चारा घोटाला मामले में आरोपी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद द्वारा दायर याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को आपना फैसला सुरक्षित रख लिया। लालू प्रासद ने अपनी याचिका में मामले की सुनवाई एक अन्य अदालत में कराए जाने की मांग की थी।
महान्यायवादी मोहन प्रसरन ने न्यायालय को बताया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को अपना पक्ष रखने में अभी करीब 40 दिन लग जाएंगे। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश पी. सतशिवम, न्यायमूर्ति रंजन प्रकाश देसाई और न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की पीठ ने लालू प्रसाद की याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित कर दिया।
न्यायमूर्ति सतशिवम ने यह स्पष्ट करते हुए कि यह न्यायालय की पीठ का विचार नहीं है, प्रश्न पूछा, "कल्पना कीजिए की यह मामला किसी और न्यायाधीश के पास जाता है, तो अभियोजन पक्ष को अपना पक्ष रखने में कितना समय लगेगा?"
लालू प्रसाद की तरफ से न्यायालय के समक्ष पेश हुए उनके वकील राम जेठमलानी ने न्यायालय को बताया कि वह इस मामले की फिर से शुरुआत से सुनवाई नहीं करवाना चाहते, बल्कि उन्हें शंका है कि आदेश पहले ही लिखा जा चुका है और निचली अदालत द्वारा लिखित आवेदन मांगा जाना सिर्फ स्वांग है। लालू प्रसाद ने अपने खिलाफ इस मामले को झारखंड स्थित सीबीआई की अदालत से किसी भी अन्य सक्षम अदालत में स्थानांतरित किए जाने के लिए नौ जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।
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