम नहीं कर सकता है। विश्वविद्यालय द्वारा तय की गयी सीटों के आधार पर ही छात्रों को प्रवेश दिये जाएगें इसके लिए मैरिट की व्यवस्था लागू की गयी है जबकि छात्रों की मांग है कि राज्य के छात्रों को इसमें दस प्रतिशत की छूट मिलनी चाहिए। आपदा के कारण भी राज्य के छात्रों को कालेजों में प्रवेश के लिए इस तरह की शर्ते नहीं थोपनी चाहिए उधर डीबीएस में भी इस मुददे पर कालेज बंद होने के बावजूद भी छात्रों का धरना जारी रहा।
डाकघरों के माध्यम से मिले पेंशन
देहरादून, 17 जुलाई,। पेंशनधारकों ने जिलाधिकारी के माध्यम से ग्रामीण विकास समिति के अध्यक्ष के नेतृत्व में समाज कल्याण मंत्रालय को एक ज्ञापन देकर पंेशन के खाते डाकघरों की जगह पंजाब नेशनल बैंक और स्टेट बैकों की शाखाआंे में खोलने का विरोध किया है इन पेंशनधारकों का कहना है कि उन्हें डाकघरों के माध्यम से पंेशन लेने में कोई समस्या नहीं है। इसलिए उनके पेंशन खाते डाकघरों में ही बरकरार रखे जाए। ज्ञापन में कहा गया है कि सरकार की इस पहल से कि डाकघरों में पेंशन खाते बंद कराकर पंजाब नेशनल बैंक और स्टेट बैंक में खाते खोले जाए, से पेंशन भोगियों को भारी परेशानी होगाी उनका कहना है कि बैंक मंें खाता खुलवाने के लिए बहुत सारी औपचारिकताए पूरी करनी पड़ती हैं विध्वा और वृद्धास्था व विकलांग पेंशन धारक अधिकांश लोग बिना पढे लिखे और गरीब लोग है जो इस औपचारिकता को पूरा करने में असमर्थ है बैंक मे हस्ताक्षर मिलान की भी समस्या है जबकि डाकघरों में अंगूठा लगाकर यह पेंशन ली जाए सकती है। ज्ञापन में अनुरोध किया गया है कि इस नयी व्यवस्था के कारण धरकों को भारी परेशानी हो रही है इसलिए उन्हें डाकघरों के माध्यम से पंेशन भुगतान की व्यवस्था बनाये रखी जाय।
इधर-उधर से करना पड़ रहा पानी का जुगाड़
देहरादून, 17 जुलाई,। कालसी व आसपास के इलाकों में पिछले काफी समय से पेयजल संकट बना हुआ है। पेयजल संकट के चलते लोगों को इधर-उधर से पानी का जुगाड़ करना पड़ रहा है। जलसंस्थान द्वारा पेयजल समस्या से निजात न दिलाए जाने से लोगों में विभाग के प्रति रोष व्याप्त है। पेयजल समस्या के चलते लोगों के कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं। पेयजल समस्या मुख्य रूप से कालसी, व्यासभूड़, इंदिरा कालोनी व चित्रशिला कालोनी में बनी हुई है। इन इलाकों में पेयजल आपूर्ति के लिए बुलगाड खड््ड से बनी पेयजल योजना की पाइप लाइन जर्जर हालत में है। इस पेयजल योजना का निर्माण 21 वर्ष पूर्व किया गया था, जो कि रखरखाव के अभाव में जगह-जगह पर क्षतिग्रस्त पड़ी है। जर्जर हालत में होने से पाइप लाइन में कई स्थानों पर लीकेज की समस्या बनी है, जिस कारण लोगों के घरों में लगे नलकों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इसके अलावा ट्यूबवेल से भी कुछ दिनों से पेयजल आपूर्ति ठप है। पेयजल समस्या के चलते लोग पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। जलसंस्थान द्वारा यहां एक टैंकर से पेयजल आपूर्ति की जा रही है जो कि नाकाफी साबित हो रही है। लोगों को दो-तीन बाल्टी पानी की ही मिल पाती हैं, जो कि खाना बनाने के लिए भी पूरा नहीं हो पाता है। नहाने व कपड़े धोने के लिए लोगों को नहर में जाना पड़ रहा है। शिकायत के बाद भी पेयजल आपूर्ति सुचारु न हो पाने से लोगों में जलसंस्थान के प्रति रोष व्याप्त है। समाजिक कार्यकर्ता महावीर सिंह का कहना है कि पेयजल आपूर्ति यदि शीघ्र सुचारु न की गई तो कालसी स्थित जलसंस्थान कार्यालय पर तालाबंदी की जाएगी। उनका कहना है कि शिकायत के बाद भी जलसंस्थान के अधिकारी समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। उनका कहना है कि पेयजल योजना की जर्जर हो चुकी पाइप लाइन को बदला जाए। /
एटीएम बदलकर लाखों उड़ाए
देहरादून, 17 जुलाई,। मदद के बहाने एटीएम कार्ड बदलने वाले गिरोह ने एक महिला को लाखों रूपए का चूना लगा दिया है। शातिर चोर ने खाते से लगभग एक लाख 88 हजार रूपए की नगदी निकाल ली है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज को खंगाल रही है। भोले-भाले लोगों की मदद करने के लिए आगे आने वाले कई शातिर लोग लाखों के वारे न्यारे कर चुके हैं। एटीएम कार्ड बदल कर धोखाधड़ी के दर्जनों मामले सामने आने के बावजूद बैंक ग्राहक कार्ड के प्रयोग में सावधानी नहीं बरत रहे हैं। एटीएम बूथों में अपने शिकार की तलाश में लगे ऐसे शातिर लोग बड़ी आसानी से महिलाओं केा अपना शिकार बना रहे हैं। ऋषिकेश क्षेत्र मंे एक ग्रामीण महिला का कार्ड बदल कर उनके खाते से लाखों रूपए की रकम निकाली ली गयी है। गढवाल गोचर निवासी श्रीमती गंगादेवी ने पुलिस को दी गयी अपनी शिकायत में बताया कि 22 जून को वह ऋषिकेश में एक निजी सैक्टर के बैंक के एटीएम में पैसे निकालने के लिए पहुंची थी। यहां उसे पैसे निकालने मे परेशानी हुई तो एक अज्ञात युवक उनकी मदद करने के आया और उनका कार्ड लेकर उन्हें पैसे निकाल कर दिए। अपना कार्ड एवं पैसे लेकर महिला वापस लौट गयी। इधर कुछ दिन बाद जब महिला पुनः पैसे निकालने के लिए एटीएम में गयी तो उनके खाते में बैलेंस न होने पर पैसा नहीं निकल पाया। गंगादेवी के खाते में लगभग पौने दो लाख रूपए थे। बैलेंस न होने की सूचना पर उनके होश फाख्ता हो गए। गंगादेवी ने बैंक से संपर्क किया
तो पता लगा कि अलग-अलग दिनों में उनके एटीएम कार्ड को प्रयोग कर कुल एक लाख 88 हजार रूपए की रकम निकाली जा चुकी है। इधर बैंक अधिकारियों ने उनके एटीएम की जांच की तो पता लगा कि मदद करने वाले उक्त युवक ने उनका कार्ड एवं पासवर्ड जानने के बाद उन्हें किसी दूसरे बैंक का ही फर्जी एटीएम कार्ड थमा दिया था। अपने साथ हुई लाखों रूपयों की धोखाधड़ी के बाद गंगादेवी ने ऋषिकेश कोतवाली में अज्ञात युवक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। वहीं पुलिस का कहना है कि उक्त एटीएम बूथों के सीसीटीवी की जांच कर पैसा हड़पने वाले के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।
दहेज उत्पीड़न के मामले दर्ज
देहरादून, 17 जुलाई, । अलग-अलग महिलाओं से ससुरालियांे द्वारा दो दहेज की मांग करने के मामले में ससुरालियों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। दून में दहेज उत्पीडन के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे ही एक और मामले में ससुरालियांे ने दहेज न लाने पर विवाहिता को घर से निकाल दिया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है लेकिन अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं की गयी है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार नेहरू कॉलोनी पुलिस को दी गयी शिकायत में श्रीमती विनिता राणा निवासी रिंग रोड जोगीवाला ने पुलिस को बताया कि उसका विवाह सुधीर कुमार राना निवासी दूधली डोईवाला के हुआ था। शादी के बाद से ही विनिता राणा से दहेज मांगा जा रहा था और इसके लिए उसकी पिटाई की जाती थी। कई बार विनिता राणा ने अपने पिता को इस बारे में बताया था जिसे लेकर मायके वालों ने विनिता राणा के ससुरालियों को समझाने का भी प्रयास किया। विनिता राणा के अनुसार उसके पिता ने शादी के समय अपनी क्षमता के अनुसार दान दहेज दिया था लेकिन बावजूद इसके उसके ससुराली उसे दहेज के लिए परेशान करने लगे थे और उसका उत्पीड़ने करने लगे। उसने अपने ससुरालियांे की इस मांग के बारे में अपने पिता को बताया तो परिजनों ने और अध्कि दान दहेज देने में अपनी असर्थता जाहिर कर दी। इधर रोज-रोज की मारपीट एवं तानों से तंग आकर विनिता राणा ने पुलिस को शिकायत करने की चेतावनी दी जिस पर ससुरालियों ने उसे मारपीट कर घर से निकाल दिया। अपने पिता के पास पहुंचने के बाद घर एवं समाज के कुछ लोगों ने समझौता करने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। बाद में मामला महिला हेल्प लाईन में पहुंचा। यहां भी दोनों परिवारों के बीच सुलह का जब कोई रास्ता नहीं निकल पाया तो विनिता राणा की शिकायत पर नेहरू कॉलोनी पुलिस ने पति सुधीर राणा समेत सास-ससुर एवं अन्य ससुरालियांे के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। पुलिस के अनुसार मामले की जांच की जा रही है। उधर दहेज उत्पीड़न के ही एक अन्य मामले में श्रीमती शीतल पुत्री सुरेंद्र निवाासी करनपुर ने भी अपने पति रोहित चैहान सहित अन्य ससुरालियांे के खिलाफ उसके साथ दहेज के लिए मारपीट करने, क्रूरतापूर्ण व्यवहार करने की शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस के अनुसार दोनों मामलों में अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की गयी है।
भाजपा पार्षदों ने किया एमएनए के कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन
देहरादून, 17 जुलाई, । गलत तरीके से मुख्य नगर अधिकारी द्वारा म्यूटेशन कराये जाने के विरोध में भाजपा पार्षदों ने एमएनए के कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया और मेयर विनोद चमोली को ज्ञापन सौंपा, इस दौरान प्रदर्शनकारी पार्षदों ने कहा कि इस मामले पर शीघ्र कार्यवाही की जानी चाहिए, मेयर ने कार्यवाही करने का भरोसा दिया। यहां भाजपा पार्षद नगर निगम पहंुचे और वहां पर उन्होंने एमएनए के कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया और गलत तरीके से किये गये म्यूटेशन का विरोध किया, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि एक जिम्मेदार अधिकारी होने के कारण उनके द्वारा गलत तरीके से एक म्यूटेशन कराया गया जबकि वहीं अन्य क्षेत्रों की जनता टैक्स व म्यूटेशन के लिए भटकती रहती है और उनका समय पर काम नहीं हो पाता है जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड रहा है। उनका आरोप है कि एमएनए यहां पर अपना हित साध रहे है और क्षेत्रों की जनता टैक्स व म्यूटेशन कराने के लिए चक्कर काट रही है और उनका किसी भी प्रकार का कोई काम नहीं हो पा रहा है और कर्मचारी व ठेकेदार अपना वेतन व पैसों के लिए रोज आस लगाये रहते है परन्तु कुछ हल नहीं निकलता है। उनका कहना है कि टैक्स म्यूटेशन की कार्यवाही आम जनता के लिए खोली जाये ताकि जनता को सुविधा मिल सके और निगम की आय बढ़ सके। उनका कहना है कि दूसरी ओर 13वें वित्त आयोग का जो पैसा निगम में आया है उसका प्रयोग क्षेत्रों में जनता की सुविधाओं व कर्मचारियों के हित में होना चाहिए न कि गाडी खरीदने में, इसका व्यापक स्तर पर विरोध किया जायेगा। इस दौरान मेयर विनोद चमोली ने इस पर उचित कार्यवाही करने का भरोसा दिया। प्रदर्शन करने वालों में पार्षद भूपेन्द्र कठैत, नीतू वाल्मीकि, अरूण खन्ना, सतीश कश्यप, नीरज सेठी, संतोख नागपाल, मीरा कठैत, जीवन सिंह आदि शामिल थे।
मार्ग बंद होने से विद्यालय नहीं पहुंच रहे छात्र
- अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित
देहरादून, 17 जुलाई, । केदारनाथ त्रासदी के बाद रूद्रप्रयाग जनपद में करीब दो सप्ताह तक बंद रहे स्कूलों में एक बार फिर से रौनक नजर आने लगी है। हालांकि स्कूलों में छात्र संख्या में कमी को देखते हुए अध्यापकों व अभिभावकों में छात्रों के भविष्य के प्रति चिंता झलक रही है। आपदा में जहां ग्रामीण क्षेत्रों के पैदल रास्ते बुरी तरह से टूट गए हैं, वहीं मोटरमार्ग व पैदल पुल भी क्षतिग्रस्त होने से छात्रों व उनके अभिभावकों में असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है। इधर मुख्य शिक्षाधिकारी हरिशंकर वर्मा ने कहा कि जो छात्र जहां है अपनी सुविधा के लिए अपने निकटवर्ती स्कूलों में कक्षाएं जारी कर सकता है। इसके लिए सभी आपदा प्रभावित स्कूलों के प्रधानाचार्यों को पत्र भेजा जा रहा है, जिले के कई प्राथमिक व माध्यमिक स्कूल इस आपदा से प्रभावित हुए हैं। रा.इं. कॉलेज चन्द्रापुरी में 263 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन करीब 55 छात्र ही विद्यालय में उपस्थित हुए। कॉलेज के अधिकांश छात्र-छात्राएं मंदाकिनी नदी के पार पाली, रयांसू, चन्द्रापुरी, नैली, कुंड, अरखंुड, हाट आदि गांवों से यहां पढने आते हैं, लेकिन नदी पर बना झूलापुल बहने से ये छात्र स्कूल नहीं आ पा रहे हैं। हालांकि चन्द्रापुरी में झूलापुल के स्थान पर एक छोटी ट्राली लगाई गई है, मगर ट्राली एक तार व एक रस्सी के सहारे आ जा रही है। इसलिए लोग उसमें आने से कतरा रहे हैं। राइंका चन्द्रापुरी के प्रधानाचार्य ज्ञानप्रकाश पांडेय ने बताया कि छह आपदा पीडित परिवार अभी भी विद्यालय भवन में शरण लिये हुए हैं। कई कक्षा-कक्षों में छत से पानी टपक रहा है। इस स्थिति से विभाग को लिखित व मौखिक रूप से अवगत करा दिया गया है। ग्रामीण विपिन रावत ने इस बात पर अफसोस जताया कि आपदा के बाद भी आज तक विभाग का कोई भी अधिकारी यहां के हालत देखने नहीं पहुंचा है। उन्होंने कहा कि कॉलेज की व्यवस्थाओं को देखने के लिए विभागीय अधिकारियों को यहां आना चाहिए। शिक्षक अभिभावक संघ में इस बात को लेकर आशंका है कि यदि शीघ्र आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई और छात्र संख्या घटती रहेगी तो कॉलेज के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लग जाएगा। वहीं जूनियर हाईस्कूल गिंवाला में भी छात्रों की कक्षाएं प्राथमिक विद्यालय गिंवाला के भवन में शुरू हो गई हैं। जूनियर हाईस्कूल गिंवाला का भवन बाढ में बह जाने के बाद यहां भी अध्यापकों के सामने नया सत्र चलाने की समस्या पैदा हो गई थी। ग्राम प्रधान वीरेन्द्र बिष्ट ने बताया कि फिलहाल प्राथमिक विद्यालय में ही कक्षाएं चलेंगी।
कैंट बोर्ड पहुंची कैग की टीम
देहरादून, 17 जुलाई, । कैंट बोर्ड देहरादून में पिछले तीन वर्षों के दौरान हुए आय-व्यय का लेखा-जोखा जानने को कैंग की टीम इन दिनों बोर्ड कार्यालय में है। विदित हो कि कैंट बोर्ड क्षेत्र में पिछले तीन वर्षों के दौरान हुए विकास कार्यों की वास्तविकता जानने को लेकर कैग की टीम गत तीन जुलाई से बोर्ड कार्यालय में है। सूत्रों के मुताबिक इस दौरान टीम के द्वारा बोर्ड के कागजों का अवलोकन करने के साथ ही अधिकारियों से भी जानकारी ली जा रही है। इस बाबत कैंट बोर्ड देहरादून के बडे बाबू जयराम गुप्ता का कहना है कि कैग की यह टीम बोर्ड द्वारा पिछले तीन वर्षों में किये गये व्यय के साथ ही आय का लेखा-जोखा ले रही है। उन्होंने कहा कि यह टीम आगामी 20 जुलाई तक अपनी गतिविधियों को संचालित करेंगी।
कैंट बोर्ड मंे भ्रष्टाचार के खिलाफ फिर उठी आवाज
- मांग पूरी न होने पर दी आंदोलन की चेतावनी
देहरादून, 17 जुलाई,। कैंट बोर्ड देहरादून में हो रहे भ्रष्टाचार के विरूद्ध एक बार फिर आवाज बुलंद होने लगी है। बोर्ड में सभासदो व अधिकारियों से हो रहे भ्रष्टाचार की सीबीआई जांच की मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है। विदित हो कि कैंट बोर्ड देहरादून मंे हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ समय-समय पर आवाज बुलंद होती रही है, लेकिन हर बार क्षेत्रीय जनता को विभाग की ओर से आश्वासन रूपी लॉलीपॉप ही हाथ लगता है। कैंट बोर्ड में हो रहे भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार लोगों पर किसी प्रकार की कोई कार्यवाही न होता देख एक बार फिर इस दिशा में आवाज को बुलंद किया गया है। जिला कांग्रेस कमेटी सचिव शैलेन्द्र गुरूंग व कृष्ण कुमार की ओर से कैंट बोर्ड के मुख्य अधिशासी अधिकारी को भेजे गये पत्र में कहा गया है कि कैंट बोर्ड द्वारा पिछले तीन वित्तीय वर्षों की जारी वार्षिक रिपोर्ट में 85.62 करोड़ का व्यय बताया गया है, लेकिन बोर्ड अधिकारी व सदस्य 17 करोड़ ही बताते आ रहे है। इसके अलावा कैंट बोर्ड के तत्कालीन जेई सिविल द्वारा भी फर्जी कार्यों को लगातार कागजो में पूर्ण दर्शाकर, मिलीभगत से धन गबन किया जा रहा है।
पत्र में उन्होंने जहां 125 रिक्शों को अधिक धन में खरीदे जाने की बात कही है, वहीं सार्वजनिक शौचालयों की प्रतिवर्ष मरम्मत व उनके गढ्ढो की प्रति छमाही साफ-सफाई में खर्च दर्शाया गया है, जबकि वास्तविकता में ऐसा कोई खर्च नही किया गया है। इसके अलावा स्टोर से सम्बन्धित खरीद में भी काफी अनियमितता की गयी है। उनका साफ कहना था कि कैंट बोर्ड देहरादून के उक्त भ्रष्टाचार मंे तत्कालीन सीईओ व बोर्ड उपाध्यक्ष सहित सभी निर्वाचित वार्ड सदस्य संयुक्त रूप से शामिल रहे है। पत्र में उन्होंने सीबीआई जांच कराने की बात को भी जोर-शोर से कहा है। उधर श्री गुरूंग ने आज खबर से कहा कि यदि उनकी मांगो का समाधान शीघ्र न हुआ, तो वह आगामी 19 जुलाई से भूख हड़ताल करने पर विवश होगे। उन्होंने कहा कि इस सम्बन्ध में प्रतिलिपि केन्द्रीय रक्षा मंत्री तथा पुलिस उपमहानिरीक्षक सीबीआई उत्तराखंड को भी प्रेषित किया गया है। इधर कैंट बोर्ड के बडे बाबू जयराम गुप्ता का कहना है कि उक्त सम्बन्ध में किसी प्रकार का पत्र फिलहाल उनके संज्ञान में नहीं है।
क्षति व आपदा प्रबंधन कार्यों से कराया अवगत
अल्मोड़ा/देहरादून, 17 जुलाई, । जिलाधिकारी अक्षत गुप्ता ने दैवीय आपदा से हुई क्षति एवं दैवीय आपदा प्रबन्धन में किये कार्याे से अवगत कराया। पत्रकारो से वार्ता करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि जनपद में अभी तक बस दुर्घटना व दैवीय आपदा में 08 व्यक्तियों की मृत्यु हुई है जिन्हें 5 लाख रू. प्रति व्यक्ति की दर से 40 लाख रू. वितरित कर दिया गया है। इसी तरह 18 व्यक्ति घायल हुए थे जिनमें से 13 व्यक्तियों को 1 लाख 90 हजार रू0 वितरित किया गया है। दैवीय आपदा के दौरान जनपद में कुल 50 पशुओं की मृत्यु हुई थी जिनमें से 16 पशुओं के स्वामियों को 1 लाख 66 हजार 100 रू0 वितरित कर दिया गया है। इसी तरह एक गौशाला क्षतिग्रस्त हुई थी। उन्होंने बताया कि दैवीय आपदा के दौरान 07 भवन पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो गये थे जिनमें से 7 भवन स्वामियों को 78 लाख 07 हजार रू0 वितरित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि 57 भवन तीक्ष्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुए थे जिनमें से 56 भवनों का 2 लाख 70 हजार 1900 रू0 वितरित कर दिया गया है। इसी तरह 139 भवन आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए थे जिनमें से 137 भवनों का 02 लाख 60 हजार 300 रू0 वितरित कर दिया गया है। कृषि इनपुट सब्सीडी 231 लाभार्थियों को 02 लाख 9 हजार 755 रू0 वितरित किया गया है। इसी तरह 05 लाभार्थियों अहतुक सहायता के रूप में 16 हजार 700 रू. वितरित किया गया है। सम्पूर्ण जिले में विभिन्न तहसीलों द्वारा 2 करोड़ 75 लाख रू0 आवंटित किया गया था। जिसमें से 83 लाख 31 हजार 755 रू0 तहसीलों द्वारा वितरित कर दिया गया है। जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि दैवीय आपदा मद मंे कार्यों को प्रारम्भ करने को 2 करोड़ रू0 शासन द्वारा स्वीकृत किया गया था। जिनमें से प्रान्तीय खण्ड लो0नि0वि0 को 62 लाख 76 हजार रू0, निर्माणखंड लोनिवि अल्मोड़ा को 07 लाख 56 हजार रू0, निर्माण खण्ड रानीखेत को 5 लाख 96 हजार रू0, खण्ड विकास अधिकारी चैखुटिया को 08 लाख 68 हजार रू0, सिंचाई खण्ड अल्मोड़ा को 33 लाख 01 हजार 400 रू0, रानीखेत को 30 लाख 26 हजार रू0, पेयजल निगम अल्मोड़ा को 13 लाख रू0, लघुडाल अल्मोड़ा को 04 लाख 24 हजार रू0, जल संस्थान रानीखेत को 07 लाख 37 हजार 600 रू0, जल संस्थान अल्मोड़ा को 20 लाख 50 हजार रू0, नगरपालिका अल्मोड़ा को 06 लाख 65 हजार रू0 स्वीकृत किये गये है। इस तरह 50 कुल कार्यों के लिए 02 करोड़ रू0 स्वीकृत किये गये है। उन्होंने यह भी बताया कि अभी तक विभिन्न विभागों के लगभग 20 करोड़ के विभागीय परिसम्पत्ति क्षति के आकलनों के प्रस्ताव प्राप्त हुए है। जिनमें से निर्माण खण्ड लोनिवि के 112.00, प्रान्तीय खण्ड लोनिवि के 78.90, निर्माण खण्ड रानीखेत के 100.90, प्रान्तीय खण्ड लोनिवि रानीखेत के 398.48, एडीबी रानीखेत के 2.00, एडीबी अल्मोड़ा 10.50, पीएमजीएसवाई अल्मोड़ा के 138.00, राष्ट्रीय राजमार्ग लोनिवि के 200.00, निर्माण खण्ड सल्ट के 124.91, जल संस्थान अल्मोड़ा 208.00, जल संस्थान रानीखेत के 23.88, जल संस्थान रामनगर के 21.44, पेयजल निगम अल्मोड़ा 61.45, सिंचाई खण्ड अल्मोड़ा के 92.00, रानीखेत के 192.30, लघुडाल नहर अल्मोड़ा के 13.50, लघु सिंचाई अल्मोड़ा के 31.00, विद्युत वितरण खण्ड अल्मोड़ा के 12.80, रानीखेत के 45.12, प्रभागीय वनाधिकारी अल्मोड़ा के 12.10, ग्रामीण अभियन्त्रण सेवा के 81.50, शिक्षा विभाग के 20.82 इस तरह कुल 1981.41 के प्रस्ताव प्राप्त हुए है। जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि जनपद में खाद्यान्न की व्यवस्था सुव्यवस्थित रहे इसके लिए जिला पूर्ति अधिकारी को सभी गोदामों में पर्याप्त मात्रा में भण्डारण करने के निर्देश दिये गये है। उन्होंने कहा कि जनपद में दैवीय आपदा के कार्यों को जो मनरेगा के मानक के अन्तर्गत आते है। उन्हें प्रमुखता से मनरेगा से कराया जा रहा है ताकि प्रभावित लोगों को उसका लाभ मिल सके। उन्होंने यह भी बताया कि अब प्रत्येक दिन दैवीय आपदा से सम्बन्धित सूचनाओं को प्रेस प्रतिनिधियों को देने के लिए नव नियुक्त डिप्टी कलेक्टर श्रीमती रिकूं बिष्ट को जिम्मेदारी दी गयी है। जिनसे सायं 3ः00 बजे के बाद दैवीय आपदा सम्बन्धी सूचना दूरभाष या कार्यालय में जाकर प्राप्त की जा सकेगी। पत्रकार वार्ता के दौरान अपर जिलाधिकारी प्रशान्त कुमार आर्य, जिला विकास अधिकारी डी0डी0 पंत, आपदा प्रबन्धन अधिकारी डा0 मंजू पाण्डे मुख्य रूप से मौजूद थे।
डीएम ने की अधिकारियों की तैनाती
रूद्रप्रयाग/देहरादून, 17 जुलाई, । जनपद के आपदा प्रभावित क्षेंत्रों में राहत कार्यों के अनुश्रवण, राहत सामग्री एवं राहत सहायता को प्रभावितों तक समय पर पहुंचाने के लिए जिलाधिकारी दिलीप जावलकर द्वारा सैक्टर और नोडल अधिकारी की नियुक्ति करते हुए राहत वितरण केन्द्र के अधिकारियों की भी नियुक्ति की हैं। उन्होंने बताया कि जनपद में गुलाबराय, गुप्तकाशी व ऊखीमठ से राहत सामग्री आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए भेजी जाएगी। वितरण केन्द्र गुलाबराय हेतु जिला पूर्ति अधिकारी जगदीश वर्मा, गुप्तकाशी हेतु उपजिलाधिकारी गिरीश चन्द्र गुणवंत तथा ऊखीमठ हेतु उपजिलाधिकारी राकेश तिवारी को प्रभारी बनाया गया हैं। ड्रापिंग संेटर राजकीय इंटर कालेज क्यूंजा के लिए जिला परियोजना प्रबंधक ग्राम्य अखिलेश तिवारी को सैक्टर ऑफिसर व भगवती प्रसाद नौटियाल प्रधानाचार्य राजकीय इण्टर कालेज क्यूंजा को नोडल अधिकारी, राजकीय इण्टर कालेज कंडारा के लिए मुख्य कृषि अधिकारी अजय कुमार को सैक्टर ऑफिसर व बच्चन सिंह रावत प्रधानाचार्य राजकीय इण्टर कंडारा, राजकीय इंटर कालेज कांडई के लिए जिला पर्यटन अधिकारी सीमा नौटियाल को सैक्टर ऑफिसर व पुरूषोत्तम बहुगुणा प्रधानाचार्य राजकीय इण्टर कालेज पित्रधार, राजकीय प्राथमिक विद्यालय स्वांरीग्वंास के लिए जिला समाज कल्याण अधिकारी बलवंत सिंह रावत को सैक्टर ऑफिसर व एस.डी.गौतम प्रधानाचार्य राजकीय इण्टर कालेज घिमतोली, राजकीय इण्टर कालेज अगस्त्यमुनि के लिए अधिशासी अभियंता ग्रामीण अभियंत्रण सेवा के.सी.डिमरी को सैक्टर ऑफिसर व शिव प्रसाद भट्ट प्रधानाचार्य राजकीय इण्टर कालेज अगस्त्यमुनि, राजकीय इण्टर कालेज फाटा के लिए परियोजना प्रबंधक स्वजल एस.के.वर्मा को सैक्टर ऑफिसर व विजय सिंह राणा प्रधानाचार्य राजकीय इण्टर कालेज फाटा, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कालीमठ के लिए उप परियोजना प्रबंधक स्वजल डी.डी.उनियाल को सैक्टर ऑफिसर व बी.एस.राणा प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय कालीमठ को नोडल अधिकारी, राजकीय प्राथमिक विद्यालय फलई व राजकीय इंटर कालेज तैला के लिए अधिशासी अभियंता लद्यु सिंचाई राजीव सक्सेना को सैक्टर ऑफिसर व पी.एन.भट्ट प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पठालीधार को नोडल अधिकारी व जे.एस.बिष्ट प्रधानाचार्य राजकीय इंटर कालेज तैला को नोडल अधिकारी, राजकीय इण्टर कालेज परकण्डी के लिए जिला उद्याान अधिकारी सतीश चन्द्र मिश्रा को सैक्टर ऑफिसर व राम सिंह पंवार प्रधानाचार्य राजकीय इण्टर कालेज परकण्डी को नोडल अधिकारी, जुगासू पुल के लिए सहायक निदेशक डेरी श्री डुंगरीयाल को सैक्टर ऑफिसर व के.एस.राणा प्रधानाचार्य राजकीय इण्टर कालेज राऊलेक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया हैं।
(मनोज इष्टवाल)

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