दिल्ली हाईकोर्ट ने केन्द्र सरकार को कहा कि वह यह पता लगाने के लिए आम आदमी पार्टी के खातों की ‘ताजा’ जांच करे कि उसके धन के स्रोत क्या हैं. न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग और न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ ने केन्द्र के वकील से कहा कि आम आदमी पार्टी के खातों की जांच कर उसे 10 दिसंबर पर सूचित करे.
खंडपीठ ने कहा, ‘आप के गठन के बाद आप एक बार फिर खातों की जांच करें. अगर आप एफसीआरए का कोई उल्लंघन पाते हैं तो कार्रवाई करें, या आप स्थिति के बारे में अदालत को सूचना दें.’ खंडपीठ ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता एमएल शर्मा की एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही जिसमें कथित रूप से कानून का उल्लंघन कर विदेशी कोष प्राप्त करने के संबंध में आप राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और उसके कुछ सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आग्रह किया गया था.
खंडपीठ का यह आदेश केन्द्र की स्थाई वकील रिचा कपूर की ओर से यह रिपोर्ट दाखिल करने के बाद आया कि 2012 में टीम अन्ना की सिविल सोसायटी के खाते के आकलन किया गया था और एक रिपोर्ट याचिकाकर्ता की पहले इसी तरह की एक जनहित याचिका पर इस साल जनवरी में इसी अदालत की एक अन्य खंडपीठ के समक्ष दाखिल की गई थी. अदालत ने केन्द्र की रिपोर्ट को रेकॉर्ड पर लेते हुए वकील से कहा कि वह 26 नवंबर 2012 को आप के गठन के बाद आप को दानदाताओं की ओर से दिए गए कोषों के विवरण की जांच कराएं.
अदालत ने 11 अक्तूबर को केन्द्र से कहा था कि वह सिविल सोसायटी के खिलाफ इसी तरह की पहले की गई एक शिकायत पर तैयार जांच रिपोर्ट 23 अक्तूबर तक रेकॉर्ड पर रखे.
केन्द्र ने इससे पहले अदालत से कहा था कि याचिकाकर्ता ने अपनी जनहित याचिका में जो बिंदू बुलंद किए हैं, उनके पहले ही जांच किए जा चुके हैं और सरकार ने पहले ही मुद्दों पर एक रिपोर्ट तैयार की है. मामले के एक प्रतिवादी प्रशांत भूषण ने पहले दलील दी थी कि याचिका दुर्भावनापूर्ण है और अपनी पहली रिपोर्ट में भी सरकार को सिविल सोसायटी के खिलाफ कुछ नहीं मिला था.
.jpg)
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें