देश में मुद्दों और मूल्यों की राजनीति हो : गोविंदाचार्य - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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मंगलवार, 6 अगस्त 2013

देश में मुद्दों और मूल्यों की राजनीति हो : गोविंदाचार्य

  • राहुल, मोदी और नीतीश सब बाजारवादी सोच और विदेशी पूंजीवादी सोच वाले व्यक्ति हैं।

Govindacharya
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के थिंक टैंक रह चुके लोकतंत्र बचाओ मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के. एन. गोविंदाचार्य ने सोमवार को कहा कि भारतीय राजनीति में चेहरों की बजाए मुद्दों और मूल्यों की राजनीति होनी चाहिए। लखनऊ पहुंचे गोविंदाचार्य ने पत्रकारों से बातचीत में ये बातें कही। इस दौरान गोविंदाचार्य ने विभिन्न मुद्दों पर पत्रकारों के सामने अपने विचार रखे। गोविंदाचार्य ने कहा, "भारतीय राजनीति में अब मुद्दों और मूल्यों की बजाए चेहरों पर चर्चा होती है, इसीलिए राजनीति की गंभीरता समाप्त हो गई है। राहुल, मोदी और नीतीश सब बाजारवादी सोच और विदेशी पूंजीवादी सोच वाले व्यक्ति हैं। बाजारवादी सोच की वजह से ही गांवों का विकास नहीं हुआ है और पलायन बढ़ रहा है।"

उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, नीतियों के मामले में सब एक जैसे ही हैं। गरीबों की बात करने वाला कोई नहीं रह गया है। सड़क पर सब गरीबों की बात करते नजर आते हैं, लेकिन बारी जब संसद में मुद्दे उठाने की आती है, तब वे कुछ नहीं करते। उप्र की आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन के मामले में गोविंदाचार्य ने कहा कि नरेंद्र भाटी का बयान ही मामले को संदेहास्पद बना देता है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर टिप्पणी करते हुए गोविंदाचार्य ने कहा, "अखिलेश यादव के बारे में मैं अभी कुछ नही बोलना चाहूंगा, क्योंकि वह अभी दबाव में सीख रहे हैं। मैं उन्हें अभी और समय देना चाहूंगा।"

छह जुलाई को लोकतंत्र बचाओ मोर्चा का गठन करने वाले गोविंदाचार्य ने अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल को मोर्चा में शामिल किए जाने के बारे में कहा कि योजना चल रही है, लेकिन फिलहाल मूल्यों और मुद्दों की राजनीति करने वालों को एक मंच पर आना चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय के हाल के फैसलों के समर्थन में गोविंदाचार्य की पार्टी छह अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देगी। उन्होंने कहा कि राजनीतिक पार्टियों को सूचना के अधिकार अधिनियम के दायरे में होना चाहिए। लोकतंत्र के लिहाज से यह सही होगा। 

उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले ही सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा था कि दो वर्ष तक सजा पाने वाले लोग चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।

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