पटना :- संघ लोक सेवा आयोग द्वारा सिविल सेवा परीक्षा के पाठयक्रम में बदलाव करने के कारण हिन्दी माध्यम के छात्रों का परीक्षाफल बुरी तरह प्रभावित हुआ है बलिक प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करना कठिन से कठिनतर होता जा रहा है। 2010 में प्रारंभिक परीक्षा पास करने वाले छात्रों की संख्या 4296 थी वहीं यह 2011 में घटरक मात्र 1700 रह गर्इ। 2013 में हिन्दी माध्यम के सफल विधार्थियों की संख्या 200 के आसपास भी नहीं है जबकि कुल परीक्षाफल 16000 के लगभग है। ऐसा पाठयक्रम व्यापक परिवर्तन के कारण हो रहा है। पाठयक्रम परिवत्र्तन 1979 में भी हुआ था। 1979 में व्यापक परिवत्र्तन के बाद 3 अरिकित अवसर और 2 साल की आयु सीमा में छूट प्रदान किया गया था। लेकिन इस बार किसी भी प्रकार की छूट नही दी गर्इ। यह फैसला ग्रामीण एवं हिन्दी भाषी छात्र विरोधी प्रवृति दर्शाती है।
आज काजीपुर में एआर्इएसएफ के जिला कार्यालय में हुर्इ बैठक में यह बाते उभर कर सामने आर्इ। बैठक का आयोजन एआर्इएसएफ एवं प्रतियोगिता परीक्षार्थी संघ के संयुक्त तत्वाधान में किया गया था। बैठक की अध्यक्षता दीपक कुमार ने की।
बैठक में यह तय किया गया कि 1979 की तर्ज पर सभी छात्रों को 3 अतिरिक्त अवसर और आयु सीमा में 3 वर्ष की छूट तथा ब्ै।ज् के दोनों पेपर में अलग अलग ब्नजव निर्धारित करने की मांग को लेकर आक्रोश मार्च निकाला जाए। कल पटना विñविñ केन्æीय पुस्तकालय से 3.30 बजे छात्रों का आक्रोश मार्च निकल शहीद भगत सिंह चौक गाँधी मैदान तक जाएगा।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें