खाद्य सुरक्षा अध्यादेश पर संसद की मंजूरी हासिल करने को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की प्राथमिकता का संकेत देते हुए सरकार ने मानसून सत्र के पहले दिन सोमवार को लोकसभा में दस्तावेज पेश किया। कांग्रेस के प्रवक्ता मीम अफजल ने संवाददाताओं से कहा, "खाद्य सुरक्षा विधेयक हमारी शीर्ष वरीयता है। हम चाहते हैं सभी दल इसका समर्थन करें। हमें उम्मीद है कि यह सत्र पिछले सत्रों से बेहतर रहेगा।" निचले सदन में शोरशराबे के बीच खाद्य मंत्री के. वी. थॉमस ने सदन को यह सूचित करते हुए अध्यादेश को पेश किया कि सत्रावधि नहीं रहने पर सरकार ने राज्यादेश के जरिए इसे लाया है।
थॉमस ने कहा कि सरकार पिछले चार वर्षो के दौरान औसतन 60.2 करोड़ टन अनाज की खरीदारी कर चुकी है और अध्यादेश के लिए जरूरी 61.2 करोड़ टन का प्रबंध करने में कोई कठिनाई नहीं होगी। विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि इस सप्ताह लोकसभा में अध्यादेश पर विचार और पारित किए जाने के बाद राज्य सभा में विचार किया जाएगा।
बजट सत्र के दौरान पारित होने से रह गए खाद्य सुरक्षा विधेयक को अब वापस लिए जाने की उम्मीद है। सूत्रों ने बताया कि कोयला ब्लॉक आवंटन को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस्तीफे की मांग को लेकर भाजपा के अड़ जाने और सदन को नहीं चलने देने के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका था। इसके बाद विधेयक ने अध्यादेश का रूप लिया। अध्यादेश पर बुधवार को चर्चा हो सकती है।
निचले सदन की कार्यमंत्रणा समिति की सोमवार को हुई बैठक में खाद्य सुरक्षा विधेयक पर चर्चा के लिए छह घंटे का समय आवंटित करने पर सहमति बनी। इस विधेयक को इस वर्ष के अंत तक पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों और 2014 में होने वाले आम चुनाव में खेल बदलने वाले के रूप में माना जा रहा है। इस विधेयक के जरिए देश की 1.2 अरब आबादी के 67 प्रतिशत को बाजार दर से काफी कम कीमत पर रियायती खाद्यान्न मुहैया करने का लक्ष्य है।

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