उत्तराखंड की विस्तृत खबर (05 अगस्त) - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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सोमवार, 5 अगस्त 2013

उत्तराखंड की विस्तृत खबर (05 अगस्त)

बाहरी नियुक्तियों का विरोध करेगी यूकेडी

देहरादून, 5 अगस्त, । यूकेडी ने सैनिक कल्याण एवं पुर्नवास निदेशक के पद पर बाहरी व्यक्ति की नियुक्ति किये जाने की आलोचना करते हुए सरकार से कहा है कि उत्तराखण्ड सैन्य बाहुल्य प्रदेश है। इस प्रदेश में अनेकों सेवानिवृत्त सैन्य अफसर हैं पर सरकार इनकी उपेक्षा कर बाहरी व्यक्तियों के नियुक्ति कर रही है जिसका उत्तराखण्ड क्रांति दल विरोध करता है। दल के महामंत्री एवं मीडिया प्रमुख मनमोहन लखेड़ा ने कहा कि उत्तराखण्ड का इतिहास देश रक्षा में अहम है। यहां के अधिकांश निवासी सैन्य सेवा में अपना योगदान दे रहे हैं। ऐसे में सैनिक कल्याण एवं पुर्नवास निदेशालय में यहां के रिटायर्ड सैन्य अफसरों को तवज्जो दी जानी चाहिए। चूंकि वे उत्तराखण्ड की विषम भौगोलिक सांस्कृतिक परिस्थितियों से वाकिफ हैं और अगर सरकार उन्हें निदेशालय मंे कार्य करने का अवसर देती है तो वे अधिक सूझबूझ से सैनिक कल्याण के लिए कार्य कर सकते हैं लेकिन कांग्रेस सरकार बाहरी प्रदेश के सैन्य अफसरों को यहां नियुक्ति प्रदान कर अपने प्रदेश के सैन्य अफसरों का अपमान कर रही है जिसे उत्तराखण्ड क्रांति दल किसी भी दशा मंे बर्दाश्त नहीं करेगा। लखेड़ा ने कहा कि कांग्रेस सरकार को सैन्य नियमावली में इस मुद्दे को शामिल कर देना चाहिए  कि भविष्य मंे सैनिक कल्याण निदेशालय मंे जो भी नियुक्तियां की जायेंगी उन पर उत्तराखण्ड में रहने वाले रिटायर्ड  सैन्य लोगों को ही रखा जायेगा। उन्होंने कहा कि सैनिक कल्याण के मामलों में सरकार को राजनैतिक हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। 

वाहनों में ठूसें जा रहे स्कूली बच्चे

श्रीनगर गढ़वाल/देहरादून, 5 अगस्त, । कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में कुछ वाहन चालक स्कूल बसों एवं अन्य वाहनों में स्कूली बच्चों को जानवारों की तरह ठूंस-ठंूसकर भर रहे हैं जिससे स्कूली छात्रों के जीवन पर खतरा मण्डरा रहा है। गौरतलब है कि श्रीनगर क्षेत्र व आस-पास के प्राइवेट स्कूलों द्वारा स्कूल बसों व अन्य वाहनों में तय सीटों से अधिक छात्र-छात्राओं को बैठाने पर आरटीई एवं आरटीआई कार्यकर्ता कुशलानाथ ने कार्यवाही की मांग की है। इस संदर्भ में उन्होने प्रदेश के बाल संरक्षण अधिकार आयोग को ज्ञापन भेजकर कहा है कि प्राइवेट स्कूल मनमानी कर स्कूल बसों में बच्चों को ठूंस ठूंस कर बैठाकर सुप्रीम कोर्ट के नियमों की अनदेखी करते हैं, जिन पर सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए। ज्ञापन में उन्होने मांग की है कि स्कूल बस व अन्य चार पहिये वाले वाहनों में सफर करने वाले छात्र-छात्राओं के नाम पंजीकृत हो व साथ ही हर बस पर तय सीटों के अनुसार बच्चों के नाम लिस्ट बस के दरवाजे पर लिखा जाये जिससे बच्चों की संख्या का पता लग सके। बहरहाल अब देखना ये होगा कि आरटीई एवं आरटीआई कार्यकर्ता कुशलानाथ की ये मुहिम कितनी कारगर साबित होती है।

नशे मंे धुत्त युवक टंकी पर चढ़ा

देहरादून, 5 अगस्त, । बीती रात नशे में धुत्त युवक दून अस्पताल की टंकी में चढ़ गया। पुलिस में बड़ी मशक्कत से उसको उतारा और पुलिस एक्ट में उसका चालन कर गिरफ्तार कर लिया। मिली जानकारी के अनुसार बीती रात राकेश बिष्ट पुत्र महिपाल बिष्ट रात बारह और एक बजे के बीच दून अस्पताल मे किसी से मिलने पहुंचा बताते है कि यहां अपनी महिला मित्र के साथ उसकी किसी बात को लेकर कहा सुनी हो गई बताया जाता है कि राकेश बिष्ट शराब के नशे में था और उसने अत्यध्कि शराब का सेवन कर लिया था। महिला के साथ कहा सुनी के बाद वह यहीं दून अस्पताल परिसर मे पड़ी पानी की टंकी पर चढ़ गया और जोर-जोर से चींखना चिल्लाना शुरु कर दिया। जिससे मौके पर बड़ी संख्या में लोग इकठठा हो गये। इसकी सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस ने युवक को किसी तरह से नीचे उतारा और उसे गिरफ्तार कर लिया।


(राजेन्द्र जोशी)



राज्य आपदा प्राधिकरण (एसडीएमए) पर अंतिम लगी मुहर, नहीं बनेगा पुर्नवास और पुर्नगठन प्राधिकरण

देहरादून, 5 अगस्त। उत्तराखण्ड राज्य मंत्रिमण्डल की बैठक में सोमवार को राज्य आपदा प्राधिकरण (एसडीएमए) पर अंतिम मुहर लग गई। इसके अलावा उत्तरकाशी जनपद के मेहर गुज्जर जाति के लोगों को ओबीसी में शामिल किया गया है, वहीं पुलिस की भांति अन्य विभागों में भी राज्य में तैनाती न देने वाले कर्मचारियों की नई भर्ती के रास्ते भी खुल गए हैं। अब राज्य में पुर्नवास और पुर्नगठन प्राधिकरण नहीं रहेगा। 
सोमवार को यहां राज्य मंत्रिमण्डल की बैठक की जानकारी देते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने बताया कि प्रदेश में आपदा प्रबंधन प्राधिकरण मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित किया जाएगा, जिसमें राज्य मंत्रिमण्डल के सदस्य और विभाग के मंत्रियों को रखा गया है। वहीं एक अन्य कमेटी में सचिव आपदा प्रबंधन के नेतृत्व में आपदा से प्रभावित महकमों के सचिवों को जोड़ते हुए बनाई गई है। यह कमेटी पांच करोड़ से उपर के कार्यों की स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली कमेटी से स्वीकृति लेगी। इसके बाद राज्य में अब पिछले दिनों से चर्चा का विषय बना पुर्नवास और पुर्नगठन प्राधिकरण के प्रस्ताव को सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है। वहीं एक अन्य फैसले में राज्य सरकार ने फैसला किया है कि हरिद्वार-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग के चैड़ीकरण के दौरान इसके मध्य आने वाले भू-खण्डों का वह राष्ट्रीय हाईवे आथोरिटी ऑफ इण्डिया से मुआवजा लेगी। वहीं एक अन्य फैसले में राज्य सरकार के उद्यान विश्वविद्यालय भरसार सहित कुमाऊं के अन्य विश्वविद्यालय को पांच हजार रूपया अतिरिक्त सहायता देने की बात भी स्वीकार की है। वहीं एक अन्य फैसले में राज्य कैबिनेट ने वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना के तहत ऋण लेने वालों पर स्टाम्प ड्यूटी में छूट दी है, वहीं ग्रामीण अभियंत्रण विकास कार्यालय पौड़ी में संयुक्त विकास आयुक्त के पद को मंजूरी दी, जबकि राज्य बनने के बाद प्रदेश में अपनी आमद न कराने वाले पुलिसकर्मियों की तरह राज्य सरकार ने अन्य विभागों में भी नई भर्ती का रास्ता खोल दिया है। वहीं राज्य में चतुर्थ श्रेणी पदों पर कार्यरत अर्हता रखने वाले कर्मचारियों को तृतीय श्रेणी में पदोन्नति में छूट देने का प्रावधान लागू कर दिया है, वहीं इस प्रावधान में चालक श्रेणी में कार्यरत कर्मचारियों को भी 25 फीसदी की छूट दी गई है। राज्य सरकार ने आपदा राहत दल (डिजास्टर रिस्पोंस फोर्स) को भी मंजूरी दे दी है, इसके तहत पहले चरण में दो कम्पनियों गढ़वाल में और दो कुमांउ में स्थापित की जाएंगी, प्रत्येक कम्पनी में 130 लोग होंगे, इसका मुख्यालय देहरादून में होगा। मुख्य सचिव ने बताया कि आपदा के दौरान मारे गए लोगों को सुनामी की तर्ज पर राहत राशि के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा, जो अन्य किसी प्रयोग में नहीं आ पाएगा, क्योंकि आपदा के दौरान मृत हुए वे लोग जिनकी शिनाख्त हो चुकी है, उनको तो मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा जो हर कार्य के लिए वैध होगा, लेकिन जो लोग गायब हो गए हैं, उनके लिए राज्य सरकार जो मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करेगी, वह केवल मुआवजा राशि को प्राप्त करने के लिए होगा और उसका प्रयोग अन्यत्र वैध नहीं होगा। 

सोमवार और श्रावण शिवरात्रि के अवसर पर उमड़े शिवभक्त

देहरादून, 5 अगस्त, । भारी संख्या में कांवडि़यों और श्रद्धालुओं ने श्रावण मास के सोमवार और श्रावण शिवरात्रि के शुभ अवसर पर दून के शिवालयों में भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। श्रावण शिवरात्रि को लेकर द्रोणनगरी में उल्लास दिखायी दिया। वर्षों बाद यह अद्भुत संयोग पड़ा है जब सोमवार और श्रावण शिवरात्रि एक ही दिन पड़ी है। विद्वानों के अनुसार आज भगवान शिव का अभिषेक कर पुण्यलाभ अर्जित किया गया है। श्रावण शिवरात्रि पर जलाभिषेक के लिए मंदिरों में देर रात से ही लम्बी-लम्बी लाईनें लगनी शुरू हो गयी थी। टपकेश्वर महादेव मंदिर में कांवडि़यों और श्रद्धालुओं द्वारा जल चढ़ाने लिए अलग-अलग व्यवस्था की गयी थी ताकि किसी को भी परेशानी उत्पन्न न हो और सभी आराम से जलाभिषेक कर सकें। टपकेश्वर में भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों का विशेष श्रृंगार किया गया। वहीं शहर के अन्य शिवालयों में भी जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। राजधानी दून के सभी शिवालयों में श्रावण शिवरात्रि पर पूरा दिन भजन-कीर्तन की गंूज सुनाई दी। शिव भक्तों ने भोलेनाथ को मनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। श्रद्धालुओं ने जल, दूध, गंगाजल, दही, शहद से अभिषेक कर बिल्व पत्र से विशेष अर्चना की गयी। सहारनपुर चैक स्थित पृथ्वीनाथ मंदिर में 251 कमल के फूलों से भगवान शिव का श्रृंगार किया गया और शाम के समय विशेष आरती की गई। शिवालयों में सोमवार को रूद्राभिषेक कराने वालों की भी लाईन लगी रही। जंगम शिवालय, गीता भवन, पंचायती मंदिर, प्राचीन शिव मंदिर, श्याम-सुंदर मंदिर, नागेश्वर मंदिर के साथ ही शहर के तमाम मंदिरों में सोमवार को श्रावण शिवरात्रि की रौनक दिखायी दी।

गढ़वाल के इतिहासकारों को पैंसे की कमी नहीं आने देंगेः विजय धस्माना

देहरादून, 5 अगस्त, । हिमालयन ट्रस्ट के उपाध्यक्ष विजय धस्माना का पहाड़ प्रेम उस समय दिखने को मिला जब उन्होंने चिट्ठी-पत्री द्वारा आयोजित अंग्वाल कविता ग्रन्थ के विमोचन में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करते हुए कहा- कि आज पहाड़ का हर संभ्रात व्यक्ति टाई लगाने के बाद अपनी भाषा में बात करना ही भूल जाता है...मैं किसी से अगर गढ़वाली में बात करूँ तो वह अंग्रेजी या फिर हिंदी में बात करना शुरू कर देता है..शायद यही कारण है कि यह भाषा अपनों की ही मार खाते-खाते बोली में तब्दील हो गयी है. अपने गॉव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा जब वे पढ़ा करते थे तब गॉव में 160 परिवार थे आज सात परिवार रह गए हैं... इस पलायन को रोकने के लिए एक कारगर पहल होनी चाहिए. ..उन्होंने कहा है कि हम औरों का इतिहास पढ़कर बड़े हुए हैं ..हमारा इतिहास क्या है यह सबसे बड़ा प्रश्न चिन्हं है..यदि कोई भी व्यक्ति हमारे इतिहास पर काम करे तो हम उसके लिए धन की कमी नहीं होने देंगे. साफ़ नियत से किये हुए कार्य पर कोई भी अंगुली नहीं उठाया. उन्होंने गढ़वाली भाषा के पुरजोर इस्तेमाल की वकालत करते हुए कहा है कि यही हमारी पहचान है इसे लोकभाषा में लाने की हर संभव कोशिश की जानी चाहिए .

खण्डूडी ने दी स्वर्णपदक एवं रजत पदक जीतने पर शुभकामनाऐं 

देहरादून, 5 अगस्त, । मेजर जनरल (से0नि0) भुवन चन्द्र खण्डूड़ी पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड द्वारा आयरलैण्ड में चल रहे 15 वें विश्व पुलिस एवं अग्निशमन पुलिस खेल-2013 में देश की ओर से उत्तराखण्ड पुलिस के 40 वीं वाहिनी पी0एस0सी0 हरिद्वार में तैनात रविन्द्र रौतेला एवं  हरिद्वार पुलिस में तैनात कांस्टेबल मुकेश रावत के स्वर्णपदक एवं रजत पदक जीतने पर दोनों को शुभकामनाऐं देते हुए है कहा है कि दोनों पुलिसकर्मियों ने देश में उत्तराखण्ड पुलिस का गौरव बढ़ाया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक सत्यव्रत बंसल को भी उत्तराखण्ड के दो पुलिस जवानों को अहम कामयाबी मिलने पर अपनी  शुभकामनाऐं दी है। 

दैवीय आपदाओं से सबक नहीं ले रही सरकार, राज्यवासियों को हर वर्ष झेलना पड़ता आपदा से नुकसान  

देहरादून, 5 अगस्त, । उत्तराखंड दैवीय आपदा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील राज्य है। यहां कभी भी कोई दैवीय आपदा आ सकती है। हर वर्ष दैवीय आपदा से राज्यवासियों को नुकसान झेलना पड़ता है, लेकिन सरकार इन आपदाओं से सबक लेती नहीं दिख रही है। पिछले वर्ष भी ऊखीमठ और उत्तरकाशी क्षेत्रों में दैवीय आपदा से तबाही हुई थी, लेकिन सरकार ने कोई सबक नहीं लिया। सरकार की अदूरदर्शिता के चलते दैवीय आपदा से निपटने को कोई ठोस कार्य योजना नहीं बनी। इसी का परिणाम है कि इस समय राज्य में आई दैवीय  आपदा में हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। सरकार का आपदा प्रबंधन तंत्र एकदम फेल साबित हो रहा। राज्य में अतिवृष्टि के चलते भूस्खलन और बाढ़ आने से सैकड़ों लोग काल का ग्रास बन गए जबकि सैकड़ों लोग घायल हो गए। कई लोग अभी भी लापता हैं। कई गांव पूर्ण रूप से तबाह हो गए, लोगों के सिर ढकने के लिए न मकान बचे, आजीविका चलाने के लिए न दुकान, होटल, रेस्टोरेंट और नहीं  ढाबे बचे सब आपदा की भेंट चढ़ गए। दैवीय आपदा की भयानक मार से कई महिलाएं विधवा हो गई, कई पुरुष विधुर हो गए और कई बच्चे अनाथ हो गए। आपदा के बाद डेढ़ माह बीतने के बाद भी आपदाग्रस्त क्षेत्रों में स्थिति विकट बनी हुई है, लोगों तक राहत नहीं पहुंच पा रही है। नदियों के किनारे तटबंध  बनाए जाने की सरकार ने जरूरत नहीं समझी, जिस कारण  नदियों के किनारे  बसी बस्तियों को नदियों ने अपने आगोश में समा लिया। सबसे अधिक  नुकसान नदियों के किनारे स्थित भूभाग में ही हुआ। नदियों से बड़ी मात्रा भूकटाव और भूधंसाव हुआ, जिस कारण मकान, दुकान, खेत,  खलिहान सब  तबाह हो गया। सड़कों का कई किमी हिस्सा साफ हो गया, यह पता भी नहीं चल पा रहा है कि यहां कभी सड़क रही हो। सड़कें तबाह  होने से कई गांवों का संपर्क कट गया, गांवों में लोगों का खाद्यान्न समाप्त  हो गया, सरकार  आपदा पीडि़तों तक राहत पहुंचा पाने में विफल साबित हो रही है। राहत और  बचाव कार्य सरकार के कुप्रबंधन की भेंट चढ़ गया है। कुछ लोगों के पास राहत सामग्री चार-चार बार पहुंच रही है और किसी के  पास एक बार भी नहीं  पहुंची। यह सब कुप्रबंधन के कारण से हो रहा है। सरकार राहत और बचाव कार्य का प्रबंधन नहीं कर पा रही है। नाले, खाले और नदियों के किनारे  जनप्रतिनिधियों द्वारा अपने वोट बैंक की खातिर अवैध बस्तियां बसाकर बाद में उन्हें वैध कर दिया जा रहा है।  

दून में बांग्लादेश से तस्करी कर लाई जा रही हैं युवतियां

देहरादून, 5 अगस्त, । राजधानी दून में बांग्लोदश की युवतियों की तस्करी की जा रही है, इन युवतियांे से वैश्यावृत्ति के धंधें किए जा रहे हैं, ऐसी ही एक युवती को पुलिस के हवाले किया गया है, पुलिस इस युवती से कड़ी पूछताछ कर रही है। पुलिस ने मिली जानकारी के अनुसार सहस्त्रधारा रोड़ निवासी नवदीप रामानंद को बीते सप्ताह राष्ट्रीय कांग्रेस बाबू जगजीवन राम पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था, इसी बीच एक सिख युवक ने उनके पास आकर उनसे पार्टी का जिलाध्यक्ष बनाने की इच्छा जाहिर की और कहा कि वह उनकी पार्टी का जिलाध्यक्ष बनना चाहता है और उसके लिए वह पैसे भी देने को तैयार है। इस पर नवदीप ने जिलाध्यक्ष बनाने के लिए लाखों रूपये की मांग की, जिस पर सिख युवक ने पांच हजार रूपये और एक युवती को उनके पास भेज दी। नवदीप ने 1500 रूपये नगद और 3500 रूपये का चैक भेजा था। वहीं सोमवार सुबह करीब साढ़े चार बजे एक युवती को नवदीप के पास भेगा गया, इस युवती को देखकर नवदीप के पांव खिसक गए, युवती की उम्र लगभग 15 व 16 साल की है, इस युवती ने जब नवदीप से हिंदी में बात की तो उसे हिंदी समझ में नहीं आ रही थी, वह बता रही थी कि वह बांग्लादेश से आई है और उसके साथ कुछ और युवतियां भी यहां आई है। युवती ने बताया कि नौकरी दिलाने के बहाने कई युवतियों को दून लाया गया है। नवदीन ने बांग्लादेश से लाई गई युवती की सारी जानकारी के बारे में पुलिस को बताया और कहा कि वह 11 बजे तक उनके पार्टी कार्यालय में आ जाए। सुबह तक पुलिस के आने का नवदीप इंतजार करता रहा, लेकिन पुलिस नहीं आई। इस बीच बांग्लादेश से आई युवती को लेकर नवदीप एसएसपी कार्यालय जा पहुंचा। जहां इस युवती को एसपी ग्रामीण ममता वोहरा को सौंप दिया गया है। ममता वोहरा ने इस युवती से पूछताछ की तो इस युवती को हिंदी समझ नहीं आई। बाद में उसकी भाषा में बात करने के लिए अन्य पुलिसकर्मियों को बुलाया गया, एलआईयू भी युवती से पूछताछ कर रही है। पुलिस ने अनुसार युवती से पूछताछ करने के बाद उस सिख युवक की गिरफ्तारी की योजना बनाई जाएगी। 

सरकारी जमीनों पर भूमाफियाओं की नजर, राजधानी में रसूख वालों की हो रही मौज

देहरादून, 5 अगस्त, । राजधानी में जमीनों की ऊंची कीमतों के कारण सरकारी जमीनों पर भूमाफियाओं की निगाहें लगी हैं। सरकारी तंत्र का सहयोग लेकर वह जमीनों को खुर्द-बुर्द कर रहे हैं और जमकर चांदी काट रहे हैं। नगर निगम से लेकर ग्रामसभाओं की जमीने माफियाओं के चंगुल में हैं। परंतु कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति भी नहीं की जा रही है। सरकारी जमीनों में हेराफेरी को लेकर विपक्षी दल भाजपा भी चिंता जता रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय सचिव त्रिवेंद्र सिंह रावत के अनुसार नगर निगम में 21 नई ग्रामसभाओं को सम्मिलित कराने के पीछे भूमाफियाओं को संरक्षण दिया जाना ही अहम कारण है। इससे नेता, नौकरशाह और भूमाफियाओं की तिजोरियां भर जाएंगी और ग्रामीणों के हाथ कुछ नहीं आएगा। विकास के नाम पर इन ग्रामसभाओं के लोगों को सब्जबाग दिखाए जा रहे हैं जो शायद ही पूरे हों। दून में निगम की बेशकीमती जमीनों पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा है। इनमें होटल स्वामी, स्कूल और अन्य संस्थान शामिल हैं। इनके कब्जे से जमीनों को छुडाना आसान नहीं है। इनकी ऊंची पहुंच और रसूख कब्जा छुडाने के आड़े आ रहा है। मेयर विनोद चमोली का कहना है कि बड़े लोगों पर कार्रवाई होने की सूरत में वह कोर्ट की शरण ले लेते हैं। ऐसे कई मामले हैं जो कोर्ट में पेंडिंग पड़े हुए हैं। निगम की जमीन को कब्जाधारकों से छुडाने के लिए योग्य वकीलों के पैनल की जरूरत है। जो कोर्ट में बेहतर ढंग से पैरवी कर सकें। नगर निगम से इतर ग्रामसभा की जमीनें भूमाफियाओं के लिए आसान निशाना हैं। यहां पर जनप्रतिनिधियों की लिप्तता के कारण उनकी राह काफी आसान हो जाती है। ग्रामीणों के आवाज उठाने के बाद भी कार्रवाई नहीं होती और प्रशासन के पास रिपोर्ट तक भेजने की जहमत नहीं उठाई जाती। कई जगह ग्राम प्रधान, पंचायत सदस्य, वार्ड मेंबर और सरकारी कर्मचारी मिलकर सरकारी जमीनों को ठिकाने लगा रहे हैं। 

आपदा ने किया दावेदारों का मुंह बंद, लालबत्ती की उम्मीद लगाए नेताओं के सपने बिखरे

देहरादून, 5 अगस्त, । कांग्रेस सरकार में लालबत्ती के दावेदारों का इतंजार लंबा होता जा रहा है। पहले निकाय चुनाव के बाद उन्हें तोहफा दिए जाने की उम्मीद थी, जो पूरी न हो सकी। तों वहीं अब  आपदा के कारण दावेदारों ने जहां चुप्पी साध ली है तो वहीं दूसरी ओर सरकार की मंशा भी लालबत्ती बांटने की नहीं दिखाई दे रही है, ऐसे में नेताओं के अरमानों पर पानी फिरना तय है। पूर्ववर्ती तिवारी सरकार में जिस प्रकार कांग्रेसियों को लालबत्ती बांटी गई। उसके चलते कई दावेदारों के उम्मीद थी कि इस बार भी कुछ वैसा ही होगा और उन्हें सरकारी सुख सुविधाएं भोगने का मौका मिल जाएगा। परंतु तिवारी सरकार से इतर बहुगुणा सरकार ने आरंभ से ही लालबत्ती के मामले में कंजूसी बरती। जिससे दावेदारों परेशान हो गए और उनके समर्थक निराश। लालबत्ती न बांटने के पीछे कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति को भी अहम कारक बताया जा रहा है। कांग्रेस कई धड़ों में बंटी हुई है। ऐसे में बहुगुणा सरकार के लिए लालबत्ती बांटना किसी सिरदर्द से कम नहीं होगा। हालत यह है कि छोटे से लेकर बड़े कांग्रेसी भी लालबत्ती हासिल करने की लाइन में लगे हुए हैं। प्रदेश नेतृत्व को भलीभांति है। निकाय चुनाव में कुछ नेता पार्टी लाइन पर काम करने के लिए इसलिए तैयार हुए क्योंकि उन्हें निकाय चुनाव पश्चात् लालबत्ती से नवाजने का आश्वासन दिया गया था। परंतु ऐसा कुछ नहीं हुआ और अब आपदा के कहर से जहां प्रदेश में शोक का माहौल है तो वहीं दावेदारों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। विपत्ति की इस घड़ी में वह अपने लिए कुछ मांगने की गुस्ताखी भी नहीं कर सकते। इससे सरकार को राहत मिली है और दावेदार सही समय का इंतजार कर रहे हैं। 

आपसी लड़ाई से कमजोर हुआ उक्रांद, अरमान ही रह गया क्षेत्रीय ताकत बनना

देहरादून, 5 अगस्त, । उक्रांद के भीतर चल रही वर्चस्व की जंग का खामियाजा उसे जनाधार के खिसकने के रूप में चुकाना पड़ रहा है। राज्य निर्माण आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले इस दल का महज एक विधायक वर्तमान विस में है, जबकि राज्य निर्माण के बाद हुए पहले चुनावों में उसके चार विधायक चुने गए थे और उसके बाद 2007 में उसके तीन विधायक थे, लेकिन आज उक्रांद अपने अंदरूनी झगड़ों के कारण हाशिए पर चला गया है और अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए जूझ रहा है। विगत 30 वर्षों का इतिहास देखें तो उक्रांद कभी भी मजबूत क्षेत्रीय ताकत के रूप में नहीं उभर पाया है। इसके पीछे दल में चल रही वर्चस्व की लड़ाई ने अहम भूमिका निभाई है और इसने उक्रांद का बेडागर्क करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वर्तमान में भी उक्रांद के हालात कुछ ऐसे ही हैं। काशी सिंह ऐरी और त्रिवेंद्र सिंह पंवार के बीच चल रही अदावत की लड़ाई से हालात बेकाबू हो गए है। दोनों नेता अपने सिपहसलारों के साथ मैदान में डटे हुए हैं, उन्हें इससे कोई सरोकार नहीं है कि उक्रांद की इस आपसी लड़ाई के कारण दल हाशिए पर सिमटता जा रहा है। दल के केन्द्रीय अध्यक्ष काशी सिंह ऐरी की तरफ से साफ निर्देश दिए गए है कि कोई भी पदाधिकारी या कार्यकर्ता दल से अलग हुए धडों के बारे में बयान नहीं देगा, क्योंकि बयान देने से उन धडों पर कोई असर नही पडेगा पर हमारे दल और जनता पर इसका असर पडेगा। ऐसे में उन सभी को नुकसान पहुॅच सकता है जो लोग पंचायत चुनाव या फिर 2017 की विधानसभा की तैयारियों में जुट गये हैं। जबकि त्रिवेंद्र सिंह पंवार का खेमा दल के केंद्रीय कार्यालय पर कब्जे को लेकर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन उसके हाथ कुछ खास नहीं लग रहा है। 

मत्स्य पालन में रोजगार के बेहतर अवसर. शीतजल मात्स्यिकी योजना में 206 तालाब बने

देहरादून, 5 अगस्त, । सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर बेरोजगार अपने भविष्य को संवार सकते हैं और अपने सपनों को पंख लगाकर बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं। मत्स्य पालन के जरिए वह अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर सकते हैं और अपने साथ दूसरे लोगों को भी रोजगार प्रदान कर सकते हैं। राज्य में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रयास कर रही है। जिसके तहत मार्च 2012 से अब तक कुल 124 लाख रूपये व्यय किए जा चुके हैं। इसके तहत मत्स्य पालकों को आधुनिकतम प्रशिक्षण दिया जाना भी शामिल है। मात्स्यिकी विकास हेतु शीतजल मात्स्यिकी का विकास योजना संचालित की जा रही है। जिसके अंतर्गत 100 वर्ग मीटर के 206 यूनिट तालाबों का नवनिर्माण किया गया है। विगत एक वर्ष में रोजगार परक योजनाओं के माध्यम से 458 प्रत्यक्ष एवं 1374 अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित किए गए हैं। मत्स्य पालन विभाग में 33 मत्स्य निरीक्षकों की नियुक्ति की गई जो विकास कार्यों की देखरेख करेंगे। राज्य के ऊंचाई वाले स्थानों चमोली, रूद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, टिहरी बागेश्वर, पिथौरागढ़ एवं चंपावत में ट्राउट मत्स्य विकास योजना की शुरूआत होने जा रही है। जिसका लाभ मत्स्य पालकों को मिलेगा। उन्नत प्रजाति के मत्स्य बीज उपलब्ध कराने हेतु हैचरी का निर्माण उधमसिंहनगर में प्रस्तावित है। इसकी स्थापना के बाद 50 से 60 लाख मत्स्य बीज उत्पादित हो सकेंगे। राज्य में संतुलित मत्स्य आहार की उपलब्धता के लिए मत्स्य आहार विकास योजना का क्रियान्वयन किया जाएगा। 

सेहत पर पड़ रही मौसम की मार, अस्पतालों में लग रही मरीजों की लाइन

देहरादून, 5 अगस्त, । मौसम की मार सेहत पर भी पड़ रही है। बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग बीमारियों का शिकार हो रहे हैं, जिसमें डायरिया, वायरल, खांसी जुकाम जैसी बीमारियों से लेकर आंतों में सूजन भी शामिल हैं। इसके कारण सरकारी और निजी चिकित्सालयों में मरीजों की खासी तादात देखने को मिल रही है। दिन के समय पल-पल बदलता मौसम लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन रहा है। बारिश होने के कारण मौसम में ठंडक का अहसास होता है, तो वहीं दिन के समय तेज धूप लोगों को परेशान कर रही है। यही नहीं कभी धूप के साथ बारिश होने के कारण भी शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। वातावरण के तापमान के अनुरूप शरीर में परिवर्तन न होने के कारण भी लोग बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं। अस्पतालों में बुखार, जुकाम और खांसी के मरीजों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। बुखार में सर्वाधिक प्रकोप वायरल का है, जिससे उबरने में मरीज को अमूमन पांच से सात दिन लग रहे हैं। बारिश के कारण कई स्थानों पर दूषित और मटमैले पेयजल की आपूर्ति हो रही है, इसके पीछे पेयजल लाइनों के क्षतिग्रस्त होने को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। इससे लोगों को पेट संबधी बीमारियां होने लगी हैं, उन्हें उल्टी, दस्त हो रहे हैं और खतरनाक डायरिया अपने पैर पसार रहा है। डायरिया के मरीज भी डाक्टरों के पास इलाज करा रहे हैं। पेट संबधी बीमारियों के पीछे खान पान के गलत तरीकों को भी कसूरवार बताया जा रहा है। बरसात के समय खाद्य पदार्थों पर फंगस लग जाती है और जल्दी खराब हो जाते हैं, इसके साथ ही खुले में रखे खाद्य पदार्थों को खाना भी बीमारियों को न्यौता देना है।

बारिश के चलते जलमग्न हुआ दून, पानी में डूबी सड़कें, घरों में घुसा पानी

देहरादून, 5 अगस्त, । राजधानी में एक बार फिर बारिश के तीखे तेवर देखने को मिले। बारिश के कारण कई जगह लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। बारिश के कारण नदियों में उफान देखने को मिला और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन को मजबूर हुए, यही नहीं बारिश के कारण घरों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में पानी घुस गया और लोगों का कीमती सामान खराब हो गया। दून में सोमवार सुबह बारिश ने लोगों में दशहत भर दी, जिस समय बारिश आरंभ हुई उस समय लोग अपने आफिसों के लिए प्रस्थान की तैयारी कर रहे थे, लेकिन बारिश के कारण उन्हें आफिस पहुंचने में देरी हुई। बारिश के कारण कई स्थानों पर पानी जमा हो गया, जिसके कारण वाहन रेंगरेंग कर बमुश्किल आगे बढ़ते दिखाई दिए। नदियों के किनारे रहने वाले लोगों ने सुरक्षा की दृष्टि से घर पर रहना ही मुनासिब समझा। नदियों में पानी का प्रवाह बढ़ता देख वह अपना सामान समेटते भी दिखाई दिए। बारिश के कारण कई घरों में छतों से पानी टपकने लगा। लोग घरों के ऊपर तिरपाल डालते नजर आए। धर्मपुर, कारगी, पटेलनगर, राजपुर रोड, चकराता रोड, कालागढ़, प्रेमनगर, रायपुर, नेहरूग्राम, सहारपुर चैक, कांवली रोड आदि स्थानों पर बारिश के कारण लोगों के घरों में पानी घुस गया। सुबह साढ़े नौ बजे के करीब शुरू हुई बारिश एक घंटे तक चली, परंतु इस दौरान उसने शहर को तरबतर कर दिया, कुछ देर रूकने के बाद बारिश फिर शुरू हुई। इसके बाद शहर की सड़कें पानी में डूब गईं और मुख्य मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। दून मे हो रही भारी बारिश के कारण बरसाती नदियां उफान पर हैं, ऐसे में इनके किनारे रहने वाले लोगों के आशियानों पर एक बार फिर खतरा मंडराने लगा है। नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए लोगों को सर्तकता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। दून की बिंदाल, रिस्पना और टौंस नदियों में बारिश के कारण अथाह जलप्रवाह बह रहा है। ऐसे में लोगों के बहने की आशंका प्रबल हो गईं हैं। पूर्व में भी इन नदियों में पानी की अत्यधिक मात्रा के कारण लोगों को हटाया जाता रहा है। नदियों से होने वाले कटाव से कुछ दूरी पर स्थिति घरों को भी खतरा पैदा हो गया है। सुरक्षा के लिए बनाए गए पुश्ते पानी की तीव्रता को नहीं झेल पा रहे हैं और पूर्व में ढह चुके हैं, जिसके चलते हालात भयावह हो चले हैं। 

स्वीकृति के सोलह वर्ष बाद भी नहीं बन पाई सड़क

देहरादून, 5 अगस्त, । शंभू चैकी-पंजिया मोटर मार्ग स्वीकृति के 16 वर्ष बीतने के बाद भी नहीं बन पाया। मोटर मार्ग के न बन पाने से क्षेत्रवासियों को कई किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। यहां के ग्रामीणों के लिए मोटर मार्ग सपना ही रह गया है। वर्ष 1997 में शंभू चैकी से पंजिया तक 13 किलोमीटर लंबे मोटर मार्ग को तत्कालीन यूपी सरकार द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई थी, लेकिन यह मार्ग एक किलोमीटर से ज्यादा नहीं बन पाया। मोटर मार्ग के न बन पाने से बाना खत के दुधौऊ, पंजिया, बनसार, सैरी व ठुरेऊ गांवों के ग्रामीणों को आज भी कई किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। इन गांवों के लोग सड़क सुविधा से वंचित हैं। इस मार्ग को चकराता के तत्कालीन विधायक द्वारा स्वीकृति दिलाई गई थी, उत्तराखंड राज्य बनने के बाद भी इस मार्ग की सुध नहीं ली गई। गांव तक मोटर मार्ग न पहुंचने से इन गांवों के लोग लगातार पलायन कर रहे हैं जिस कारण गांव खाली होते जा रहे हैं। 16 वर्ष बाद भी इन गांवों के ग्रामीणों का सड़क से जुड़ने का सपना अधूरा रह गया है। सड़क से न जुड़े होने के कारण यहां के ग्रामीणों को सामान खच्चरों में ढोना पड़ता है। खच्चरों का भाड़ा अधिक होने से ग्रामीणों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। गंाव में किसी के बीमार होने पर उसे पीठ पर या चारपाई या कुर्सी पर सड़क तक पहुंचाया जाता है। कई बार समय पर उपचार न मिलने के कारण मरीज की मौत तक हो जाती है। जब ग्रामीण सामान खरीदने के लिए बाजार जाते हैं तो पैदल दूरी तय करने के कारण पूरा दिन आने-जाने में ही लग जाता है, जिस कारण ग्रामीणों के अन्य कार्य प्रभावित होते हैं। ग्रामीण कई बार विभागीय अधिकारियों से मार्ग का निर्माण कार्य शुरु करने की मांग कर चुके हैं लेकिन अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। विभागीय अनदेखी से ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। स्थानीय ग्रामीण जगत सिंह का कहना है कि यदि विभाग का यही रवैया रहा तो ग्रामीण आंदोलन करने का बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी कि विभाग और शासन-प्रशासन की होगी। एक ओर सरकार गांवों को सड़कों से जोड़ने के बड़े-बड़े वायदे करती है वहीं इस स्वीकृत मोटर मार्ग तक का निर्माण नहीं हो पाया।  

सितम्बर में निकल सकेंगें बदरीनाथ में फंसे वाहन

देहरादून, 5 अगस्त,। यदि मौसम ने साथ दिया तो सितबंर के अंतिम सप्ताह मे बदरीनाथ मे फॅसे वाहनों को निकाला जा सकेगा। लामबगड़ मे स्थापित किए जाने वाले वैली ब्रिज को मलारी से लामबगड़ पंहुचाया जाऐगा। तिब्बत सीमा मे घस्तोली से माना पास तक की 30 किमी. सड़क कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है।  केंद्र से दस करोड़ की धनराशि मिलने के बाद अब सड़क मरम्मत कार्याे के जल्द से जल्द पूरा किए जाने की उम्मीदें जगी है। विगत 16 जून से बदरीनाथ मे फॅसे वाहनों के स्वामियों को अब सितबंर माह के अंितम सप्ताह तक का इंतजार करना होगा, यदि सब कुछ ठीक रहा तो सितंबर के अंतिम सप्ताह से वाहनों को निकालने का काम शुरू हो जाऐगा।  बदरीनाथ नेशनल हाईवे अब भी पांडुकेश्वर से बेनाकुली तक अवरूद्ध है, यहॉ करीब साढे़ चार किमी0 नई सड़क व एक मोटर ब्रिज का निर्माण किया जाना है। हालंाकि 16 व 17 जून की त्रासदी के बाद जोशीमठ से बदरीनाथ तक मोटर मार्ग कई स्थानों पर अवरूद्ध हो गया था, तब सरकार व बीआरओ के सामने गोविंदघाट, पांडुकेश्वर व लामबगड़ आदि स्थानों पर फॅसे तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकालने की चुनौती थी, क्योंकि फॅसे तीर्थयात्रियों को सेना व आईटीबीपी के मदद से अवरूद्ध स्थलों के ऊपर से चटटानो के रास्ते रस्सियों के सहारे निकाला जाना था, जिसके चलते बीआरओ अवरूद्ध स्थलों पर सड़क कटिंग के लिए ब्लास्ट नही कर सकी। यात्रियों के सुरक्षित निकल जाने के बाद ही बीआरओ ने गोंिवदघाट, पिनौला व पांडुकेश्वर मे अवरूद्ध मार्गाे को खोलते हुए वाहनों की आवाजाही हेतु बनाया। अब शासन-प्रशासन व बीआरओ के सामने बदरीनाथ मे फॅसे वाहनेों को हर हाल मे वाहर निकालने की चुनौती है, यदि वहॉ फॅसे सेकड़ो वाहन शीतकाल से पूर्व नहीं निकाले जाते तो बर्फबारी के बाद वाहनेां की क्षति होना स्वाभाविक है। इसे लेकर अब बीआरओ ने पांडुकेंश्वर से बदरीनाथ तक के मार्ग को वाहनों की आवाजाही लायक बनाने के लिए सितबंर के अंतिम सप्ताह का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए बीआरओ ने नीती घाटी के मलारी मे रखे गए वैली ब्रिज को लामबगड़ पंहुचाने को फैसला किया है, ताकि बदरीनाथ मे फॅसे वाहनेां को तय समय पर निकाला जा सके। लामबगड़ मे वैली ब्रिज निर्माण से पूर्व ढाई किमी0 तथा वैली ब्रिज के बाद जेपी हेलीपेड तक दो किमी0 नई सड़क का निर्माण किया जाना है।  पांडुकेश्वर से बदरीनाथ तक कई स्थानों पर मार्ग अवरूद्ध होने के कारण बीआरओ द्वारा बदरीनाथ से हनुमान चटटी तक के मार्ग को दुरस्त रखने के लिए माणा-माणा पास रोड पर तैनात मशीनों को लगाना पड़ा जिसके चलते भारत-तिब्बत चीन सीमा को जोड़ने वाला घस्तोली-माणापास की करीब तीस किमी0 सड़क कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त है, जिसकी मरम्मत नहीं की जा सकी है। बीआरओ के 21 टास्क फोर्स के कमांडर कर्नल निलेश चंदाराना के अनुसार उनके सामने बार्डर एरिया की रोड को खोलने की जिम्मेदारी तो है ही लेकिन बदरीनाथ मे फॅसे सैकड़ो वाहनों को भी बर्फबारी से पूर्व सुरक्षित निकालने की चुनौती भी है। वे कहते है कि इस कार्य को अंजाम देने के लिए उन्होने दो पेाकलेंड व दो डोजर मशीनों की डिमांड दी थी, पोकलेंड मशीन तो पंहुच गई है, डोजर पंहुचने की प्रतीक्षा है। कहा कि यदि मौसम ने साथ दिया, और काई बड़ा लैंड स्लाइड नही हुआ तो सितबंर के अंतिम सप्ताह तक पांडुकेश्वर से बदरीनाथ तक मार्ग को वाहनों की आवाजाही लायक तो बना ही दिया जाऐगा। कर्नल निलेश बताते है कि उन्है सड़को की हुई क्षति के लिए केंद से दस करोड़ की धनराशि प्राप्त हो चुकी है, और टास्क फोर्स ने ऋषिकेश से रूद्रप्रयाग, रूद्रप्रयाग से गौरीकुंड, कर्णप्रयाग से नारायण बगड़ तथा पंाडुकेश्वर से लामबगड़ तक के क्षतिग्रस्त सड़क मार्गाे की मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया है।




(मनोज इष्टवाल)

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