केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ ने शुक्रवार को कहा कि कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ दुष्कर्म की रोकथाम, निषेध और निवारण कानून-2013 के लागू होने से एक नए अध्याय की शुरुआत होगी। उन्होंने कहा कि इस कानून से कामकाज में महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी हर नियोक्ता की होगी। उन्होंने कहा कि इस कानून के सफल क्रियान्वयन के लिए समाज को सामूहिक प्रयास करने चाहिए।
कृष्णा तीरथ ने नई दिल्ली में कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ दुष्कर्म की रोकथाम से संबंधित कार्यशाला का उद्घाटन किया। इसका आयोजन अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के सहयोग से स्टैंडिंग कॉन्फ्रेंस ऑन पब्लिक एन्टरप्राइजेज (एससीओपीई) ने किया।
महिला और बाल विकास मंत्री ने कहा कि यह कानून न केवल दुष्कर्म की व्याख्या करता है, बल्कि शिकायतों के निवारण के लिए भी कार्यप्रणाली बनाता है। उन्होंने इस कानून के कुछ प्रावधानों जैसे-संगठन के भीतर ही स्थानीय शिकायत समितियों का गठन, 90 दिन में जांच प्रक्रिया पूरी करने और दीवानी अदालतों के अधिकारों के समान ही शिकायत समितियों को अधिकार प्रदान करने का भी उल्लेख किया।
इस अवसर पर आईएलओ की निदेशक टिने स्टरमॉस ने कहा कि पिछले दशक में दुष्कर्म, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती चिंता का विषय है। उन्होंने महिला और बाल विकास मंत्रालय को इस कानून को अधिसूचित करने के लिए कहा। एससीओपीई ने आईएलओ के सहयोग से, कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ दुष्कर्म की रोकथाम कानून 2013 को लागू कराने में अपने विचार व्यक्त करने का अवसर प्रदान करने के लिए दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस अवसर पर विद्यालयों के गणमान्य व्यक्तियों और आईएलओ के सदस्यों ने भाग लिया।

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