उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में भड़की हिंसा के बाद धीरे-धीरे शांतिपूर्ण होते हालात के मद्देनजर जिला प्रशासन ने सोमवार को कर्फ्यू पूरी तरह से हटाने का फैसला लिया है। जिले में सात सितंबर को हिंसा भड़कने के बाद तीन थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया गया था। मुजफ्फरनगर के जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने सोमवार रात संवाददाताओं को बताया कि पिछले कुछ दिनों में कर्फ्यू में ढील देने के बाद हिंसा की कोई घटना सामने नहीं आई। लगातार शांतिपूर्ण होते हालात के मद्देनजर आज से कर्फ्यू पूरी तरह से हटाने का फैसला लिया गया है।
शर्मा ने बताया कि हिंसा के बाद से जिले के तीन थाना क्षेत्रों-सिविल लाइन, कोतवाली और नई मंडी में लगाए गए कर्फ्यू में पिछले चार दिन से दिनभर की ढील दी जा रही थी। इन इलाकों में केवल रात में कर्फ्यू प्रभावी था। जिले में तैनात सेना को भी क्या हटा लिया जाएगा? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि सेना को हटाने के बारे में फैसला मंगलवार को लिया जाएगा, हालांकि अभी अर्धसैनिक बलों और पुलिस की तैनाती यथावत रहेगी।
राज्य सरकार का कहना है कि मुजफ्फरनगर व शामली में हुई हिंसा के चलते हजारों लोग सहायता शिविरों में शरण लिए हुए हैं। मुजफ्फरनगर में तथा शामली में लगाए गए शिविरों की कुल संख्या बढ़ाकर 58 कर दी गई है, जबकि रविवार तक यह संख्या 40 थी। इन शिविरों के माध्यम से अब तक लगभग 50 हजार से अधिक विस्थापितों को मदद दी जा रही है।
मुजफ्फरनगर हिंसा में अब तक 47 लोगों मारे जाने की पुष्टि की गई है। इस सिलसिले में लगभग 150 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और आठ लोगों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई हुई है। गौरतलब है कि दो सप्ताह पहले जिले के कवाल गांव में छेड़खानी की घटना में तीन युवकों की मौत हो गई थी। घटना के बाद सात सितंबर को महापंचायत का आयोजन किया गया था। महापंचायत से लौट रहे लोगों पर पथराव के बाद जिलेभर में हिंसा भड़क गई थी। राज्य सरकार ने हिंसा रोकने में असफल होने के आरोप में तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुभाष चंद्र दुबे को निलंबित कर दिया है। साथ ही छह थाना प्रभारियों को भी निलंबित किया गया है।

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