बीसीसीआई ने बम्बई उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

Breaking

प्रबिसि नगर कीजै सब काजा । हृदय राखि कौशलपुर राजा।। -- मंगल भवन अमंगल हारी। द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी ।। -- सब नर करहिं परस्पर प्रीति । चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीति ।। -- तेहि अवसर सुनि शिव धनु भंगा । आयउ भृगुकुल कमल पतंगा।। -- राजिव नयन धरैधनु सायक । भगत विपत्ति भंजनु सुखदायक।। -- अनुचित बहुत कहेउं अग्याता । छमहु क्षमा मंदिर दोउ भ्राता।। -- हरि अनन्त हरि कथा अनन्ता। कहहि सुनहि बहुविधि सब संता। -- साधक नाम जपहिं लय लाएं। होहिं सिद्ध अनिमादिक पाएं।। -- अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के । कामद धन दारिद्र दवारिके।।

सोमवार, 5 अगस्त 2013

बीसीसीआई ने बम्बई उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी


BCCI Logoभारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने सोमवार को बम्बई उच्च न्यायालय के उस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है, जिसमें न्यायालय ने बोर्ड द्वारा इंडियन प्रीमियर लीग (आपीएल) मामले की जांच के लिए गठित दो सदस्यीय समिति को 'अवैध और असंवैधानिक' करार दिया था। बीसीसीआई ने राजधानी में शुक्रवार को प्रस्तावित कार्यकारिणी की बैठक रद्द होने के बाद बम्बई उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील करने का फैसला किया था। इसी के तहत सोमवार को बोर्ड ने सर्वोच्च न्यायलय में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की। 


उल्लेखनीय है कि 28 जुलाई को कोलकाता में बोर्ड की कार्यकारिणी की बैठक हुई थी। उस बैठक में बोर्ड की दो सदस्यीय जांच समिति ने आईपीएल में सट्टेबाजी मामली की रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन और राजस्थान रायल्स टीम के सहमालिक राज कुंद्रा को सट्टेबाजी के आरोपों से बरी कर दिया गया था।



उल्लेखनीय है कि बम्बई उच्च न्यायालय ने 30 जुलाई को बीसीसीआई को करारा झटका देते हुए उसके द्वारा गठित समिति को अवैध करार दिया था। न्यायालय ने बिहार एवं झारखंड क्रिकेट संघों द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि इस मामले की नए सिरे से जांच की जरूरत है। न्यायालय ने इस समिति के गठन पर भी सवाल खड़े किए थे।



उच्च न्यायालय ने कहा था कि बीसीसीआई मैच और स्पॉट फिक्सिंग जैसे गम्भीर मामलों की जांच खुद कैसे करा सकता है। उसे इन मामलों की सुनवाई के लिए समिति गठित करने का कोई अधिकार नहीं है। बोर्ड की इस समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश आर. बालासुब्रमण्यन और जयराम टी. चौटा शामिल थे। ये पी. रमन के करीबी हैं। रमन को मयप्पन के वकील के तौर पर जाना जाता है।

कोई टिप्पणी नहीं: