मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने मंगलवार को सरकार के सूचना के अधिकार कानून (आरटीआई) में संशोधन के फैसले का समर्थन किया। यह संशोधन राजनीतिक दलों को इस कानून के दायरे से बाहर करना है। माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा, "राजनीतिक दल सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं है। राजनीतिक दलों के फैसले से जनता पर प्रभाव नहीं पड़ता है।"
सूचना अधिकार कार्यकर्ता एस. सी. अग्रवाल की अर्जी पर केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने व्यवस्था दी थी कि राजनीतिक दल सार्वजनिक प्राधिकरण हैं जिन्हें अब छह सप्ताह के भीतर आरटीआई अर्जी का उत्तर देना होगा।
सीआईसी ने अपने फैसले में कहा था कि छह राष्ट्रीय पार्टियां कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा), माकपा, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) आरटीआई के दायरे में आएंगी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संसद के मौजूदा मानसून सत्र में आरटीआई में संशोधन से संबंधित एक विधेयक लाने को मंजूरी दी है। इस संशोधन के जरिए सरकार राजनीतिक दलों को सार्वजनिक प्राधिकरण की परिभाषा से बाहर निकालना चाहती है।

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