नोबेल शांति पुरस्कार समिति का फैसला सही : मलाला - Live Aaryaavart (लाईव आर्यावर्त)

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शनिवार, 12 अक्टूबर 2013

नोबेल शांति पुरस्कार समिति का फैसला सही : मलाला

इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिलने से थोड़ी निराश किशोर उम्र की पाकिस्तानी कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई ने कहा कि उन्हें अभी बहुत काम करने की जरूरत है। पिछले साल तालिबान के हमले की शिकार हुईं मलाला ने इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार रासायनिक हथियार निषेध संगठन (ओपीसीडब्ल्यू) को दिए जाने की घोषणा के बाद एक समाचार चैनल से कहा कि उन्होंने (नोबेल शांति पुरस्कार समिति) सही फैसला लिया, क्योंकि मुझे अभी बहुत काम करने की जरूरत है।

 मलाला ने कहा कि अगर हम नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर लिए गए फैसले को भूल जाएं तो मुझे लगता है कि मुझे लोगों ने अपना पुरस्कार दे दिया है। उन्होंने मुझे नामांकित किया और यह मेरे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है।  कहा कि और मेरे मन में एक पुरस्कार है जिसके लिए मैं संघर्ष करूंगी, जिसके लिए मैं अभियान चलाऊंगी। यह पुरस्कार हर बच्चों को स्कूल जाते देखना है। मैं अपनी जिंदगी इसके लिए लगा दूंगी क्योंकि मैं अपने जीवन में यही पुरस्कार पाना चाहती हूं। उन्होंने कहा कि वह अपने देश वापस लौटकर आतंकवाद से लड़ना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान वह देश है जहां मेरा जन्म हुआ और मैं पाकिस्तान की एक देशभक्त नागरिक हूं तथा अपने देश से प्यार करती हूं। मैं अपने देश के प्रति सच्ची होना चाहती हूं। मुझे पूरी उम्मीद है कि मैं वापस पाकिस्तान जाऊंगी क्योंकि मैं वहां आतंकवाद के खिलाफ लड़ना चाहती हूं।

दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और प्रथम महिला मिशेल ओबामा ने मलाला से व्हाइट हाउस के ओवल कार्यालय में मुलाकात की और उनके साहस तथा प्रयासों की प्रशंसा की। मुलाकात के बाद व्हाइट हाउस ने कहा कि राष्ट्रपति बराक ओबामा और प्रथम महिला मिशेल ओबामा ने मलाला यूसुफजई का ओवल कार्यालय में स्वागत किया और पाकिस्तान में लड़कियों की शिक्षा को लेकर उनके कार्यों के लिए शुक्रिया अदा किया। व्हाइट हाउस ने कहा कि मलाला के साहस और सभी लड़कियों को स्कूल भेजने के उसके ख्वाब को सच साबित करने की प्रतिबद्धता को लेकर अमेरिका, पाकिस्तान के लोगों के साथ खड़ा है। इस समय ब्रिटेन के बर्मिंघम में रह रही मलाला को पिछले साल अक्टूबर में पाकिस्तान की स्वात घाटी में तालिबान ने उस समय गोली मार दी थी जब वह स्कूल बस में जा रही थीं।

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